मोदी को न 'उकसाओ' ... !! India, Pakistan and China, Hindi Article, New, War Situation, Strength, Weakness, Uri Attack, United States of America, Russia



दिल्ली में एक लड़की के पेट में किसी सिरफिरे ने 24 बार चाकू मारा और यह उसने सरेआम किया, जहाँ लोगों का आवागमन था. लोग देखते रहे और चुप रहे ... कॉलेज में, मीडिया संस्थानों में, रेलगाड़ी में, बसों में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ होती है, पर लोगबाग चुप रहते हैं! एक अपराधी चाकू या कट्टा दिखाकर हज़ारों की भीड़ को धमका देता है और लूटपाट कर लेता है, किन्तु हमारे अधिकांश बहादुर भारतीय कुछ बोलने का साहस तक नहीं दिखा पाते. पड़ोस में अगर कोई विवाद होता है तो तथाकथित पढ़े-लिखे लोग अपनी खिड़की पर पर्दा डाल देते हैं, किन्तु यह सारे लोग सोशल मीडिया से लेकर मीडिया की बहसों में पीएम मोदी को पाकिस्तान पर हमले के लिए कुछ यूं उकसा रहे हैं, मानो इनकी बहादुरी की मिशाल से इतिहास ( India, Pakistan and China, Hindi Article, New, War Situation, Strength, Weakness, Uri Attack, United States of America, Russia) भरा पड़ा हो! ऐसे लोगों को अपने गिरेहबान में झांकना चाहिए कि विभिन्न परिस्थितियों में वह कितनी बहादुरी दिखा पाते हैं, तो इनको यह भी जानकारी होनी चाहिए कि विदेश-नीति, युद्ध के लाभ-हानि समीकरण, तमाम ख़ुफ़िया जानकारी और देश के असल शत्रु-मित्र के बारे में कोई जानकारी नहीं है. सिवाय इसके कि टीआरपी के चक्कर में कुछ भी 'बकवास' करने वाली मीडिया-कवरेज के! मीडियाई खबरों को तवज्जो देने वालों को गौर करना चाहिए कि जिस अंदाज और जोश में मीडिया भारत-पाकिस्तान के हालिया विवाद की कवरेज कर रहा है, ठीक उसी अंदाज में वह शाहरुख़ खान के पेट की कब्ज़ भी दिखलाता रहा है, या फिर अमिताभ बच्चन के बाथरूम में क्या हो रहा है, बतलाता रहा है. यह वही पत्रकार और रिपोर्टर लोग हैं, जो सड़क पर एक्सीडेंट होने पर घायल और मरणासन्न लोगों से पूछते हैं कि 'आप मरने वाले हैं और ऐसे में आपको कैसा महसूस हो रहा है'? 

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साफ़ ज़ाहिर है कि मीडिया का 99 फीसदी हिस्सा सिर्फ और सिर्फ टीआरपी में उलझा हुआ है और उसका दूसरा उद्देश्य नहीं! जहाँ तक बात नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान पर एक्शन लेने की बात है तो वह एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है, मगर वह पागलपन की शिकार होने से बच भी रही है. यूं तो 'कश्मीर मुद्दा' हमेशा से पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण रहा है, किन्तु पिछले दिनों से जिस प्रकार पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ कुछ ज्यादे ही 'कश्मीर-कश्मीर' चिल्ला रहे हैं, उससे हमें थोड़ा सावधान होने की भी जरूरत है. कहते हैं, जब कमजोर व्यक्ति अचानक बहादुरी दिखाने लगे तो अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है और इसका सशक्त उदाहरण हमें रामायण-काल में मिलता है. जब राजा बालि से बार-बार हारने के बाद सुग्रीव उन्हें युद्ध के लिए ललकारते हैं तो बालि की बुद्धिमान पत्नी तारा उन्हें समझाती हैं कि जरूर सुग्रीव के हाथ कोई ऐसी शक्ति लगी है, जिसके बल पर वह आक्रमण करने आये हैं. पर बालि नहीं मानते हैं और अंततः उनका वध हो जाता है. हम चाहे लाख कह लें कि पाकिस्तान को कूटनीतिक प्रयासों से अलग-थलग कर देंगे, पर ऐसा होना मुमकिन नहीं दिखता है. कारण इतने साफ़ हैं कि बंद आँखों से भी नज़र आ सकते हैं. वीटो पावर की बात करें तो चीन खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में आ चुका है और उसने सीपीईसी (CPEC आर्थिक कॉरिडोर) के लिहाज से लंबा गेम खेला है. अगर भविष्य में भारत-पाकिस्तान के बीच कोई वार हुआ तो चीन पाकिस्तान की ओर से लड़े या न लड़े, किन्तु उसकी सेना इस परियोजना की रक्षा के लिए पाकिस्तान में अवश्य ही मौजूद रहने वाली है. मतलब पाकिस्तान को चीन द्वारा खुले तौर पर सैन्य सहयोग हो सकता है, वहीं कूटनीति के स्तर पर चीन पाकिस्तान का साथ किस स्तर तक दे सकता है वह हम न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG) में उसके भारत विरोध को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं. 



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पाकिस्तान में तो खुलकर कहा जा रहा है कि युद्ध होने की स्थिति में पाकिस्तान के पक्ष में चीन खुलकर खड़ा होगा. रही बात रूस की तो अमेरिका से उसका छत्तीस का आंकड़ा कोई नया नहीं है और ऐसे में उरी-हमले के बाद भी पाकिस्तान के साथ उसका संयुक्त सैन्याभ्यास काफी कुछ कहता है. रही बात अमेरिका की तो उसे खुद भी अफ़ग़ानिस्तान में अपनी खातिर पाकिस्तानी भूमि की आवश्यकता बनी रहने वाली है. अब इन परिस्थितियों के बावजूद अगर कोई कहता है कि प्रधानमंत्री मोदी को पाकिस्तान पर हमला कर देना चाहिए, तो उसकी बुद्धि पर तरस ही किया जा सकता है. परमाणु ताकत हासिल करने के बाद यह फासला बेहद कम हो गया है, किन्तु अगर मान लिया जाए कि पाकिस्तान भारत से कमजोर है तो चीन के साथ आने से उसकी ताकत कई गुणा बढ़ी मानी जा सकती है. आने वाले कई दशकों तक भारत को कमजोर ( India, Pakistan and China, Hindi Article, New, War Situation, Strength, Weakness, Uri Attack, United States of America, Russia) करने वाला कोई भी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मौका चीन नहीं छोड़ेगा, क्योंकि भारत के साथ उसका मामला ताकत का है. भाई, अगर उसने भारत को आज नहीं दबाया तो कल भारत उसे दबाने की स्थिति में पहुँच सकता है, इसलिए पाकिस्तान रुपी हथियार को उकसाने में वह शायद ही कोई चूक करे. ऐसी नाजूक परिस्थिति में नरेंद्र मोदी कूटनीतिक तौर पर जो प्रयास कर रहे हैं, वह करते रहें और अपने देश की सैन्य मजबूती पर कुछ ठोस करने का विकल्प भी तलाशें. आखिर, पठानकोट या उरी जैसे सैन्य-अड्डों पर दो-चार आतंकी हमलें कर दें और इसमें आपको सैन्य या तकनीकी कमजोरी नहीं दिखे तो इसे 'आँखों का अंधापन' ही कहा जा सकता है. हालाँकि, मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में भारतीय सेना के पराक्रम पर पूरा विश्वास भी जताया और कहा कि 'हमें अपनी सेना पर भरोसा है और वो अपने पराक्रम से हर ऐसी (उड़ी जैसी) कोशिश को नाकाम कर देगी. पीएम ने आगे भी कहा कि "दोषी सज़ा पाकर ही रहेंगे. सेना बोलती नहीं, पराक्रम करती है." 

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साफ़ है कि परंपरागत सेना को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक़ 'पुनर्गठित' करने की आवश्यकता आन पड़ी है. ऐसे हमलों से बचने की कोशिश ही श्रेयष्कर है और उसके लिए सेना को आधुनिकतम तकनीकों से लैस करने की जरूरत है. पीएम मोदी और रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को इस मामले में अतिरिक्त ध्यान देने की जरूरत है और अगर आवश्यक हो तो सैन्य-बजट में भारी बढ़ोत्तरी भी की जा सकती है. इसी सन्दर्भ में, मोदी ने ठीक ही पाकिस्तानी जनता से संवाद करने की कोशिश भी की है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का केरल का भाषण भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी सेक्टर में हुए चरमपंथी हमले के बाद पहला भाषण था. भारत के प्रधानमंत्री ने बेहद दूरदृष्टि से पाकिस्तानी जनता का ज़िक्र किया और उनसे कहा कि आप अपने हुक्मरानों से सवाल कीजिए कि दोनों देश (भारत-पाकिस्तान) एक साथ ही आज़ाद हुए, किन्तु क्या कारण है कि आज भारत 'सॉफ्टवेयर' एक्सपोर्ट करता है तो पाकिस्तानी हुक्मरान 'आतंकवादी' एक्सपोर्ट कर रहे हैं? पाकिस्तानी जनता से पीएम ने यह भी सवाल किया कि पाकिस्तान बांग्लादेश, बलोचिस्तान, पीओके को तो संभाल नहीं पा रहा है फिर किस मुंह से वह कश्मीर की बात कर रहा है? भारतीय पीएम के केरल-भाषण के वक्त  पाकिस्तान के सोशल मीडिया में #bharatronabundkaro ट्रेंड कर रहा था. पाकिस्तान के लोग कह रहे थे, "भारत रोना बंद करो." यह पीएम के स्पीच की सफलता ही है और आने वाले दिनों में पाकिस्तानी आवाम भी जरूर यह बात महसूस करेगी कि कश्मीर-कश्मीर चिल्लाकर उसके हुक्मरान पाकिस्तान का ही नुक्सान कर रहे हैं.  लड़ाई के मुद्दे पर पीएम ने कहा कि हमारे (भारत और पाकिस्तान) बीच बेरोज़गारी खत्म करने, गरीबी खत्म करने के लिए मुकाबला होना चाहिए और ये देखना चाहिए कि कौन सा देश इन समस्याओं को पहले खत्म करता है. 

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पीएम ने इसी सन्दर्भ में 'हज़ार साल तक लड़ने की चुनौती भी स्वीकारी जिसके दो अर्थ निकलते हैं. एक तो गरीबी से और दूसरा अगर पाकिस्तान नहीं मानता है तो दूसरी ओर से भी भारत पूरी तरह तैयार है. थोड़ा बारीकी से देखा जाये तो पीएम मोदी का उरी अटैक पर दिया गया भाषण शांति के अंतिम प्रयासों में भी शामिल माना जा सकता है. जिस प्रकार दुर्योधन और धृतराष्ट्र के अंधत्व से निराश होकर श्रीकृष्ण ने भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य इत्यादि से हस्तिनापुर की भलाई की ओर सोचने को प्रेरित किया था, ठीक उसी प्रकार पाकिस्तानी जनता से पीएम मोदी की अपील भी है. हालाँकि, जैसे दुर्योधन भीष्म, द्रोण इत्यादि की बात सुनने को तैयार नहीं था, कुछ वैसे ही पाकिस्तानी आर्मी, वहां के आतंकी, हुक्मरान भी पाकिस्तानी जनता ( India, Pakistan and China, Hindi Article, New, War Situation, Strength, Weakness, Uri Attack, United States of America, Russia) की बात शायद ही सुनें! अंत में फिर वही होता है, किन्तु तब तक जरूरी है कि शांति के प्रयास किये जाएँ और प्रधानमंत्री मोदी ऐसे प्रयास कर रहे हैं तो उसे नीतिगत माना जाना चाहिए. आने वाले दशकों में भारत भी बेहद मजबूत स्थिति में हो सकता है, क्योंकि तब अमेरिका के साथ उसके संबंधों में और भी स्पष्टता आएगी. जापान, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान इत्यादि देशों के साथ सैन्य साझेदारी जब मजबूत अवस्था में पहुंचेगी, तब चीन इत्यादि का विरोध भी कुछ खास मायने नहीं रखेगा. तब तक हमें बच-बचाकर निकलने की आवश्यकता है और महाभारत युद्ध से पहले जिस तरह अर्जुन ने तमाम दिव्यास्त्र हासिल किये थे, ठीक उसी तरह हमें भी अपने समीकरण दुरुस्त करने होंगे. इकॉनमी, सैन्य-सम्बन्ध, तकनीकी मजबूती, युद्ध के बाद पुनर्वास नीति इत्यदि... तब तक तथाकथित देशभक्त, अपने घरेलु और आस पास के सामाजिक दायित्वों को निभाने में समय लगाएं, बजाय मोदी को उकसाने में!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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