खूबसूरती पर धब्बा हैं बदसूरत बयान

बहुत ज्यादे दिन नहीं हुए जब जदयू नेता शरद यादव ने संसद में बयान देते समय दक्षिण भारत की महिलाओं के फिगर और कसावट को लेकर बयान दिया था. तब हंगामा भी हुआ और होहल्ला भी मचा, किन्तु कभी सर्वश्रेष्ठ सांसद का खिताब पा चुके शरद यादव ने अपने बयान पर माफ़ी नहीं मांगी. अपने देश में ही क्यों, अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा भी इस गन्दी छींटाकशी से नहीं बच सकीं. मिशेल ओबामा को उनके ही देश के नेता ने 'गोरिल्ला फेस' तक कह दिया था. महिलाओं के बारे में इस प्रकार के सार्वजानिक बयान दिए जाने को हम Bad political statements about women, hindi article by mithileshकेवल गन्दी मानसिकता भर मान कर आगे बढ़ जाएँ अथवा इन बयानों के पीछे 'गन्दी मानसिकता' से आगे की कहानी की पड़ताल किया जान ठीक रहेगा! इसी कड़ी में, अपनी आदत के अनुसार दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री और आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक सोमनाथ भारती ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि अगर राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस व्यवस्था अरविंद केजरीवाल को दे दी जाए तो ‘खूबसूरत महिलाएं’ भी आधी रात को बेहिचक घूम सकेंगी. अब 'खूबसूरत महिलाओं' का उद्धरण क्यों दिया गया यह तो सोमनाथ का दिल और दिमाग ही बता सकता है, किन्तु उनके इस बयान पर स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रियाएं भी उतनी ही तेजी से आईं. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, ‘‘यह महिलाओं को लेकर पूरी तरह बेहूदा और अपमानजनक बयान है. यह वाकई उनका रवैया दिखाता है.’’ बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आप नेता का ये अत्यंत आपत्तिजनक बयान है. सोमनाथ की लानतें मलानतें यहीं नहीं रुकीं, बल्कि उनकी पत्नी लिपिका मित्रा ने भी ट्वीट करके कहा कि क्योंकि वह सुंदर नहीं थी, इसलिए उनके पति ने उनकी कोई कदर नहीं की और इसलिए उन्हें प्रताड़ना भी सहनी पड़ी. इसके पहले केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री रहे सोमनाथ भारती के ऊपर आरोप है कि जनवरी 2014 में खिड़की एक्सटेंशन में देर रात छापेमारी की थी और कुछ अफ्रीकन महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा था. यह मामला तब कुछ ज्यादा ही चर्चित हुआ था और विदेश मंत्रालय तक को इस मामले में सामने आना पड़ा था, क्योंकि बात विदेशी नागरिकों से जुडी थी. सोमनाथ भारती का दिल्ली महिला आयोग से भी विवाद सामने आया था, जब उसके द्वारा जारी समन पर उन्होंने टालमटोल का रवैया अपनाया था. समस्याएं सिर्फ सोमनाथ भारती की ही हो तो और बात है, किन्तु उनका हालिया बयान पुरुष मानसिकता का गन्दा चित्रण प्रस्तुत करता है. सोमनाथ भारती जैसों को समझना चाहिए कि महिलाएं सुन्दर ही होती हैं, बदसूरत होती है तो उनके जैसी मानसिकता और कोढ़ में खाज की तरह उनके बयान. समाज के लिए चिंता की बात है कि इस प्रकार के लोग विधानसभा, लोकसभा में हमारा प्रतिनिधित्व करते हैं. काश यह लोग महाभारत के महात्मा विदुर के उस कथन को समझते और फॉलो करते, जिसमें महात्मा विदुर ने कहा है कि 'राजनीति में अपनी जीभ में गाँठ लगाकर रखना चाहिए और जब आवश्यक हो तभी तोल कर बोलना चाहिए'. उम्मीद की जानी चाहिए कि सोमनाथ भारती और उन जैसे लोग अपना मुंह खोलते समय, विशेषकर महिलाओं के सन्दर्भ में अतिरिक्त सावधानी बरतेंगे! उनकी मानसिकता तो एक दिन में बदल नहीं सकती है, किन्तु उनकी जुबान कम से कम मर्यादा का पालन जरूर करे. जहाँ तक बात राजनीतिक लड़ाई की है तो आम आदमी पार्टी अपने तरीके से राजनीतिक मुद्दों पर लड़ती रहे, इससे भला किसे आपत्ति हो सकती है. इसी दौरान, बदजुबानी का आरोप भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी पर भी लगा है. बिहार के सुपौल से कांग्रेस सांसद रंजीत राजन के साथ एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, सिलचर से कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव, तृणमूल सांसद अर्पिता घोष और सीपीएम सांसद पीके श्रीमति ने रमेश बिधूड़ी की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से करते हुए कहा कि लोकसभा में कांग्रेस के 25 सांसदों के निलंबन पर हंगामे के दौरान बीजेपी सांसद बिधूड़ी ने कथित तौर पर यह अश्लील कॉमेंट्स किए. अब महिलाएं आखिर कहाँ सुरक्षित महसूस करें और अपने मन की खूबसूरती को इन बदसूरत बयानों/ कमेंटों/ छींटाकसी से किस प्रकार बचाएँ. निश्चित रूप से उनका हृदय इस तरह के बयानों से छलनी हो जाता होगा. अभी हाल ही में एक ट्रेनी नौकरशाह ने सोशल मीडिया पर लम्बी पोस्ट में अपनी आपबीती बयान करते हुए लिखा था कि वह इसी तरह के मामले में जब कोर्ट गयी तब उसके साथ कोर्ट रूम में महिलाओं को दिए जाने वाले विशेषाधिकार, मसलन अकेले में बयान लिया जाना, सम्मानपूर्वक पेश आना जैसे नियम कानूनों को ताक पर रख कर बदतमीजी से पेश आया गया. ऐसे एक नहीं अनेक वाकये आपको मिलेंगे जो आपको यह सोचने पर मजबूर कर देंगे कि सोमनाथ भारती, शरद यादव, रमेश बिधूड़ी या ऐसे ही दुसरे लोग महिलाओं को ही क्यों निशाना बनाते हैं. यह क्यों न माना जाय कि तथाकथित सम्माननीय लोग महिलाओं को इक्कीसवीं सदी में भी कुछ ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं हैं और उन्हें जब ये महिलाएं अपनी बराबरी में खड़ी नजर आती हैं तो वह आप खो बैठते हैं और नतीजा होता है 'लिंगभेदी टिप्पणियाँ'! देखा जाय तो अपमानजनक बयानों का सिलसिला मात्र कुंठित या घृणास्पद ही नहीं है, बल्कि उससे आगे बढ़कर यह राजनीतिक अधिकारों की तरफ मुड़ गया है. यही तो कारण है कि लिपिक जैसी महिलाओं के बोलने पर सोमनाथ भारती जैसे लोग 'सुन्दर महिलाओं' का सोचा समझा बयान देते हैं. पर वह भूल गए हैं कि यमुना में काफी पानी बह चुका है और लगातार बहता भी जा रहा है. महिलाओं के बदले वक्त को स्वीकार न करने वालों का महिमांडन नहीं किया जाना चाहिए, इस बात को समाज समझ चुका है. यकीन न हो तो सोमनाथ के बारे में आ रहे रिएक्शंस को महसूस कीजिये आप भी!
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