Sunday, 26 February 2017

I Recommend this Hindi Article, BBC Hindi, Cooking, Fooding

by on 11:38:00



- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.





I Recommend this Hindi Article, BBC Hindi, Cooking, Fooding

मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.

गालियों के सहारे यूपी फतह की कोशिश में हैं राजनेता - UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics

by on 10:25:00


किसी का काम बोलता है, तो किसी को साथ पसंद है. वहीं कोई सबके साथ में विकास की बात करता है तो कोई दलितों के उद्धार की बात करता है. समस्या यह है कि यह 'अच्छी बातें' सिर्फ बैनर - पोस्टरों तक ही सीमित रह गयी हैं, क्योंकि यूपी में चुनाव के अंतिम फेज तक आते आते नेताओं ने नया ट्रेंड पकड़ लिया है और वो है एक दूसरे पर कीचड़ उछालना. न केवल कीचड़ उछालना, बल्कि इतनी घटिया भाषा का प्रयोग करना जिसको सुनकर आश्चर्य होता है कि क्या ये वही नेता हैं जो हमारा प्रतिनिधित्व करेंगें? क्या यही सदन में बैठकर हमारी बेटी बहनों की सुरक्षा का इंतजाम करेंगे? या हमारे बच्चों के भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करने का जिम्मा हम इन्हें ही देने वाले हैं? इन ओछी बातों को ये नेता लोग इतनी सरलता और आत्मविश्वास के साथ करते हैं जैसे जनता निरी मूर्ख हो और उसे ऐसी बातें आसानी से सुनायी जा सकती हैं. ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ यूपी के चुनाव में हो रहा है, बल्कि बिहार चुनाव में भी भाषा की अश्लीलता का भरपूर नज़ारा देखने को मिला था. इसी कड़ी में कुछ दिन पहले की बात है बीजेपी के एक लोकल नेता दयाशंकर सिंह ने एक रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ अपशब्द कहे थे, जिसकी चहुंओर निंदा हुई. पर दूसरे पक्ष का निंदा से काम चल जाए तो फिर बात ही क्या? 'बहनजी' की चापलूसी में बसपा के कुछ नेता इतने गिर गए कि उन्होंने शब्दों की हर एक मर्यादा तोड़ दी! उन्माद ऐसा बढ़ा कि ये नेता इंसाफ भूल दयाशंकर सिंह कि माँ -बेटी एक करने लगे. अब तक लोगों की सांत्वना बटोर रहीं 'बहन जी' अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की वजह से जनता के टारगेट पर आ गयी थीं. ऐसा सिर्फ एक उदाहरण नहीं है बल्कि ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश में गालियों का फ्री स्टाइल मुकाबला हो रहा है, जिसमें हर कोई एक दूसरे को चित्त करने की कोशिश में लगा है. उन्माद, साम्प्रदायिकता भड़काने से लेकर बकवासबाजी की कई ऐसी विधाएं दिखी हैं,  जिनका ज़िक्र साहित्य की पुरानी किताबों में भी शायद ही मिले. UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics
पीएम बनाम यूपी सीएम
UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics, Akhilesh Yadav
हमारे प्रधानमंत्री बातों के कितने धनी हैं ये बताने की जरुरत नहीं है, वाट्सएप्प, फेसबुक और ट्विटर के जोक्स का सारा कलेक्सन है इनके पास. अपने चुटीले अंदाज में जब ये विरोधियों पर कटाक्ष करते हैं, तो इनके समर्थक जिन्हें नया नाम 'अंधभक्त' मिला हुआ है, झूम उठते हैं. अभी हाल ही में यूपी के फतेहपुर में पीएम मोदी ने अखिलेश सरकार में कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल और रमजान में 24 घण्टे बिजली जबकि दिवाली के दिन भी बिजली गायब रहने की बात उठाकर भाजपा का पुराना दांव चल दिया तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तड़प उठे. अपने शासन काल में हुए अपराधों की बढ़ोतरी के आरोपों को झेल रहे जैसे-तैसे सत्ता में दोबारा आने की आस लगाए अखिलेश भी आनन् -फानन में अमिताभ बच्चन से अपील कर बैठे कि वो 'गुजरात के गधों' का प्रचार करना बंद कर दें. अखिलेश का यह तीर 'निशाने' पर लगा और पीएम मोदी अपनी अगली सभा में 'गधा पुराण' पर चर्चा करते नज़र आये. अब जब पीएम और सीएम ही लड़ाई में लगे हों तो फिर सिपाहियों की बात कौन करें! किन्तु, फिर भी कुछ धुरंधरों के बयानों पर गौर किया जाना आवश्यक हैं. UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics

UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics, PM Narendra Modi
बीजेपी यहाँ भी है 'लीडर'
बीजेपी के एक नेता धौलाना विधानसभा सीट से प्रत्याशी रमेश चन्द्र तोमर का जवाब नहीं! अपने चुनावी रैली में उन्होंने धमकाते हुए कहा था कि 'यूपी के धौलाना को मौलाना विधानसभा' नहीं बनने देंगे. ऐसे ही केंद्रीय मंत्री सुरेश बालियान तो मुलायम सिंह यादव के मरने की भविष्यवाणी तक कर बैठे. अपने इस बयान की सफाई में बालियान ने कहा कि सपा के शासन में यूपी ने बुरा राज देखा है. मुलायम ने हमेशा सांप्रदायिकता की राजनीति की है. मैं उनसे कहना चाहुंगा कि अब तो मरने का समय आ गया है. हद है भाई अगर मुलायम सिंह यादव ने साम्प्रदायिकता की राजनीति की है तो जनता इसका जवाब देगी, लेकिन आपको किस ने अधिकार दे दिया सजा सुनाने का, वह भी मरने का? बीजेपी विधायक सुरेश राणा ने तो खुलेआम ऐलान कर दिया कि अगर बीजेपी की सरकार बनी तो कैराना, देवबंद और मुरादाबाद में कर्फ्यू लगा दिया जाएगा. जाहिर है मामले को गरमाने और ध्रुवीकरण की कोशिशों को परवान चढाने की कोशिशें खूब की गयी हैं. 
बीजेपी के राज्यसभा सांसद विनय कटियार का बयान तो आप लोगों  को याद ही होगा, जिसमें उन्होंने प्रियंका गाँधी को टक्कर देने के लिए बीजेपी की सुन्दर महिला कार्यकर्ताओं और अभिनेत्रियों को मैदान में उतारने की बात तक कर डाली. अब इन नेताओं से उम्मीद करना कि ये 'महिला सम्मान' को जारी रखेंगे, बेमानी ही है. 
यही नहीं अपने काम और प्रशासन के लिए जाने -जाने वाले शिवराज चौहान भी यूपी की बदली आबो-हवा से नहीं बच पाए और उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार करते हुए कह डाला कि 'आजम खान ऐसे नेता हैं कि उनका नाम ले लूं तो नहाना पड़ता है'. खैर आज़म खान खुद ऐसे नेता हैं जिन्हें दूसरों के ऊपर कीचड़ उछालने में महारथ हासिल है. अब जब गंगा ही बह रही है तो बीजेपी के फायरब्रांड नेता और गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ की चर्चा न हो ऐसा कैसे हो सकता है? एक चुनावी रैली में योगी आदित्यनाथ ने कह दिया कि यूपी की सरकार ने बहुसंख्यक समाज को जो पीड़ा दी है, इन पीड़ा देने वाले कुत्तों को कभी हम सत्ता में नहीं आने देंगे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को कश्मीर नहीं बनने देंगे. भाई, उत्तर प्रदेश कश्मीर बने न बने, किन्तु 'बदज़बानी का प्रदेश' जरूर बन गया है. UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics



बकवासबाजी में कड़ी टक्कर दे रही है समाजवादी पार्टी 
ऐसा नहीं है कि सिर्फ बीजेपी में ही बदजुबानी की बयार बही है बल्कि सपा नेता भी खूब जम कर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. सपा सरकार में मंत्री राम करन आर्या ने  बीजेपी को बड़ा राक्षस और कांग्रेस को छोटा राक्षस बताते हुए कहा कि छोटे राक्षसों से हाथ इसलिए मिलाया है कि बड़े राक्षस को रोक सकें! अब भैया, राक्षसों से यूपी की जनता पिछले पांच साल त्रस्त रही, हाईवे तक पर खुलेआम बलात्कार हुए, तो कम से कम समाजवादी पार्टी के नेता इस तरह की बातें न करें. वहीं समाजवादी पार्टी के ही वरिष्ठ नेता राजेंद्र चौधरी भी देश की सुरक्षा को लेकर इतने चिंतित नजर आये कि पीएम मोदी और अमित शाह दोनों को 'आतंकवादी' ही बता डाला. माने अदालतें आखिर किस लिए हैं अगर नेता ही 'आतंकवादी' और 'राक्षसों' का फैसला करने लगें?

बसपा क्यों रहे पीछे
अब जब सभी कर रहे हैं तो हम क्यों पीछे रहें की तर्ज़ पर बसपा के शूरमा भी अपनी तलवारे निकाल कर मैदान में कूद पड़े हैं. बिचारा चुनाव आयोग 'बेबसी' से नोटिफिकेशन जारी करता रहता है, किन्तु उसकी सुनता कौन है? बसपा के महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दकी जिन्होंने दयाशंकर सिंह की बेटी डिमांड की थी, बाद में वह पीएम मोदी का लेखा-जोखा सुनाने लगे. उनका कहना है कि कभी मोदी धमकाने का भाषण देते हैं तो कभी सीना पीटने लगते हैं. कभी भाषण देते-देते ताली बजाने लगते हैं. गौरतलब है कि 'ताली बजाने' से उनका आशय कुछ और ही था. 
बीएसपी के ही एक और प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी ने एक रैली में  बीजेपी का डर दिखाते हुए मुसलमानों  से अनुरोध किया है कि बीजेपी को रोको वरना बीजेपी तुमको रोजा नहीं रखने देगी, नमाज पढ़नी भी बंद हो जाएगी. हद हो गयी भाई, इन नेताओं के पास सत्ता में आने का एक मात्र रास्ता यही दिखता है कि भोली-भाली जनता को डरा कर उनका वोट हासिल किया जाये.

UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics, Nasimuddin Siddiqui, Suresh Rana
इस तरह से देखें तो छोटे -बड़े कई सारे नेता जुबानी तीर का इस्तेमाल चुनाव के दरमियाँ कर रहे हैं. एक दूसरे की बखिया उधेड़ दो, जनता भी खुश हम भी खुश! किसी को अपने काम का हिसाब न देने का कितना बढ़िया रास्ता निकाला है हमारे नेताओं ने, जनता का सारा का सारा ध्यान दूसरों की कमियों को देखने में निकल जायेगा और इस तरह नेता फिर से पांच सालों के लिए सुरक्षित हो जायेंगे. वाकई... दांव तो जबरदस्त है, किन्तु उन्हें शायद पता नहीं है कि ये पब्लिक 'सब जानती है'.

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




UP Election 2017, Hindi Article, Slazing in Politics, Akhilesh Yadav, Narendra Modi, Mayawati, bad politics, election commission, ECI, BSP, BJP, SP, Current Affairs, article for hindi magazines, 
मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Tuesday, 21 February 2017

शांति स्वरूप भटनागर को याद करना जरूरी है, क्योंकि... Shanti Swaroop Bhatnagar Biography in Hindi, New

by on 11:29:00


इसरो द्वारा 104 उपग्रहों को एक साथ लांच करके पूरी दुनिया में भारत की ताकत का डंका बजा दिया गया है. इसरो के इस मुकाम को हासिल करने के लिए सैकड़ों वैज्ञानिकों ने प्रयोगशालाओं में न जाने कितने दिन-रात एक किये होंगे. पर क्या आपको पता है, इन सब शोध और विकास की शुरुआत में डॉ शांति स्वरूप भटनागर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. बेहद दिलचस्प है कि रसायन विज्ञान में फेल होने वाले डॉ. भटनागर भारत के प्रयोगशालाओं के जनक माने जाते हैं. 
आप कल्पना कर सकते हैं कि आज के समय में हमारी शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में जा रही है, जहाँ बच्चों की योग्यता का मापन उनके द्वारा पाए गए मार्क्स से ही किया जाता है. ऐसे में शांति स्वरुप भटनागर जैसे साइंटिस्ट्स का ज़िक्र करने से वास्तविक रूप से प्रतिभावान लोगों को आगे बढ़ने में निश्चित रूप से मदद मिलने ही वाली है. 
Shanti Swaroop Bhatnagar Biography in Hindi, New, Pic: thefamouspeople.com
इसलिए भी शांति स्वरूप भटनागर को याद करना जरूरी है. आज के हमारे वैज्ञानिकों की उपलब्धियाँ 'ख़ास' हैं, किन्तु डॉ. भटनागर का योगदान अतुलनीय है. दयाल सिंह ट्रस्ट की छात्रवृति से 1921 में लन्दन विश्वविधालय से विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री पाने वाले डॉ भटनागर सीएसआईआर के पहले मुख्य निदेशक थे. डॉ. भटनागर के योगदान को याद करने के लिए सीएसआईआर द्वारा 1958 से प्रत्येक साल डॉ. शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया जाता है. 

अगर डॉ. भटनागर के जीवन के संघर्षों को याद करें तो, मात्र 8 महीने की उम्र में ही उनके सर से पिता का हाथ उठ गया था. उनके नाना अभियंता थे, जिन्होंने उनके अंदर विज्ञान को लेकर उत्सुकता का बीज बोया. बचपन के छोटे-छोटे प्रयोगों से ही महान वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा मिली और ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि बच्चे की प्रतिभा निखारने का पूरा अवसर मिला इन्हें. जाहिर है, आज के समय में किताबों के बोझ तले दबे 'बचपन' को खेल-खेल में विज्ञान की ओर प्रवृत्त करने की ओर ध्यान देना चाहिए. 
आपको जानकर हैरानी होगी कि महान वैज्ञानिक के तौर पर ख्याति अर्जित करने वाले डॉ. भटनागर पर कभी लेखनी का भूत सवार था. 1911 में इन्होंने उर्दू में एक नाटक लिखा ‘करामाती’, जिसका मंचन 'सरस्वती स्टेज सोसाइटी' में अंग्रजी भाषा में हुआ. इस नाटक को उस वर्ष का 'सर्वश्रेष्ठ नाटक’ का पुरस्कार भी मिला था. 
कहते हैं अगर डॉ. भटनागर वैज्ञानिक नहीं होते तो शायद बहुत बड़े साहित्यकार होते. आगे की इनकी यात्रा भी कुछ कम दिलचस्प न रही. लन्दन से लौटने के बाद बीएचयू में रसायन विज्ञान के  प्रोफेसर के तौर पर 3 साल तक इस वैज्ञानिक ने सेवा प्रदान किया. बताते चलें कि वहाँ भी उनकी कलम नही रुकी और बीएचयू के लिए तब उन्होंने 'कुलगीत' की रचना की थी, जिसे उच्च कोटि की हिंदी कविता का उदाहरण माना जाता है. फिर पंजाब यूनिवर्सिटी में फिजिकल केमेस्ट्री के प्रोफेसर के साथ साथ यूनिवर्सिटी केमिकल लैबोरेट्रीज के डायरेक्टर के पद पर डॉ. भटनागर कार्यरत रहे, जिसे इनकी जिंदगी का बहुत ही अहम समय माना जाता है. वहीं उन्होंने रिसर्च करना शुरू किया था. उस समय उनके रिसर्च अलग-अलग देशी-विदेशी संगठन के औद्योगिक परेशानियों के समाधान पर केंद्रित था. वहाँ डॉ. भटनागर 19 साल अनवरत सेवा देने के बाद पूरी तरह शोध के क्षेत्र में आ गए. 

Shanti Swaroop Bhatnagar Biography in Hindi, New, Pic: photodivision.gov.in
1940 में कोलकाता के अलीपुर में प्रयोगशाला तैयार किया जिसे बोर्ड ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (BSIR) नाम दिया गया. वहाँ 2 साल निदेशक रहने के बाद 1942 में कौंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की नींव रखी. उसके बाद उन्होंने कई प्रयोगशालाओं की स्थापना की. उनकी खोज ने कच्चे तेल की खुदाई की कार्यपद्धति को उन्नत बनाया. फिजिकल कमेस्ट्री, मैग्नेटो केमिस्ट्री और एप्लाइड केमिस्ट्री में उनकी खोज सम्माननीय मानी जाती है. इतना ही नहीं, डॉ. भटनागर भारत सरकार के शिक्षा विभाग के सलाहकार भी रहे थे. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (University Grants Commission) का पहला सभापति भी डॉक्टर भटनागर को नियुक्त किया गया था. 
डॉक्टर भटनागर के सराहनीय योगदान के लिए उन्हें भारत से लेकर ब्रिटेन तक सम्मान मिला, किन्तु सबसे महत्वपूर्ण उनका प्रेरक जीवन रहा. वैसे तो 1943 में यूनाइटेड किंगडम के मशहूर रॉयल सोसायटी के सदस्य चुने जाने से लेकर 1954 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से उन्हें नवाजा गया था, पर युवाओं को प्रेरित करने से लेकर लेखकीय प्रतिभा के लिए उन्हें याद किया जाना बेहद ख़ास है. 
1955 में शान्ति स्वरूप भटनागर के निधन के बाद उनके नाम से पुरस्कार देने की घोषणा की गयी, जो आप ही उनकी खासियत को बयान करता है. कहते हैं ऊँची ईमारत में नींव के पत्थरों को कोई नहीं देखता, किन्तु डॉ. भटनागर जैसी सख़्शियतें नींव में होने के बावजूद अपनी चमक न केवल इस युग में बल्कि आने वाले युग में भी बिखेरती रहेंगी, इस बात में दो राय नहीं...  

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




Shanti Swaroop Bhatnagar Biography in Hindi, New
मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Saturday, 18 February 2017

द्रोणाचार्य और कर्ण के प्रति सहानुभूति क्यों रहनी चाहिए? Terrorism Supporters, Direct, Indirect, Pakistan, Hindi Article

by on 20:54:00


पाकिस्तान-सिंध के सहवान में लाल शहबाज कलंदर सूफी दरगाह पर आईएसआईएस के आत्मघाती हमले के बाद फेसबुक पर मेरे एक मित्र ने कुछ यूं अपने विचार प्रकट किये-
"अभी पाकिस्तान में हुए बम धमाकों पर खुश होने और मरने वालों के लिए जन्नत व हूरों का तंज कसने वालों, धमाके के बाद की स्थिति में आप में और धमाका करवाने वालों में क्या अंतर है? अभी उधर वो भी खुश होंगे, इधर आप भी खुश हैं. अपने मुँह से मानवता का नाम मत लिजिएगा, गाली जैसा लगता है. मेरे लिए दुनिया के किसी भी कोने में मरने वाले बेकसूरों के लिए एक ही समान दर्द है."
Terrorism Supporters, Direct, Indirect, Pakistan, Hindi Article, Pic: wishesh.com
देखा जाए तो उपरोक्त 'पोस्ट' में सीधे तौर पर कुछ गलती भी नज़र नहीं आती, किन्तु बात इससे आगे बढ़कर है. इसी पोस्ट पर हुई चर्चा में किसी ने आगे लिखा कि-
"मैं इस मामले में आप लोगों से अलग राय रखता हूं. अगर आप का बेटा कलेक्टर हो जाएगा तो उसको प्राप्त सुख-सुविधा का आनंद आप और आप का पूरा परिवार लेगा ही, किन्तु अगर वही डाकू बन जायेगा तो उसका खामियाजा भी तो आपको भुगतना चाहिए. इसलिए इंसानियत के नाम पर राजनैतिक भाषा नहीं बोली जानी चाहिए."
इस मसले पर लोगबाग अक्सर कंफ्यूज रहते हैं, किन्तु समझा जाना चाहिए कि क्या वाकई 'अपराध' या 'आतंकवाद' हवा में उत्पन्न हो जाते हैं? 
बहुत पुरानी एक कहानी याद आती है, जिसमें एक हत्यारे डाकू को उसके अपराध की सजा के रूप में 'मृत्युदंड' दिया गया. जब उस डाकू से उसकी अंतिम इच्छा पूछी गयी तब उसने अपनी माँ से मिलने और उसके कान में कोई 'सीक्रेट' बात कहने की इच्छा व्यक्त की. तब जज महोदय ने उसकी माँ को अदालत में बुलवाया और अपनी माँ के कान में कुछ कहने के बहाने उस डकैत ने माँ के कान को ज़ोर से काट लिया!उससे पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया?तब उसका जवाब बड़ा दिलचस्प था कि जब मैं पहली बार स्कूल से पेंसिल चुरा कर लाया था, तब मेरी माँ ने कुछ नहीं कहा था.थोड़ा बड़ा होने पर जब पड़ोसी के घर में चोरी की, तब भी मेरी माँ ने कुछ नहीं कहा...जब मोहल्ले में मेरी चोरी, डकैती के किस्से कुख्यात होने लगे, फिर भी मेरी माँ चुप ही रही.हद तो तब हो गयी, जब मैंने किसी का मर्डर किया और मेरी माँ चुप रही. आज इसी के कारण मैं फांसी पर चढ़ रहा हूँ, इसलिए इसका दोष क्यों नहीं माना जाना चाहिए?
सिर्फ यही कहानी क्यों, इतिहास में कुख्यात औरंगज़ेब के रूप में जाने जाने वाले बादशाह को जब आखिरी समय में महसूस हुआ कि उसने इस्लाम के प्रचार के नाम पर सिर्फ 'मानवता' का ही रक्त बहाया है, तो उसे बेहद ग्लानि हुई थी. कहते हैं, तब अपने 'मौलवी', जिसने औरंगज़ेब को इस्लाम के नाम पर मानवता का गला घोंटने की तालीम दी थी, उसे बादशाह ने खूब धिक्कारा!


महाभारत काल का किस्सा ही देख लीजिये. द्रोणाचार्य या कर्ण के वध पर कई लोग आंसू बहाते हैं कि वह बेहद विद्वान और वीर योद्धा थे. कई सद्कर्म भी करते रहते थे, किन्तु तमाम अच्छाइयों के बावजूद वह थे तो 'अधर्म के ही पक्ष में'? मुझे यह मानने में रत्ती भर भी संकोच नहीं है कि खुद पाकिस्तान की बहुतायत आवाम 'आतंकवाद' की पक्षधर है. कारण चाहे जो हो, किन्तु अगर पाकिस्तान आतंकवाद का गढ़ बना हुआ है तो वहां की आवाम को 'क्लीनचीट' कतई नहीं दी जा सकती है. 'भारत-विरोध' के नाम पर तमाम पाकिस्तानी अपनी सोच में 'आतंक की गंध' लिए फिरते हैं. अन्यथा वह सड़कों पर होती और जनता की इच्छा के विरुद्ध आतंक की क्या मजाल? ऐसे में विचारणीय तथ्य यही है कि वह चाहे द्रोणाचार्य हों, कर्ण हो या फिर पाकिस्तानी आवाम ही क्यों न हो, उसे सहानुभूति क्यों मिलनी चाहिए?
ऐसा ही कुछ हाल कश्मीर के कुछ भटके हुए लोगों का है, जिसका विरोध करने पर भारत के आर्मी प्रमुख के बयान पर राजनीति की जा रही है. आर्मी प्रमुख ने आखिर क्या गलत कहा है कि "मुठभेड़ के दौरान जो लोग सुरक्षाबलों के लिए अवरोध उत्पन्न करेंगे और उनकी मदद करेंगे उन्हें चरमपंथियों का समर्थक माना जाएगा"? जाहिर तौर पर कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों के दौरान बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की ही जानी चाहिए. इसमें 'मानवता' का व्यर्थ प्रलाप आखिर क्यों किया जाना चाहिए?
अभी हाल ही में कश्मीर के बांदीपुरा और कुपवाड़ा जिले में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गये, जबकि मेजर एस दहिया समेत चार जवान भी शहीद हो गये थे. वहीं, सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन के कमांडिंग अफसर चेतन कुमार चीता समेत 10 जवान जख्मी भी हुए हैं. ज़रा गौर कीजिये कि हर बार की तरह इस बार भी भटके कश्मीरी लोगों द्वारा पत्थर फेंक कर आतंकवादियों को भागने में मदद की जा रही थी. 

Terrorism Supporters, Direct, Indirect, Pakistan, Hindi Article, Pic: countercurrents.org
मतलब सेना के जवान अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए जान देते रहे तो ठीक, किन्तु दुश्मनों पर कोई कार्रवाई कर दी तो फिर 'मानवता' खतरे में पड़ जाती है? वैसे, ये कोई नयी बात नहीं है जब कश्मीर में अस्थिरता पैदा कर रहे आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों में अवरोध उत्पन्न किया जा रहा हो. आपको याद होगा पिछले साल जुलाई में हिजबुल के आतंकवादी 'बुरहान वानी' के एनकाउंटर के बाद कैसी भयंकर पत्थरबाजी हुयी थी. एक आतंकवादी की मौत के विरोध में महीनों तक जम्मू -कश्मीर में कर्फ्यू लगा रहा और नतीजा ये हुआ कि वहां की जनता को ही सर्वाधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. स्कूल - कॉलेज बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हुयी, वहीं मरीजों को भी दवाईयों की किल्लत का सामना करना पड़ा. 
अगर इन सभी कड़ियों को हम जोड़ें तो साफ़ समझ जायेंगे कि कश्मीर में 'आतंकवाद' को स्पांसर करने के जिम्मेदार लोगों में कहीं न कहीं पाकिस्तानी आवाम भी है! अब वो क्या कहते हैं कि कुत्ते को काटना सिखाओगे तो वह कभी न कभी आपको ही काटेगा... 
तो फिर अगर पाकिस्तान भर में आतंकवादी हमले हो रहे हैं तो उसे क्यों छटपटाना चाहिए? इसके साथ अगर मानवता की रक्षा हेतु कुछ लोगों को इतनी ही चुलबुली मचती है तो फिर उन्हें पाकिस्तान की जनता को धिक्कारना चाहिए, जो हाफीज़ सईद ज़िंदाबाद के नारे लगाती है और उसकी सभाओं में जाती है. निंदा हर उस 'द्रोणाचार्य' और 'कर्ण' की करनी चाहिए, जिसके बल पर दुर्योधन जैसा दुर्बुद्धि युद्ध की हिम्मत जुटा पाता है, अधर्म करने का बल अर्जित करता है. अन्यथा मानवता का व्यर्थ प्रलाप करने वालों को चुप्पी मारकर बैठ जाना चाहिए.

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




Keywords: Terrorism Supporters, Direct, Indirect, Pakistan, editorial, Public, pakistan and terrorists, Suicide Bombers, Humanity, Politics, Human Rights, Kashmir Issue, Army Chief, Protest, Pakistani Army, हाफिज सईद, पाकिस्तान, आतंकवाद, pak puts restriction on hafeez, Hafiz Saeed, Anti Terrorism Act, Current Affairs Essays in Hindi
मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

I Recommend this Hindi Article, Aaj Tak, Blogger, Inspirational Stories

by on 16:00:00



- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.





I Recommend this Hindi Article, Aaj Tak, Blogger, Inspirational Stories

मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.

I Recommend this Hindi Article from BBC Hindi, Time Management, Being Late

by on 00:02:00



- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.





I Recommend this Hindi Article from BBC Hindi, Time Management, Being Late

मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.

Friday, 17 February 2017

अंतिम पैग - Short story by Mithilesh 'Anbhigya' in Hindi

by on 00:27:00

एक-एक बार और डालो. मित्र-मंडली बैठी हुई थी, फार्म-हाउस पर चने-मुरमुरे के साथ चार पैग हो चुके थे. मैं, दो के बाद ही अब नहीं, और नहीं की रट लगा रहा था, लेकिन मेरी सुन कौन रहा था?
पांचवा पैग भरा जा चुका था... और उसे देखकर मुझे पिछले ऐसे ही एक दिन की याद आ गई, जब 'एक और पैग' के बाद मैंने ज़ोरदार उल्टियाँ की थी और यही सारे हमदर्द दोस्त हँसते रहे थे.

इतना ही नहीं, सुबह मेरी पत्नी के सामने सभी ने मुझे 'बेवड़ा' साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. सबूत के तौर पर उल्टियों से सने हुए कपडे मेरी पत्नी को भेंट स्वरुप दिए गए... तब वह सब तो चले गए, लेकिन पत्नी की आँखों में आंसू छोड़ गए. मेरा बेटा उससे दिन भर पूछता रहा,मम्मी! पापा दिन में भी क्यों सो रहे हैं?मुझे उनके साथ खेलना है... आज तो सन्डे है!

मेरा सर भारी-भारी बना रहा और मैं शाम तक बिस्तर पर पड़ा रहा. शाम को उठा तो पत्नी चाय लेकर आयी. तब मैंने झेंप मिटाते हुए कहा था- वो दोस्तों ने जबरदस्ती कई पैग... ...
मैंने कभी मना किया है आपको, मेरी बात काटते हुए वह बोली.
लेकिन इतना ज्यादा क्यों पी लेते हैं आप, जब बर्दाश्त नहीं होता?
बच्चा बड़ा हो रहा है, क्या असर होगा उस पर?

अचानक मेरी तन्द्रा भंग हुई. फार्म-हाउस पर दोस्तों के ठहाके जारी थे.
मुझे सन्डे को बच्चे के साथ खेलना है, यह सोचकर मैंने भरा हुआ पैग उठाया और बाथरूम की तरफ चल पड़ा. मेरे दोस्त कुछ समझते उससे पहले ही वह शराब वाश-बेसिन में बहा दिया.
तबसे कभी मेरे दोस्तों ने 'अंतिम-पैग' के नाम पर ज़िद्द नहीं की. शायद उन्हें पता चल गया था कि संडे को अपने बच्चे के साथ मैं खेलता हूँ, जो मेरे लिए किसी भी 'अंतिम-पैग' से ज्यादा महत्वपूर्ण है.

- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'.




Short story by Mithilesh 'Anbhigya' in Hindi (Pic: canstockphoto.com)

मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Wednesday, 15 February 2017

सड़क हादसा - Road Accidents, Hindi Poem

by on 13:30:00

सड़क के किनारे
बैठा मैं
देख रहा था बरसात की फुहारें
लोग भाग रहे थे
मानो भीग कर पछता रहे थे
रुकने का नाम नहीं था
शायद, जल्दी कोई काम कहीं था

…एक व्यक्ति तेजी से दौड़ा,
सड़क के उस पार जा रहा था
जल्दबाजी में उसकी जेब से पेन गिरी
गिरी क्या, सड़क पर मरी!
गाड़ियाँ दौड़ती रहीं,
पेन पहियों से दबकर उछलती रही
मैं देखता रहा
बरसात का मजा जाता रहा

कितना निर्दयी था वह पथिक
छोड़ गया बीच राह उसे
कुचल जाने के लिए, दबने के लिए
मरने के लिए
आह निकली उस निर्जीव के लिए
सोचता रहा, बस सोचता रहा…
सड़क हादसों में जाने वाले के लिए.

- मिथिलेश ‘अनभिज्ञ’.




Road Accidents, Hindi Poem, Dangerous, Feeling, Kavita, Hindi Literature
मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Tuesday, 14 February 2017

कहीं जिंदगी भर का दर्द न दे वेलेंटाइन... Women safety, Hindi Article, Valentine Day

by on 14:45:00

यूं प्यार के इजहार का कोई दिन नहीं होता है और प्यार करने वाले तो रोज ही प्यार करते हैं, इकरार और इजहार भी करते हैं. लेकिन, इसके लिए कोई खास दिन सुनिश्चित भी किया गया है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. जैसा कि हमारे देश में भी तमाम ऐसे त्यौहार मनाये जाते हैं, किसी खास दिन को लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं है कि साल भर हम इन रिश्तों को नहीं मानते? ठीक वैसे ही अगर वैलेंटाइन डे को हम इस नजरिये से देखें तो इसे मनाने में कोई हर्ज़ नहीं है, मगर अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता है! 
आज कल की युवा पीढ़ी "वेलेंटाइन डे" को 'एकदिनी जश्न' के रूप में देखने लगी है, जिसमें कोई पार्टनर तलाशो, मौज-मस्ती और पार्टी, "वगैरह-वगैरह"... करो! और इसी सोच का परिणाम होता है कि कुछ लोगों की ज़िन्दगी में हमेशा के लिए अँधेरा छा जाता है. 
दुर्भाग्यपूर्ण मामलों में ज्यादातर लड़कियां शिकार बन जाती हैं. ऐसे में कुछ सावधानियाँ बरतना आवश्यक है, ताकि 'प्रेम' का उत्साह बना रहे न कि वैलेंटाइन आपके जीवन में 'कड़वाहट' घोल जाए!

Women safety, Hindi Article, Valentine Day, Pic: whatsuplife.in
सावधान रहें 'फ़रवरी' वाले प्रेमी से 
इस कड़ी में हम सबसे पहले उन प्रेमियों की बात करेंगे, जो अचानक से फरवरी के महीने में पैदा हो जाते हैं. साल भर ये क्या करते हैं, नहीं पता मगर फरवरी आते-आते इनकी एक्टिवनेस चरम पर होती है. येन, केन, प्रकारेण इन का एक ही उद्देश्य होता है कि कैसे भी एक लड़की सेट हो जाये. अब जिनकी मानसिकता ही "सेट" करने वाली हो उनके बारे में और क्या कहा जाये? इसलिए ऐसे मजनुओं से सतर्कता बेहद जरुरी है. ऐसे लोगों का एक ही मकसद होता है और वह होता है 'लड़कियों को इस्तेमाल' करना! तो ऐसे 'लड़कों' को कतई मौका न दें जो, सिर्फ 'वैलेंटाइन डे' वाला मौका ढूंढ रहे हों. 

अनजान जगह और 'एकांत से बचें'
अब जब आपने अपना वेलेंटाइन चुन ही लिया है तो जाहिर सी बात इसको सेलिब्रेट भी करेंगे. लेकिन क्या आपको पता है कि आपका पार्टनर आपको कहाँ ले जा रहा है? अगर नहीं, तो सबसे पहले अपने पार्टनर से इस बात की चर्चा करें कि हम कहाँ जाने वाले हैं और वो जगह आपके लिए अगर अनजान हो तो अपने पार्टनर को मनाएं और किसी ऐसी जगह जाने के लिये कहें, जिसके बारे में आप पहले से जानती हों और वहां आपको सुरक्षित महसूस हो! अगर आपका पार्टनर मान गया तो ठीक है नहीं तो फिर आपके साथ धोखा होने के चांसेस बढ़ जाते हैं.

अपने रिलेशन की 'जानकारी दें घर में'
अगर आप पहले से ही रिलेशनशिप में हैं और ये बात घर वालों को बताये बगैर पार्टी की तैयारी कर रही हैं, तो ये काफी रिस्की है. आखिर, क्यों कुछ महीने की रिलेशनशिप में ही आपको लगने लगता है कि ये आदमी कुछ गलत नहीं करेगा? उधर लड़के को भी लगने लगता है कि थोड़े दिनों के साथ से ही उसे वो सारे अधिकार मिल गए हैं, जिससे वह कुछ भी कर सकता है. इसलिए अपने पार्टनर की जानकारी घर वालों को दें और संभव हो तो उसे घर वालों से मिलाएं भी. इससे क्या होता है कि लड़के के दिमाग में ये मैसेज जाता है कि 'रिश्ते' के बारे में सबको पता है, इसलिए कुछ भी अनावश्यक करने से पहले वो 10 बार सोचेगा जरूर!  

'भड़कीले कपड़े' पहनने से बचें
अक्सर ऐसा होता है कि लड़कियां अत्यधिक मॉडर्न दिखने और अपने बॉयफ्रेंड को इम्प्रेस करने के चक्कर में ऐसे तड़कीले-भड़कीले कपड़े पहन लेती हैं, जिसमें वो खुद ही असहज या अनकंफ़र्टेबल महसूस करती हैं. फिर जाने-अनजाने आप अपने पार्टनर को ऐसा मैसेज दे देती हैं कि कपड़ों की तरह आपकी सोच भी इतनी ही मॉडर्न है और आपको बुरा नहीं लगेगा, अगर कोई आपके साथ लिमिट क्रास करे तो. अब इसका मतलब ये भी नहीं है कि आप "बहन जी" टाइप बनें, लेकिन सुन्दर और आकर्षक लगने के और भी तरीके हैं, जिसे आप ट्राय कर सकती हैं. 

Women safety, Hindi Article, Valentine Day, Pic: pinimg.com
'मर्यादा' का रखें ख्याल
जब आप अपने पार्टनर के साथ पार्टी में हों, तो शुरू से ही अपने आपको संयमित और मर्यादित रखें. ऐसा ना हो कि पार्टी की खुमारी में आप भूल जाएँ कि आप अनजान लोगों के बीच में हैं और आपकी ये अदा देख आसानी से लोग आपके साथ कम्फर्टेबल होने की सोचने लगें. अक्सर ऐसा होता है कि लड़के ये मान लेते हैं कि इस लड़की  को पटाना आसान है और इसकी कोशिश जब नाकाम होती है तो फिर किसी अनहोनी घटना होने के चांसेस बढ़ जाते हैं. कई बार तो ग्रुप में लड़के 'गलत हरकत' करने लगते हैं, अतः 'सावधानी ही बचाव' है.

पब्लिक प्लेसेस पर 'इंटिमेट' होने से बचें
चाहे कोई कितना भी करीबी हो, किन्तु पब्लिक प्लेस पर 'इंटिमेट' होने से बचें. आज कल सोशल मीडिया पर तमाम ऐसी 'वीडियोज' हैं, जिसमें पब्लिक प्लेसेस पर इंटिमेट होते जोड़ों के अंतरंग पल सर्कुलेट होते रहते हैं. कई बार खुद 'बॉयफ्रेंड' द्वारा धोखा देकर रिकॉर्डिंग कर ली जाती है तो कई बार कोई तीसरा छिपकर विडियो बना लेता है और फिर सोशल मीडिया के ज़माने में वह विडियो 'वायरल' होते देर नहीं लगती है और बहुत मुमकिन है कि 'वायरल कंटेंट' आपके परिवार या रिश्तेदारों के व्हाट्सएप्प पर पहुँच जाए. कई बार तो खुद वह विडियो घूम फिरकर आपके पास ही आ सकती है. अतः नए ज़माने के नए खतरों को अवश्य समझें... 

'सेफ्टी किट' का इस्तेमाल
वैसे तो सेफ्टी किट हर उस लड़की के लिए जरुरी  है जो घर से बाहर अकेली निकलती है, लेकिन वैलेंटाइन की रात को अपने साथ जरूर रखें. सेफ्टी किट में शामिल होना चाहिए लाल मिर्च पाउडर, आलू छिलने वाली मजबूत छिलनी, नेल कटर और जो भी आपको जरूरी लगे. जब आपको लगे कि सिचुएशन कंट्रोल से बाहर हो रही है तो आप इन चीजों के इस्तेमाल से अपनी सुरक्षा कर सकती हैं. वीमेन हेल्प नंबर के साथ ही अपनी किसी सहयोगी की नंबर भी आप डायलिंग पर रखें, जिससे मुश्किल समय में आप आसानी से कॉल कर सकें. कोई नंबर याद न आये तो फिर 100 नंबर पर कॉल करें. 

अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाये तो वैलेंटाइन की आड़ में आने वाले खतरों से आसानी से बचा जा सकता है. और सिर्फ वैलेंटाइन ही क्यों समाज में बढ़ रहे आपराधिक कल्चर से बचने के लिए हमेशा यह सावधानियां अपनानी चाहिए.

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




Women safety, Hindi Article, Valentine Day, Pic: featureshoot.com
Keywords: Women safety, Hindi Article, Valentine Day, editorial, Safety Tips, Indian Culture, Clothing, Relation, Intimate, Celebration, cheating, Emergency Numbers, Helpline
मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Sunday, 12 February 2017

ट्रेन का टाइम ... Train Timing, Social Poem by Mithilesh

by on 08:30:00

बेटा, आज तो रुक जा
अभी तो आया है, अब जा रहा है
माँ बोलीं
पिछली बार भी तू न रुका था
तब मेरा मन खूब दुखा था

उन्हें लगा, बुरा न लग जाए
बोलीं-
तुझे भी कितना काम है,
एक पल ना आराम है
और फिर बहु भी शहर में अकेली है
पोता बदमाश, पोती अलबेली है

अरे सुन-
उसको भी तो गाँव ले आ
उसकी जड़ों से उसको मिला
उसके दादा उसकी फ़ोटो सहलाते हैं
मिलने को उससे रोज तड़प जाते हैं

कहते हैं-
छोटी बहु भी घर नहीं आयी
मायके से वापसी की टिकट कटवाई
देख न पाया छोटे पोते को
कहते हुए, आँखें डबडबाई

थोड़े अमरुद ले जा,
निम्बू के आचार बहू बना देगी
ये सरसों का शुद्ध तेल है,
पोते की मालिश वह करेगी

सूरज ढल रहा था
मैं माँ को सुन रहा था,
जी किया सुनता जाऊं
लेकिन-
ट्रेन का टाइम हो रहा था।
ट्रेन का टाइम हो रहा था।

- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'.



Train Timing, Social Poem by Mithilesh, Pic: saraberman.blogspot.in

मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... (More than 1000 Hindi Articles !!)

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

Search This Blog ...

Archive 'संकलन'

Translate

Articles in Print Media

Newsletter

Featured post

News Portal Development, Design, Promotion - न्यूज पोर्टल डिजाईन, डेवलपमेंट, प्रमोशन!

News Portal Development, Design, Promotion We all aware about News Portals. News Portal is an online correspondence medium...

Search Your Keyword Here...

Web Maintenance by-