बच्चों को बख्श दे पाकिस्तान !

इस बात की सच्चाई पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं है कि आज़ादी के बाद से ही पाकिस्तान भारत विरोध पर ही ज़िंदा रहा है, अन्यथा उसके न केवल कई टुकड़े हो गए होता बल्कि गृह युद्ध के कई दौर उसके सामने आ चुके होते. आतंकवाद के अपने कई प्रयासों के असफल होने के बाद पाकिस्तान की ओर से नयी कोशिशें बदस्तूर जारी हैं. एक ओर जहाँ भारत बातचीत की पहल कर रहा है, पाकिस्तान अपनी ओर से आतंक के जहर का छिड़काव जारी रखे हुए है. गुरदासपुर हमले के कुछ ही दिनों बाद जम्मू-कश्मीर में बीएसएफ की गाड़ी पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया है. हमले में दो जवान शहीद हो गए और 10 अन्य घायल हो गए, जबकि जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया और दूसरे को modi-with-hatजिंदा पकड़ लिया गया. पकड़े गए आतंकी की पहचान पाकिस्तान के फैसलाबाद निवासी उस्मान खान के रूप में की गई है. गौरतलब है कि मुंबई के 26/11 हमले में जिंदा पकड़ा गया आतंकी आमिर अजमल कसाब भी इसी जगह का रहने वाला था. खैर, इस बार ज़िंदा पकड़े गए आतंकी को गौर करने पर कई ऐसी बातें उभरती हैं जो विचारकों को सोचने पर मजबूर करती हैं. पकड़ा गया आतंकी मात्र 20 साल का है. इससे भी आगे बात यह है कि पहले यह कहा जाता रहा है कि आतंकी गरीब तबके के युवाओं को पैसे इत्यादि के लालच में आतंकी बनने को राजी कर लेते हैं, मगर उस्मान के मामले में यह जानकारी मिली है कि यह पढ़े लिखे और अपेक्षाकृत संपन्न, भरे पूरे परिवार से सम्बन्ध रखता है. ऐसे में समाजशास्त्रियों को बदलते समय के अनुसार 'आतंकी' दांव पेंचों की गहराई की फिर से व्याख्या करनी पड़ सकती है. उसके द्वारा दिए गए बयान उसके दिमाग में भरे गए असीमित ज़हर की ओर इशारा करते हैं. पत्रकारों के सवाल करने पर गहरे नीले रंग की कमीज और भूरे रंग की पतलून पहने नावेद ने राहत भरे अंदाज में कहा, 'मैं हिंदुओं को मारने आया था.' अब पाकिस्तानी हुक्मरानों की मानसिकता का अंदाजा आप खुद ही लगा लीजिये कि वहां भारत और हिन्दू विरोधी मानसिकता को किस कदर हवा दी जाती है. इसी दौरान पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ ने कहा कि वे भारत समेत किसी भी तरह के खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं. उनका बयान सच भी हो सकता है, लेकिन पाकिस्तानी जनरल क्या इस बात का जवाब दे सकते हैं कि पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेट कप्तान वसीम अकरम की जान लेने का प्रयास करने वालों से कौन निबटेगा? वसीम अकरम कराची में उस समय बाल-बाल बचे जब उनकी कार पर अज्ञात हमलावरों ने फ़ायरिंग कर दी. संयोगवश पाकिस्तान में वसीम अकरम पर Pakistani Terrorists new target, child and youth for brainwash, hindi articleउसी दिन हमला हुआ जब उस्मान और उसके आतंकी साथी उधमपुर में बीएसएफ की गाडी पर हमले कर रहे थे. राहिल शरीफ और नवाज शरीफ दोनों को अपने नाम में शामिल 'शराफत' से जवाब देना चाहिए कि अपने देश में उस्मान जैसी नयी पौध पर वह ज़हर का छिड़काव क्यों कर रहे हैं? क्या इन सबसे पाकिस्तान की समस्याएं वाकई सुलझ जाएँगी? क्या हिन्दू विरोधी मानसिकता को हवा देने से उनके देश से गरीबी और आतंकवाद मिट जायेंगे? क्या इससे पेशावर के स्कूल में सैकड़ों निर्दोष बच्चों की हत्या जैसे अपराध फिर नहीं होंगे? वैसे भी पाकिस्तान की सरकारी नीति ही जब हिन्दू विरोध पर टिकी हो तो उसके आम जनमानस में बन रही मानसिकता को क्यों दोष दिया जाय! यदि ऐसा नहीं होता तो पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यांक समुदायों पर अत्याचार का सिलसिला बढ़ता नहीं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले पचास वर्षों में पाकिस्तान में बसे नब्बे प्रतिशत हिंदू देश छोड़ चुके हैं और अब उनके पूजा स्थल और प्राचीन मंदिर भी तेज़ी से ग़ायब हो रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार की अनदेखी और ग़लत नीतियों के कारण देश में सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से हैं, जिन्हेंPakistani Terrorists new target, child and youth for brainwash, hindi article by mithilesh पिछड़े होने के कारण हमेशा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है. पाकिस्तान में खरबों रूपये निवेश करने वाले चीन जैसे देशों को सोचना चाहिए कि वहां मानवाधिकारों के हनन का स्तर गिरता क्यों जा रहा है. खैर, मानवाधिकारों के हनन में चीन का रिकॉर्ड ही दागदार है, मगर अमेरिका जैसे देश तो पाकिस्तान से सीधे सवाल कर सकते हैं कि पाकिस्तान में हिन्दू विरोधी मानसिकता लगातार क्यों बढ़ाई जा रही है. बड़े तो बड़े, छोटे बच्चों को भारत विरोध और हिन्दू विरोध के नाम पर उकसाना, ज़हरीला बनाना एक राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान को कहाँ ले जायेगा?  जहाँ तक आतंकी घटनाओं के लिए बच्चों के इस्तेमाल का प्रश्न है तो सिर्फ पाकिस्तानी चरमपंथी ही क्यों अलकायदा के बाद वैश्विक स्तर पर उभरे आईएसआईएस ने छोटे छोटे बच्चों से क़त्ल कराने का काम और उसकी वीडियो बनाकर प्रसारण करने का कार्य बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. इन छोटे बच्चों, किशोरों जिनको चरमपंथ, हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई इत्यादि की परिभाषा भी ठीक तरह से नहीं मालूम होगी, उनके जीवन को पशुओं से भी बदतर बनाकर अपने समुदाय का किस प्रकार हित कर रहे हैं ये आतंकी! अल्लाह के नाम पर ही सही! बच्चों को बख्श दिया जाना चाहिए, क्योंकि उन्हें अच्छी तालीम और जीवन को समझने का अधिकार है. किसी को भी हक़ नहीं है कि वह छोटे फूलों को कुचल दे या उस पर ज़हर का छिड़काव करके उसे ज़हरीला बना दे. मगर, बुद्धिशत्रुओं को यह बात कब समझ आयी है कि 'बबूल का पेड़ बोने पर आम का फल नहीं उगता है'. मगर, आतंक का गढ़ बन चुके पाकिस्तान को इसकी समझ आएगी, इसकी उम्मीद न के बराबर ही है, अन्यथा वह अपने ही बच्चों को ज़हरीला बनाने से पहले हज़ार बार सोचता!
 
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