अब कौन सा नया बहाना बनाएगा पाकिस्तान ?? Pakistan Exposed Again, State Policy of Terrorism, Hindi Article, China Policy, World Politics



अभी कुछ दिन पहले ही अपने घड़ियाली आंसू बहा-बहा कर पूरी दुनिया के सामने कश्मीरियों का दुःख दिखा रहा था पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री सहित सेना प्रमुख और पूरा प्रशासनिक अमल इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग और यूएनओ तक सबको बताने में जुटा था कि कैसे भारतीय सेना कश्मीर में अत्याचार कर रही है. हालाँकि सब जानते हैं कि सच्चाई क्या है इसीलिए चीन को छोड़ कर किसी ने भी उसके आंसू नहीं पोछें! चीन ने भी दबे-छुपे स्वरों में ही चिंता जताई. संयोग देखिये कि इधर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सार्क सम्मलेन के लिए पाकिस्तान जाने वाले हैं, तभी सेना के द्वारा पकड़े गए एक खूंखार आतंकवादी (Pakistan Exposed Again, State Policy of Terrorism) ने स्वीकार किया है कि उन्हें पाकिस्तान का समर्थन हासिल है और पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई ही उन्हें भारत भेज रही है. साफ़ जाहिर हो गया और पाकिस्तान का मुंह पूरी दुनिया के सामने एक बार फिर काला हो गया है, किन्तु कहते हैं न कि 'कालिख़ पर कालिख़ का भला क्या असर होगा'? बताते चलें कि पाकिस्तानी मूल का आतंकी सैफुल्‍लाह बहादुर अली का पकड़ा जाना देश और सुरक्षाबलों के लिए एक ‘बड़ी सफलता’ है, क्योंकि इससे पाकिस्तान की खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ है. 

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इस क्रम में बात करें तो, कुछ दिन पहले ही कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के नजदीक नौगाम सेक्टर में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने चार आतंकवादियों को मार गिराया था और उन्ही में से एक आतंकी को ज़िंदा पकड़ लिया था. इस सिलसिले में प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा है कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि पाकिस्तान, भारत और ख़ास तौर पर जम्मू कश्मीर में चरमपंथ को उकसा रहा है. इस मामले में यह समझना भी बेहद दिलचस्प है कि अब ऐसा पहली बार तो नहीं हो रहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ हमारे पास सुबूत (Pakistan Exposed Again, State Policy of Terrorism) हैं, इससे पहले भी कई बार सुबूत इकठ्ठा हो चुके हैं और पाकिस्तान बड़ी बेहयाई से उन सुबूतों को इंकार करता रहा है. जाहिर है, जिस देश में ओसामा बिन लादेन पूरी दुनिया के सामने मारा गया हो, उस देश से अगर एक सैफुल्लाह आतंकी भी पकड़ा गया तो उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. हाँ, इस क्रम में चीन जैसे देश जो उसे समर्थन देते रहे हैं, उन्हें जरूर विचार करना चाहिए कि वह अपना भविष्य किस आतंकी राष्ट्र के साथ बना रहे हैं? 

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इस घटनाक्रम में हम देखते हैं तो जहाँ एनआईए की पूछताछ में सैफुल्‍लाह ने कबूला है कि वह पाकिस्तान के लाहौर शहर का रहने वाला है और उसका नाम बहादुर अली है. उसे आईएसआई ने यहां भेजा है और उसे मुजफ्फराबाद कैंप में हथियारों का प्रशिक्षण दिया गया है. 22 साल के बहादुर अली ने ये भी स्वीकार किया है कि उसे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा ने ट्रेनिंग दी है. इस आतंकवादी के बयानों से साफ है कि जम्मू-कश्मीर समेत भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवादी घटनाओं के पीछे पाकिस्तान (Pakistan Exposed Again, State Policy of Terrorism) ही का हाथ है. और तो और जिस हाफिज सईद को पाकिस्तान बार- बार बचाने की कोशिश करता है उसी ने पाकिस्तान के फैसलाबाद में अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा है कि अमीर नाम के एक शख्स ने कश्मीर हिंसा की अगुवाई की थी. कश्मीर में लश्कर का अमीर सक्रिय है और बुरहान वानी के जनाजे की अगुवाई लश्कर कमांडर कर रहा था. इतना ही नहीं,  पाकिस्तान के काला दिवस मनाने के फैसले पर तमाचा जड़ते हुए उसने यह भी कहा कि बुरहान के जनाजे में लश्कर के आतंकी ही थे. 



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साफ़ है कि जब इतने स्पष्ट सबूत मिल चुके हैं पाकिस्तान के खिलाफ तो भारत इसी के आधार पर पाकिस्तान को डोजियर देगा और उमीद की जा रही है कि राजनाथ सिंह सार्क (SAARC) के सम्मेलन में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे भी. हालाँकि, आतंकवाद अब एक या दो देशों के बीच का मसला भर नहीं रह गया है बल्कि इससे समस्त वैश्विक समुदाय दुखी है तो आखिर पाकिस्तान जैसे आतंकी राष्ट्र को किस आधार पर शह दी जा रही है? अब तो पाकिस्तान के पास कोई बहाना भी नहीं रह गया है, क्योंकि जिस तरह उसके खिलाफ सुबूत सामने आये हैं, उसके बाद कुछ भी साफ़ होना बाकी नहीं. भारत ने इस सम्बन्ध में अपने राजनयिकों के बच्चों को पाकिस्तान (Pakistan Exposed Again, State Policy of Terrorism) में पढ़ने पर रोक लगाकर बिलकुल उचित कदम उठाया है. ऐसे जब एक के बाद दुसरे सुबूत पाकिस्तानी आतंकियों के बारे में मिल रहे हैं तो फिर साफ़ है कि 'आतंकवाद पाकिस्तान की स्टेट-पालिसी' का ही हिस्सा बना हुआ है. भारत सरकार को पाकिस्तान से अपने राजनयिक संबंधों को भी बेहद सीमित कर देना चाहिए, कम से कम तब तक तो जरूर जब तक वह अपने यहाँ पर आतंकियों को संरक्षण देना बंद नहीं कर देता. हालाँकि, इस बात की उम्मीद भूसे के ढेर में सुई मिलने के बराबर ही है और जब तक पूरा वैश्विक समुदाय पाकिस्तान द्वारा आतंकियों के समर्थन के विरोध में सामने नहीं आता है तब तक स्थिति में बहुत बदलाव शायद ही मुमकिन दिखे!

- मिथिलेश कुमार सिंहनई दिल्ली.



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