हवाई यातायात की बढ़ती जरूरतों के बीच 'विमान हादसे'! Air Accidents Worldwide, Hindi Article, New, Indian Air Force plane crash, Dubai Plane Boeing 777 Accident, Statistics



सड़कों और रेल-नेटवर्क पर न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में बोझ बढ़ा है, तो समय की बचत के चलते लोगों ने हवाई यातायात की ओर तेजी से बढ़ना शुरू किया है. एक देश से दूसरे देश की लंबी दूरी तय करने के लिए तो पहले से ही हवाई जहाज एकमात्र विकल्प थे. हमारे देश में तो नयी उड्डयन नीति से हवाई यातायात में भारी उछाल आने की सम्भावना जताई जा रही है. इन सब में एक चीज जो सर्वाधिक डराती है, वह हवाई दुर्घटना ही है. हवाई दुर्घटना (Air Accidents Worldwide, Hindi Article) के बारे में सोच कर ही इंसान की रूह काँप सी जाती है. दुर्घटना तो खैर सभी तरह की भयावह और नुकसानदेह होती है, किन्तु बस या ट्रेन दुर्घटना में फिर भी आंशिक नुक्सान होता है, पर यही अगर विमान दुर्घटना हो तो फिर 'पूरे का पूरा कुनबा' ही एक झटके में मौत के मुंह में चला जाता है. विमान दुर्घटनाएं चाहे सिविल एविएशन से जुड़ी हों अथवा वह सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने में घटित हुई हों, लंबे समय तक रूह कंपा देती हैं. भारतीय के कलेजे को दहला देने वाली एक ऐसी ही घटना संभवतः पिछले दिनों घट चुकी है. संभवतः शब्द का इस्तेमाल यहाँ इसलिए किया गया है, क्योंकि अभी वायुसेना के लापता विमान का कोई सुराग ही नहीं मिल पाया है, और ना ही सुराग मिला है उसमें सवार भारतीय सैनिकों का! 

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हमारे रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने इस सम्बन्ध में अमेरिका और दूसरे देशों से मदद भी मांग ली है, किन्तु कई दिन बीत जाने के पश्चात भी भारतीय वायुसेना के मालवाहक विमान एएन-32 के बारे में अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है. इस सम्बन्ध में भारतीय कोस्ट गार्ड के मुताबिक विमान की तलाश के लिए अब तक की जांच बेनतीजा रही है. गौरतलब है कि यह विमान 22 जुलाई 2016, शुक्रवार को चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जाते समय लापता हो गया था, जिसमें 29 लोग सवार थे. बताते चलें कि भारतीय सेना और वायु सेना में एएन-32 जहाज़ों का व्यापक इस्तेमाल होता है, क्योंकि इनकी माल ढोने की क्षमता काफी ज़्यादा है और भारतीय वायुसेना के पास करीब 100 एएन-32 मालवाहक विमान हैं. अब जब सेना के विमानों के साथ ऐसी दुर्घटनाएं (Air Accidents Worldwide, Hindi Article) हो जा रही हैं और वह भी दुर्घटना के कारणों और उसके मलबों तक को हम नहीं ढूंढ पा रहे हैं, तो फिर सिविल उड़ानों की क्या बिसात! साफ़ जाहिर है कि हमें हवाई यात्राओं से जुड़ी कई चीजों पर शोध कार्य जारी रखने की जरूरत है. यह दुर्घटना हुए कुछ ही दिन हुए होंगे कि एमिरेट्स का तिरूवनंतपुरम से दुबई जा रहा विमान वहां उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, विमान में सवार सभी 275 यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया और कोई हताहत नहीं हुआ है, किन्तु इस घटना ने दुनिया भर में हलचल पैदा कर के रख दी है. 



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इस घटना के वीडियो दृश्यों में बोइंग 777 से धुआं निकलता दिखाई दे रहा है. घटना के बाद दुबई हवाई अड्डे से विमानों की रवानगी रोक दी गई, जिससे हवाई यातायात की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. निश्चित तौर पर हवाई जहाज के आविष्कार ने मानव-सभ्यता को एक नया आयाम प्रदान किया है, किन्तु हवाई दुर्घटनाओं की श्रृंखला देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में हम कुछ ज्यादा ही निश्चिन्त हो गए हैं. न केवल यह दोनों घटनाएं, बल्कि पिछले कुछ सालों में ऐसी कई घटनाओं ने रोंगटे खड़े करने का कार्य किया है. अगर हम वर्ष 2016 की ही बात करें तो 27 जून को सिंगापुर एयरलाइन्स की फ्लाइट 368 फ्यूल लीकेज के कारण दुर्घटनाग्रस्त (Air Accidents Worldwide, Hindi Article) होते-होते बचा और साथ ही इसमें सवार 241 यात्रियों की जान भी बची. उसके पहले कोरियन एयर फ्लाइट 2708 का भी कुछ ऐसा ही हाल हुआ 27 मई को, जिसमें 12 लोग घायल हुए तो मई महीने में ही इजिप्ट एयर फ्लाइट 804 में भयानक दुर्घटना हुई जिसमें संभवतः 66 लोगों की जान चली गयी. ऐसे ही अप्रैल 2016 में तीन और वायु दुर्घटनाएं (दर्जन मरे) हुईं तो 19 मार्च को फ्लाई दुबई फ्लाइट 981 की दुर्घटना में 62 लोग मारे गए. इसी तरह 24 फ़रवरी को हमारे पड़ोस नेपाल की तारा एयर फ्लाइट 193 की दुर्घटना में 23 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. 

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यह आंकड़ा अगर और बारीकी में लिखा जाए तो शायद एक किताब ही भर जाए. यह बात भी समझने वाली है कि कई दुर्घटनाओं में लापरवाही भी एक बड़ा फैक्टर रहा है तो वायु यातायात के क्षेत्र में लगातार शोध होने से निश्चित रूप से बड़ा परिवर्तन आ सकता है. बेहतर होगा कि हवाई यातायात से जुड़ी कंपनियां और सरकारें इस मामले में गंभीरता से कार्य करें, ताकि यह क्षेत्र लोगों में डर पैदा न करे, बल्कि हमारी जरूरत पूरा करने के साथ-साथ हमारे लिए एक आरामदायक अनुभव देता रहे! लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए विमानन कंपनियों को मानवीय लापरवाही के लिए 'जीरो-टॉलरेंस' रवैया अपनाना चाहिए तो अपनी मोटी कमाई का बड़ा हिस्सा 'आतंक-प्रतिरोध' (Air Accidents Worldwide, Hindi Article, Terrorism and Planes) के साथ-साथ इस क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने पर खर्च करना चाहिए. यह एकमात्र रास्ता है, जिससे हम हवाई दुर्घटनाओं में कमी ला सकते हैं तो लोगों की जान-माल की गारंटीड सुरक्षा करने में सक्षम भी हो सकते हैं, दूसरा कोई और रास्ता नहीं है, नहीं है, नहीं है!!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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