हथियार दलाली के आरोपों की जांच जरूरी! Weapon mediator, Hathiyar Dalal, Hindi Article, New, Varun Gandhi, Abhishek Varma, Advocate Edmonds Allen, Modi Government, Manohar Parrikar, Navy War leak



नरेंद्र मोदी सरकार का अब तक का समय लगभग घोटाला-मुक्त रहा है और इसीलिए भाजपा नेता वरुण गाँधी के ऊपर 'हनी ट्रैप होकर ब्लैकमेल' होने का जो आरोप लगाया गया है, उससे पार्टी समर्थकों में एक स्वाभाविक सी बेचैनी उभर आयी होगी. बोफोर्स तोप घोटाले के जमाने से ही हथियार खरीद और उसकी दलाली की चर्चाएं चलती रही हैं और ऐसे में हथियार दलाली के काले इतिहास को देखते हुए मन में शंकाएं, कुशंकाएँ उभरना स्वाभाविक ही हैं. बड़ा मुश्किल होता है यह सोचना और समझना कि किसी देश की रक्षा और सुरक्षा से संबंधित नीतियां 'वेपन दलालों' के रास्ते से होकर गुजरती हैं. कई सरकारें आई हैं कई सरकारें आगे भी आएंगी, पर कई बार ऐसा लगता है कि हथियार दलालों का चंगुल जस का तस बरकरार रहेगा. ज्यादा दिन नहीं हुआ, जब पिछले साल हमारे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने ताल ठोक कर कहा था कि हथियारों की खरीद के लिए दलालों या एजेंटों को दिया जाने वाला कमीशन अब गुजरे जमाने की बात होगी. हालाँकि, वर्तमान में उठे विवादों को देखकर ऐसा लगता नहीं है कि हथियार दलालों का मामला इतनी जल्दी और आसानी से निपट जाएगा. हाल-फिलहाल इसमें वरुण गांधी फंसे नज़र आ रहे हैं, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी के युवा चेहरों में से एक माना जाता है, साथ ही साथ नेहरू खानदान से भी वह जुड़े हुए हैं, इसीलिए भी लाइमलाइट में बने रहते हैं. वरुण गाँधी से अलग हटकर अगर आज़ादी की शुरुआत से देखते हैं तो भारत में रक्षा सौदों में घोटाला कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह तो नेहरू सरकार के कार्यकाल में ही आर्मी के लिए जीप खरीदने के समय रक्षा नियमों के उल्लंघन के रूप में सामने आ गया था. इसके बाद छोटे बड़े-कई घोटाले सामने आये, जिसमें बोफोर्स तोप भी शामिल रही तो ताबूत घोटाले तक की बात मीडिया में खूब उछली! इन्हीं घोटालों में बीते दिनों अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद घोटाले का मामला भी खूब चर्चित रहा था. यह बेहद दुर्भाग्य की बात है कि हथियार दलालों ने सरकार और कंपनियों को एक चंगुल में फंसाकर अपने हित में सौदा कराने में सफल हो जाते हैं. आखिर अगस्टा वेस्टलैंड मामले में ही कई नियमों को बदल दिया गया था, ताकि हथियार दलालों को खुश किया जा सके. Weapon mediator, Hathiyar Dalal, Hindi Article, New, Varun Gandhi, Abhishek Varma, Advocate Edmonds Allen, Modi Government, Manohar Parrikar, Navy War leak


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देखा जाए तो यह बड़ा अजीब सा चारों ओर फैल चुका जाल है. इसे दलालों का प्रभाव कह लीजिए या सरकारों की नाकामी कह लीजिए या प्रशासनिक लापरवाही कहिये, बस लब्बोलुआब यही है कि हथियार दलाली की समस्या बढ़ती जा रही है. 2006 में खुलासा सामने आया था कि भारतीय हथियार दलाल विदेशी हथियार कंपनियों को भारतीय नौसेना की जानकारी लीक कर रहे हैं.  उसमें जो दलाल जेल में बंद है, उसी का नाम जोड़कर वरुण गांधी पर आरोप लगाए गए हैं. निश्चित रूप से गंभीर मामला है और उसमें वरुण गांधी पूरी तरह से घिर चुके हैं. यहां तक कि खुद उनकी पार्टी भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा उनका बचाव नहीं किया जा रहा है. निश्चित रूप से कहीं न कहीं, कुछ न कुछ तो छिपा हुआ है. मजबूरन वरुण गांधी को ट्विटर पर अपनी सफाई खुद देनी पड़ी है. ट्विटर पर उन्होंने कई सारे पॉइंट्स लिखे हैं और कहा है कि उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए जिम्मेदार, जानबूझकर ऐसा करने वालों के खिलाफ वह कठोर कानूनी कार्रवाई करेंगे. गौरतलब है कि सुल्तानपुर से सांसद वरुण ने अपने बयान में बिंदुवार आरोपों का खंडन किया है और इस बात पर जोर दिया है कि आरोपों में अंशमात्र भी सच्चाई अथवा साक्ष्य नहीं है. आगे अपनी सफाई में उन्होंने यह भी कहा है कि 2009 से रक्षा स्थाई समिति और रक्षा सलाहकार समिति दोनों के वह सदस्य जरूर थे, किंतु सलाहकार समिति की बैठक में उन्होंने हिस्सा नहीं लिया और स्थाई समिति की कुछ ही बैठक अटेंड की. अपनी सफाई में उन्होंने आगे लिखा है कि गोपनीय जानकारी लेने में वह सक्रिय ही नहीं थे. जाहिर तौर पर इस तरह की सूचनाओं को बाहर भेजने का कोई प्रमाण आरोप लगाने वालों ने नहीं दिया है, किन्तु मामला इतना गंभीर है कि इसे हलके में उड़ाया भी नहीं जा सकता है. गौर करने वाली बात यह भी है स्वराज अभियान के नेताओं प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने व्हिसिल ब्लोअर, न्यूयार्क स्थित वकील एडमंड्स एलेन के पिछले महीने पीएमओ को लिखे एक पत्र को जारी किया था, जिसमें वरुण गाँधी को 'हनी ट्रैप' किए जाने और हथियार दलाल वर्मा के कहे मुताबिक काम करने की बात कही गई थी. Weapon mediator, Hathiyar Dalal, Hindi Article, New, Varun Gandhi, Abhishek Varma, Advocate Edmonds Allen, Modi Government, Manohar Parrikar, Navy War leak



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स्वराज अभियान के नेताओं ने खुलकर यह आरोप लगाया है कि वर्मा ने रक्षा सलाहकार समिति के सदस्य वरुण को हथियारों के संबंध में संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के संबंध में ब्लैकमेल किया है. बताते चलें कि एलन वर्मा के साझीदार थे, लेकिन 2012 में वह हथियार डीलर अभिषेक वर्मा, से अलग हो गए थे. गौरतलब है कि यह वही वर्मा हैं जिनके खिलाफ 2009 नौसेना वार रूम लीक मामले में मुकदमा चल रहा है. हालाँकि,  वरुण ने सफाई देते हुए यह भी कहा है कि लें से उनकी कभी बात नहीं हुई थी. वहीं अभिषेक वर्मा जो हथियार डीलर हैं, उनके बारे में बताते हुए वरुण गांधी ने कहा है कि वर्मा दिवंगत वीणा एवं श्रीकांत वर्मा के पुत्र के तौर पर उनसे परिचित हुए थे और चूँकि दोनों एक प्रतिष्ठित परिवार के संसद सदस्य थे और इस तरह से उनकी मुलाकात हुई. वरुण यह जोड़ना नहीं भूले कि काम को लेकर कभी दोनों में चर्चा नहीं हुई थी. पूरा मामला समझने के लिए हमें प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के आरोपों पर ध्यान देना ही पड़ेगा जो स्कॉर्पियन पनडुब्बियां बेचने से संबंधित है. हालांकि इस मामले में राफेल डील को भी घसीटा जा रहा है, पर जो भी हो अगर बात हथियार दलाली की है तो मामले को सरसरी तौर पर खारिज नहीं किया जा सकता है. वैसे यह भी समझा जा सकता है कि वरुण गांधी की सफाई सही हो सकती है गलत हो सकती है किंतु भारत जब तमाम देशों से रक्षा खरीद को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, अपने पड़ोसियों पाकिस्तान और चीन से मुकाबले के लिए खुद को बेहतर ढंग से तैयार कर रहा है, ऐसे में हथियार डीलरों का काला साया किसी भी हाल में उचित नहीं ठहराया जा सकता. तो इस सन्दर्भ में यह मान लिया जाना कि वरुण गांधी पूरी तरह से साफ हैं, ठीक नहीं होगा. बल्कि इस मामले में जो भी तथ्य सामने आए हैं, जो भी आरोप प्रत्यारोप सामने आए हैं, उन पर सीबीआई की जांच जरूर बिठाई जानी चाहिए, ताकि हथियार डीलरों में और अगर उनसे कोई जुड़ा हुआ नेता किसी समिति का सदस्य है तो उस पर एक दबाव पड़े कि कहीं उनकी पोल न खुल जाए और सरकार इन मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी ही करेगी. भाजपा के सांसद ने भी इस मामले में जांच की मांग की है और हथियार दलाली के काले इतिहास को देखते हुए इस मामले में जल्द से जल्द जांच कराई ही जानी चाहिए. चूंकि मोदी सरकार की इमेज अब तक पाक साफ़ ही रही है और उनका कोई छोटा बड़ा नेता भी हाल फिलहाल दलाली या घोटाले में नहीं फंसा है तो इन सभी तथ्यों को देखते हुए जनता की उम्मीद नयी सरकार से और भी ज्यादा बढ़ जाती है. उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत को रक्षा क्षेत्र में मजबूती दिलाने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही सरकार अपने और अपने सांसदों के दामन पर छोटा दाग भी नहीं लगने देगी, बेशक असल मामला उसके कार्यकाल से पहले का ही क्यों न हो! Weapon mediator, Hathiyar Dalal, Hindi Article, New, Varun Gandhi, Abhishek Varma, Advocate Edmonds Allen, Modi Government, Manohar Parrikar, Navy War leak 
- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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