तुम बढ़ो, हम बढ़ें, भारत बढ़ेगा - Hindi article on Indian independence day, 15 august


देश अपने सबसे बड़े पर्व को मना रहा है. स्वतंत्रता दिवस के रूप में यह पर्व हमें अतीत के कटु अनुभवों से निकालकर वर्तमान संघर्ष और भविष्य की सुखद कामना को बार बार याद दिलाता है. स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण हुआ जिसमें उनकी चिंता उभर कर सामने आई. संसद को अखाडा न बनने की अपील, लोकतान्त्रिक संस्थाओं के दबाव में होने की बात, धर्मनिरपेक्षता के प्रति सजगता, चरमपंथ के प्रति सख्ती, पडोसी देशों के साथ सम्बन्ध, शिक्षण व्यवस्था पर आत्मनिरीक्षण, जल प्रबंधन और लोकतंत्र के नवीकरण जैसे मुद्दों को उभारते हुए राष्ट्रपति  (Hindi article on Indian independence day, 15 august, PM Modi Speech in Hindi) ने आने वाले समय की रूपरेखा ही स्पष्ट की. उनके इस भाषण के बिन्दुओं से शायद ही कोई असहमत हो, पर क्या इन सब विषयों के प्रति सिर्फ सरकार ही जिम्मेवार है और हमारी, आपकी, देश के नागरिकों की कोई सीधी जवाबदेही नहीं बनती है? क्या आज़ादी के लिए दिए गए बलिदान हमारी पूँजी नहीं हैं? यदि हाँ! तो हमारी जिम्मेवारियां भी किसी सरकार से कतई कम नहीं हैं. प्रख्यात अमेरिकन गायक बॉब डायलान कहते हैं कि नायक वह होता है जो आज़ादी के साथ आने वाली जिम्मेवारियों को समझता है. इस कथन पर हज़ारों लाखों देशभक्त, क्रन्तिकारी, स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित किया है और इस मशाल को आगे ले जाने की जिम्मेवारी निश्चित रूप से देश के युवा कन्धों पर ही है. इस सन्दर्भ में एक हिंदी फिल्म का दृश्य उद्धृत करना सामयिक रहेगा.

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आर्मी से रिटायर अफसर का बेटा शहीद हो जाता है और उसका पढ़ा-लिखा पोता विदेश जाने और धन कमाने के बारे में तर्क देता है. उस वक्त रिटायर्ड बुजुर्ग उससे पूछता है कि तुम सब लोग अगर पैसे कमाने और ऐश-ओ-आराम की ज़िन्दगी जीना चाहते हो तो देश की रक्षा कौन करेगा? यह तो रही फ़िल्मी बात, मगर देश के युवाओं को पैसे कमाने के साथ-साथ इस फ़िल्मी सीन को ज़ेहन में संजोये रखना चाहिए. बहरहाल, आज़ादी के 69वें समारोह में शिरकत करते समय हमें उन तथ्यों से अवगत रहना चाहिए, जिन्हें हमने हासिल कर लिया है और उससे भी ज्यादा उन उद्देश्यों के बारे में याद करते रहने की आवश्यकता है जो हमारी पहुँच से दूर दिखते हैं. सकारात्मक बात यह है कि अब हमारा देश अपने मानव संशाधन, आर्थिक क्षमता, राजनीतिक नेतृत्व, रक्षा क्षेत्र, अंतरिक्ष क्षेत्र जैसे क्षेत्रों में न केवल  (Hindi article on Indian independence day, 15 august, PM Modi Speech in Hindi) आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि विश्व को नेतृत्व देने वाले देशों की कतार में शामिल होने योग्य क्षमता का जबरदस्त प्रदर्शन कर रहा है. इन क्षेत्रों को छोड़ दिया जाय तो नकारात्मक क्षेत्रों की फेहरिस्त भी काफी लम्बी दिखती है. नयी गठित मोदी सरकार से भारतीय जनमानस को काफी उम्मीदें हैं. पिछले पंद्रह अगस्त को जब नरेंद्र मोदी ने लाल किले से भाषण दिया था तो उन्होंने वादों का एक लम्बा चौड़ा वक्तव्य दिया था. पर असल सवाल यह है कि एक साल बाद इन वादों पर वो कितने खरे उतरे हैं और कितनी योजनाओं पर अमल हुआ है?


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इन योजनाओं पर हुई कार्रवाई को सरकारी आंकड़ों के तराज़ू में तौलें, तो मोदी सरकार मोटे तौर पर अपने वादों पर खरी उतरती नज़र आती है. कहते हैं, तस्वीरों की तरह ही आंकड़ें भी झूठ नहीं बोलते. लेकिन अकसर इन आंकड़ों के पीछे का सच दिखाई नहीं देता है. इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जो सबसे बड़ी समस्या सामने आती है, वह निश्चित रूप से रोजगार की है. प्रधानमंत्री ने 'स्किल इंडिया' की योजना का उद्घाटन भी किया. इस योजना के तहत हर साल 24 लाख युवकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. लेकिन देश भर में हर साल 1.2 करोड़ लोगों को नौकरियों की ज़रूरत होगी. इसके इलावा खेती करने वाले 26 करोड़ से ज़्यादा युवाओं को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है. रोजगार के अतिरिक्त, आतंरिक सुरक्षा, पाकिस्तान से अस्थिर सम्बन्ध और चीन की घेरेबंदी भी आधुनिक भारत की मुख्य (Hindi article on Indian independence day, 15 august, PM Modi Speech in Hindi) समस्याओं में से एक है. इस बार लालकिले से बोलते हुए प्रधानमंत्री ने विशेषकर रोजगार के ऊपर कोई सीधी बात नहीं कही, जिससे देश की इस मुख्य समस्या के प्रति असमंजस की स्थिति यथावत बनी हुई है. हालाँकि, यह कोई ऐसा विषय है भी नहीं जो एक दिन में चुटकी बजाकर हल कर लिया जाय. बहरहाल, इस बार प्रधानमंत्री ने लालकिले से अपनी सरकार को सौ फीसदी मार्क देते हुए कहा कि सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं है. मोदी ने कहा कि बीते एक साल के दौरान देश में एक नया विश्वास पैदा हुआ है और उन्होंने जनधन योजना, स्वच्छ भारत अभियान और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को अपनी सरकार की अहम उपलब्धि बताया.


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इस बात में कोई दो राय नहीं है कि प्रधानमंत्री ने पिछले साल साफ़ नियत से कई योजनाओं को परवान चढाने की कोशिश की है, जिनमें स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर के स्कूलों में टॉयलेट निर्माण का कार्य पूरा होने की ओर अग्रसर है, साथ ही साथ देश में 17 करोड़ से ज्यादे खाते और २२ हजार करोड़ से ज्यादा रूपये भी जमा हुए हैं, किन्तु इस बात की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है कि स्कूली टॉयलेट में पानी और लगभग 46 फीसदी खातों में पैसा नहीं जमा है. लाल किले से भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कोयले की नीलामी की चर्चा विशेष रूप से की, जिससे देश के ख़ज़ाने में 3 लाख करोड़ रूपयों की आमद हुई है. इस विषय का महत्त्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि पिछली कांग्रेस सरकार की बदनामी में कोयला घोटाले का बड़ा हाथ था, जिसमें कोयला खदानों को औने-पौने दामों में बेच दिया गया था. इस मुद्दे को लाल किले से छेड़कर नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों संसद में कांग्रेस के आक्रमण की धार पर जबरदस्त निशाना बनाया. मोदी ने भाषण (Hindi article on Indian independence day, 15 august) की अगली कड़ी में 20 लाख लोगों द्वारा एलपीजी सब्सिडी छोड़ने को भी अपनी उपलब्धियों में गिनाया, किन्तु देश में इस सब्सिडी को छोड़ने की चर्चा के साथ सांसदों द्वारा ली जाने वाली फ़ूड-सब्सिडी की चर्चा भी चली, जिस पर सरकार ने कान देना ठीक नहीं समझा. खैर, सरकारी वादों की लिस्ट आगे भी है, किन्तु जब तक हमारा, आपका और देश के उन बीस करोड़ लोगों का जो भूखे सोने को मजबूर हैं, समान विकास और जिम्मेवारी की अवधारणा समझ नहीं आती है, तब तक असल आज़ादी का लक्ष्य किस प्रकार हासिल समझा जा सकता है. राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के अभिभाषणों और क्रांतिकारियों के बलिदान को एक साथ याद करते हुए तुमको, हमको आगे बढ़ना है, तभी भारत भी आगे बढ़ेगा. और इसका एक ही मतलब है कि अपने प्रति, अपनों के प्रति, अपने गाँव के प्रति, अपने शहर के प्रति, अपने प्रदेश और देश के प्रति हम सब अपनी जिम्मेवारियों को गंभीरता से धारण करें और उसका निर्वाह भी करें!
जय हिन्द !!

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