राजनीति, खुन्नस और बिहार चुनाव

 
राजनीति की वर्तमान दुनिया में यदि दो बड़े विरोधियों की बात की जाय तो निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार का नाम सबसे ऊपर आएगा. वैसे, नरेंद्र मोदी के कई कट्टर विरोधी रहे हैं, लेकिन चर्चित तो नीतीश कुमार ही हुए हैं. मोदी का विरोध नीतीश कुमार ने राजनीति से परे हटकर व्यक्तिगत स्तर पर भी निभाया है और अपनी सरकार तक को खतरे में डालने से भी नहीं चुके हैं. अब यह दोनों एक बार फिर आमने सामने आने वाले हैं, विरोधियों के ही अंदाज में. वैसे तो बिहार हमेशा से ही राजनीति की दुनिया में अलग स्थान रखता रहा है, लेकिन आने वाले विधानसभा चुनावों की अहमियत कुछ ज्यादे ही बढ़ गयी है. इसका कारण भी स्पष्ट है कि बिहार विधानसभा का चुनाव मात्र एक राज्य का चुनाव न होकर, केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार का पहला बड़ा शक्ति परीक्षण भी है. बिहार के बड़े खिलाडी रहे लालू प्रसाद यादव का दक्षिणपंथी विरोध शुरू से ही जगजाहिर रहा है, बल्कि यह कहा जाय कि वह खुद को संघ और भाजपा का सबसे बड़ा विरोधी मानते हैं तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगा. इनके अतिरिक्त, देश में सर्वाधिक शासन करने वाली कांग्रेस का दर्द भी सबके सामने है. मात्र 44 सांसदों के दम पर संसद में विरोध कर रही कांग्रेस के सामने विशालकाय मोदी और भाजपा खड़े हैं. ऐसे में यदि बिहार विधानसभा में भगवा परचम लहराता है तो कांग्रेस की मुश्किलें संसद में और ज्यादे बढ़ेंगी, इसलिए नरेंद्र मोदी के खिलाफ वह भी बिहार विधानसभा चुनाव में जी जान लगाने से नहीं चूकेगी. इन पार्टियों के अतिरिक्त, नयी राजनीतिक ताकत बन कर उभरे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी बिहार विधानसभा के चुनाव को लेकर बेचैन से नजर आने लगे हैं. उनकी बेचैनी समझी जा सकती है, क्योंकि दिल्ली में बिचारे को बाथरूम भी उपराज्यपाल, यानि केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछकर जाना पड़ता है. वह क्रन्तिकारी आदमी जो ठहरे, खुद को ही संविधान, कोर्ट सब मानते हैं, तो बार-बार केंद्र सरकार से तालमेल करने के नाम पर झुकना उनके लिए अब असहनीय सा हो गया है. और तो और, उनको मिलने तक का समय नरेंद्र मोदी नहीं दे रहे हैं, इसलिए मोदी के खिलाफ टीवी, एफएम, अख़बार और पूरी दिल्ली में धुआंधार होर्डिंगबाजी करने के बाद, बिहार विधानसभा चुनाव के माध्यम से केजरीवाल भी केंद्र सरकार का इस्तकबाल कम करने में जबरदस्त रुचि ले रहे हैं. वैसे तो, आम आदमी पार्टी ने फैसला किया है कि बिहार विधानसभा चुनाव वह नहीं लड़ेगी लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रचार जरूर करेगी. आप नेता आशुतोष ने बयान दिया है कि ‘पीएम ने दिल्ली को एक पुलिस स्टेट बना दिया है, दिलीप पांडे को कुचलने की कोशिश की गई और हमारे कार्यकर्ताओं को पीटा गया, अब हम लोग बिहार जाएंगे और पीएम की असलियत लोगों को बताएंगे. आशुतोष के बयान के पहले केजरीवाल ने भी कहा था कि बीजेपी बिहार में वैसे ही हारेगी जैसे दिल्ली में हारी थी. वहीं बिहार में आप द्वारा प्रचार करने के फैसले का स्वागत करते हुए जेडीयू नेता शरद यादव ने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘हम भी केजरीवाल के लिए बनारस गए थे.’ वैसे, शरद यादव और केजरीवाल का आशावादी रूख नयी राजनीति का तालमेल ही तो है, अन्यथा यह वही केजरीवाल हैं जो हर एक पार्टी को भ्रष्ट कहने से चूकते नहीं थे. अब लोहा गरम हो गया है बिहार विधानसभा चुनाव का और अपने अपने हथौड़े लेकर सभी पार्टियां मैदान में उत्तर गयी हैं. सभी अपने अपने दावे कर रहे हैं, कोई खुद को कृष्णभक्त बता रहा है तो कोई किसी को सांप और खुद को चन्दन. इसी कड़ी में मोदी ने कहा कि मैं श्रीकृष्ण का भक्त हूं. यदुवंशियों की परंपरा का पालन करता हूं. मुझे सबसे अच्छी कहानी कालिया नाग वाली लगती है. लालू प्रसाद ने बेटे -बेटियों के लिए यदुवंशियों को जहर पिलाया है. यहां कभी भी इस पर चर्चा नहीं होती कि उद्योग लगे या नहीं, कारखाने लगे या नहीं, बल्कि सांप और चन्दन की ही चर्चा चलती रहती है! इसके बाद लालू प्रसाद ही कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने सजगता से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके और नीतीश के बीच मधुर रिश्ते में खटास डालने आए हैं. वह तो बड़े भाई हैं और नीतीश छोटे भाई हैं, उनमें आपस में बड़ा प्यार है. चुनावी बयानों की अगली कड़ी में नीतीश कुमार ने पीएम के बयान पर कहा कि वे कहते हैं कि उनका (नीतीश कुमार का) डीएनए खराब है, मैं बिहार का बेटा हूं, मेरी डीएनए भी बिहार के लोगों की तरह है. नीतीश ने उल्टा दांव चलते हुए कहा कि मैं बिहार को लोगों पर छोड़ता हूं कि वह किस तरह से उनके डीएनए को खराब कहने वाले को जवाब देते हैं. कांग्रेस भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे के विरोध में राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश के नेतृत्व में कांग्रेस ने 'महा-धरना' ही दे दिया. वैसे, इस महाधरना में लोग कितने आये, यह तो कांग्रेस ही बता पायेगी, लेकिन रमेश ने कई घोटालों पर मोदी की चुप्पी को लेकर उन्हें 'मौनेंद्र मोदी' जरूर करार दे दिया. राजनीति की दुनिया भी बड़ी विचित्र होती है, क्योंकि जिन कांग्रेसी प्रधानमंत्री पर सबसे ज्यादे चुप रहने का आरोप लगता रहा था, अब वही पार्टी दूसरों पर आरोप चस्पा करने में ज़रा भी संकोच नहीं कर रही है. अब यह सब चलता ही रहेगा, क्योंकि केंद्रीय राजनीति का अखाडा बन चूका है बिहार विधानसभा का चुनाव. वैसे बेहतर रहता कि अपनी व्यक्तिगत खुन्नस की राजनीति छोड़कर सभी नेता बिहार विकास पर ध्यान केंद्रित करते, लेकिन इस चुनाव की पहली बिसात में खुन्नस ही ज्यादा दिखी है. वह चाहे नरेंद्र मोदी का भाषण हो, या नीतीश की प्रतिक्रिया हो, केजरीवाल की आशा हो या लालू की राजनीति ही क्यों न हो! उम्मीद की जानी चाहिए कि एक दुसरे का चेहरा पसंद / नापसंद करने और डीएनए पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करने के बजाय बिहार के भाग्य के बारे में बिचार किया जायेगा और विचार से आगे बढ़कर सम्यक विकास होना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at launch of the Deendayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana and various development projects, at Patna, Bihar on July 25, 2015. The Governor of Bihar, Shri Keshri Nath Tripathi, the Chief Minister of Bihar, Shri Nitish Kumar, the Union Ministers, Shri Suresh Prabhu, Shri Ram Vilas Paswan, Shri Ravi Shankar Prasad, Shri Dharmendra Pradhan, Shri Piyush Goyal, Shri Upendra Kushwaha, Shri Ram Kripal Yadav and other dignitaries are also seen.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at launch of the Deendayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana and various development projects, at Patna, Bihar on July 25, 2015.
The Governor of Bihar, Shri Keshri Nath Tripathi, the Chief Minister of Bihar, Shri Nitish Kumar, the Union Ministers, Shri Suresh Prabhu, Shri Ram Vilas Paswan, Shri Ravi Shankar Prasad, Shri Dharmendra Pradhan, Shri Piyush Goyal, Shri Upendra Kushwaha, Shri Ram Kripal Yadav and other dignitaries are also seen.
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