प्रचार नहीं, 'अच्छे कार्यों का प्रसार' बना अखिलेश की पहचान! Environment Friendly Projects, Akhilesh Yadav, Hindi Article, UP Government



विश्व जनसँख्या दिवस 11 जुलाई को आकर चला गया. कई जगहों पर छिटपुट कार्यक्रम भी हुए, किन्तु इस दिन बड़े स्तर पर पर्यावरण को लेकर जो सरकारी जागरूकता दिखाई देनी चाहिए थी, वह कहीं दिखाई नहीं दी, सिवाय उत्तर प्रदेश के! सवाल है कि आप लोगों को जनसँख्या के प्रति, पर्यावरण के प्रति कैसे जागरूक करेंगे? अगर आप किसी व्यक्ति से कहें कि वह उसे कम बच्चे पैदा करना चाहिए तो वह शायद आप पर भड़क जाए और कहे कि 'अपने काम से काम रखो', किन्तु वहीं अगर आप उससे जल-संरक्षण पर बात करते हैं, प्रदूषण कम करने की बात करते हैं, प्राकृतिक संशाधनों (Environment Friendly Projects) को बढ़ाने की बात करते हैं तो कहीं न कहीं उसके मन में यह सन्देश अवश्य जायेगा कि उसे भी प्रकृति को लेकर सजग हो जाना चाहिए. और इसके लिए वह आबादी तो कम करने की सोचेगा ही, दूसरी तरफ हर वह कार्य करने के प्रति प्रेरित होगा, जिससे पर्यावरण और हमारी धरती का भला हो! राजनीति को एक तरफ रख दीजिये यहाँ! कौन नेता अच्छा है, कौन बुरा है इसकी चर्चा अलग से कीजिये पर वास्तव में कार्य करने वाले का मनोबल जरूर बढ़ाइए. हमारे यहाँ शास्त्रों में कहा गया है कि 'एक वृक्ष सौ पुत्र समान'. 

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इसी कड़ी में पर्यावरण को संवारने और उसके संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश में पिछले वर्ष एक ही दिन में दस अलग-अलग स्थानों पर 10 लाख से अधिक पौधे लगाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यूपी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का सम्मान प्राप्त हुआ था, और अब 'क्लीन यूपी - ग्रीन यूपी' अभियान के तहत बीती 11 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में 6161 जगहों पर 24 घंटे के दौरान 5 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाकर नया विश्व कीर्तिमान बनाने का प्रयास हुआ. इससे भी बड़े आश्चर्य की बात तो यह देखिये कि अगर कोई और राजनेता या मुख्य्मंत्री इस तरह का कार्य करता तो हज़ारों करोड़ का विज्ञापन लगा कर इस कार्य का प्रचार करता, किन्तु अखिलेश यादव की के इस प्रयास को मेन-स्ट्रीम मीडिया में भी औपचारिक जगह ही मिल सकी. चूंकि, मीडिया को भी मसालेदार ख़बरें चाहिए होती हैं और आप आश्चर्य करेंगे कि लगभग इसी समय के आस-पास, पिछले 10 दिनों से हर न्यूज-चैनल, हर बड़ी वेबसाइट, समाचार-पत्रों में किसी टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी की शादी की ख़बरें 'ब्रेकिंग-न्यूज' की तरह छाई हुई हैं, किन्तु उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव 5 करोड़ पौधे लगाते हैं, उसकी खबर कई जगहों पर या तो आपको दिखेगी नहीं और दिखेगी भी तो कहीं छोटी सी! क्या वाकई, कोई फ़िल्मी शादी, 5 करोड़ पौधे लगाने से ज्यादा अहम है, या फिर अंदरूनी रूप से कुछ और बात है? खुद मीडिया समूहों को इस बात पर आत्ममंथन करना चाहिए. 

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दिल्ली के मुख़्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कहीं छोटा सा काम करते हैं तो सौ करोड़ के विज्ञापन लगा देते हैं तो केंद्र सरकार की भी अधिकाधिक विज्ञापन करने के लिए आलोचना होती रही है. पर इस मामले में अखिलेश यादव की सजगता निश्चित रूप से सराहनीय है, जहाँ उन्होंने प्रचार से ज्यादा 'कार्य का प्रसार' किया. ज़रा सोचिये, जिस दिन ये 5 करोड़ पेड़ जवान होंगे, पर्यावरण-सुरक्षा (Environment Friendly Projects, Akhilesh Yadav) का स्तर कितना उत्तम होगा. हां, इस बारे में उन पेड़ों की रखवाली और भू-माफियाओं से उनको बचाना भी अहम होगा, अन्यथा सीएम अखिलेश का कालजयी प्रयास व्यर्थ ही जायेगा. इसके लिए नेताओं को तो सक्रिय रहना ही होगा, साथ ही साथ नौकरशाही को भी बेहद सजगता से देखरेख प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी! जहाँ तक इस कार्यक्रम की बात है तो, मुख्यमंत्री अखिलेश ने यादव कानपुर देहात के रसूलाबाद से इस अभियान की शुरुआत की, जबकि मुलायम सिंह यादव लखनऊ के कुकरैल में पौधे लगाकर इस अभियान का हिस्सा बने. पौधे लगाये जाने को लेकर वन विभाग के प्रमुख सचिव वन संजीव सरन ने बताया कि यह अभियान 11 जुलाई को सुबह 10 बजे से शुरू हुआ, और इस अभियान के तहत 24 घंटों में 6161 जगहों पर पांच करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था. 

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इस पूरे अभियान की निगरानी द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट दिल्ली (टेरी) और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के ऑडिटर की ओर से की जा रही थी, मतलब किसी भी तरह की हीलाहवाली की गुंजाइश नहीं बची थी. इस अभियान में कई किस्म के पौधे लगे और इन पौधों को तीन से 12 फुट नीचे तक रोपा गया. सीएम अखिलेश के इस इनिशिएटिव से न केवल पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य पूरा हुआ, बल्कि इसके लिए दो लाख से अधिक मजदूरों को लगाया गया, जिन्हें तात्कालिक रोजगार भी हासिल हुआ. इस कड़ी में, पौधे लगाने से पहले और बाद में इसकी मानिटरिंग की भी व्यवस्था की गयी है. न केवल इस बार, बल्कि पहले से ही उत्तर प्रदेश सरकार की ऐसी कोशिशों का ही परिणाम है कि प्रदेश में 'फारेस्ट-कवर' लगातार बढ़ रहा है. यदि आंकड़ों की बात करें तो, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में यूपी में फॉरेस्ट कवर 112 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है, वहीं 261 वर्ग किलोमीटर ग्रीन कवर भी बढ़ा है. जाहिर है, अखिलेश यादव आने वाले विधानसभा चुनावों में इसे एक प्रमुख उपलब्धि के तौर पर गिना सकते हैं. इसके लिए केवल इस बार प्रयास नहीं हुआ है, बल्कि पिछली बार 7 नवंबर, 2015 को जब पौधरोपण हुआ था, तब 10 लाख 53 हजार पौधे लगाए गए थे. 

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Tree Plantation by Akhilesh
इसकी सफलता से उत्साहित होकर इस बार 5 करोड़ पौधे लगाने का अभियान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की व्यक्तिगत रुचि और भविष्य की सोच को स्पष्ट रूप में सामने रखता है. वह चाहते तो इसी पैसे के सहारे दूसरी पार्टियों की तरह 'अपनी मूर्तियां' लगवा देते या 'प्रचार' पर खर्च कर देते, किन्तु इस बात के लिए उनकी तारीफ़ होनी ही चाहिए कि उन्होंने पर्यावरण की सजगता के सम्बन्ध में न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि समस्त भारत भर के राज्यों को प्रेरणा प्रदान की है. एक अन्य आंकड़े के अनुसार, यूपी में पिछले चार वर्षों के दौरान तकरीबन 21 करोड़ पौधे (Environment Friendly Projects) लगाए गए हैं, जिसमें 950 नर्सरी की मदद ली गयी है. थोड़ी और डिटेल में जाएँ तो इस अभियान के तहत मुख्यतः शीशम, सागौन, नीम, कंजी, अर्जुन, इमली, गूलर, महुआ, जामुन जैसी प्रजातियों के साथ-साथ बेल, बहेड़ा, हरड़, पीपल, पाकड़ आदि परम्परागत प्रजातियों के पौधे भी लगाए जा रहे हैं. लगाए जा रहे 5 करोड़ पौधों द्वारा भविष्य में किए जाने वाले कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन का आंकलन भी टेरी के माध्यम से कराया जा रहा है. इस बात के लिए भी उत्तर प्रदेश सरकार की सराहना होनी चाहिए कि इस कार्यक्रम को सिर्फ 'सरकारी कार्यक्रम' बनाकर नहीं छोड़ दिया गया, बल्कि कार्यक्रम में जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए हर रोपण स्थल को एक शिक्षण संस्थान या स्वयंसेवी संस्थान से जोड़ गया है ताकि पौधों का विकास और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. जाहिर है, 'राज और समाज' के गठजोड़ से ही किसी समाज की उन्नति संभव है. 

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इसके अतिरिक्त पूरे प्रदेश में आम नागरिकों, सैन्य व अर्ध सैन्य बलों और एनसीसी कैडेटों, एनएसएस स्वयंसेवकों, ग्रामीणों तथा अन्य लोगों को भी इस अभियान का अंग बनाया गया है, जिससे इस कार्यक्रम के सम्बन्ध में अखिलेश यादव के होमवर्क का अंदाजा सहज ही लग जाता है. गौरतलब है कि इसी क्रम में 4 जुलाई को प्रदेश के समस्त विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के संबंध में शपथ भी दिलाई गई थी. वैसे भी, ग्रीन यूपी - क्लीन यूपी अभियान के तहत अखिलेश सरकार इससे पहले भी कई उल्लेखनीय कार्य कर चुकी है. प्रदेश के प्रत्येक जनपद में हरित पट्टियों का विकास, ईको पर्यटन-नीति लागू करना, कई शहरों में साइकिल-ट्रैक का निर्माण पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हुए हैं. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देशन में राज्य सरकार के कार्यक्रमों का ही नतीजा है कि राज्य पक्षी सारस और राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन की संख्या में बढोतरी हो रही है. ऐसे ही प्रयासों के तहत, जीव- जंतुओं के संरक्षण की दिशा में भी अखिलेश सरकार की ओर से विशेष प्रयास हुए हैं. 

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Tree Plantation by Mulayam, Akhilesh
20 मार्च 2016 को पूरे उत्तर प्रदेश में विश्व गौरैया संरक्षण दिवस के अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन कर गौरैया को लुप्त होने से बचाने की दिशा में अहम प्रयास किए गए, वहीं यूपी में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर के बर्ड-फेस्टिवल का आयोजन किया गया। बर्ड-फेस्टिवल के अवसर पर हर जनपद में आयोजित बर्ड वाचिंग में सर्वाधिक व्यक्तियों द्वारा पक्षियों को देखने पर इस अभियान को भी लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिया गया है. पर्यावरण पर अपनी सजगता दिखलाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह साबित किया है कि उनकी सरकार न केवल प्रदेश के विकास और औद्योगीकरण पर ध्यान दे रही है, बल्कि पर्यावरण के प्रति भी उतनी ही सचेत है. वह भी बिना किसी प्रचार के...
अखिलेश ने एक परिपक्व राजनेता की छवि हासिल कर ली है और वह समझ चुके हैं कि अगर आप 'अच्छे कार्यों का प्रसार' करते हैं तो 'प्रचार' तो झक मारकर आपके पीछे आएगा!

- मिथिलेश कुमार सिंहनई दिल्ली.



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