खुल गया 'जीएसटी' का पिटारा, मगर ... GST Bill, Hindi Article, New, Indian Economy, Goods, Services, Impact on common man, inflation, cheap, Finance Minister, Arun Jaitley, Opposition



जीएसटी यानी 'गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स' के बारे में लंबे समय तक चर्चा चली और वर्तमान सरकार ने इस बिल को विपक्ष के काफी विरोध के बावजूद पिछले दिनों पास करा लिया था. हालाँकि, 2 साल तक कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने जीएसटी पास ना होने देने की जैसे कसम खा रखी थी, पर जनता के दबाव में यह बिल आखिरकार पास हो गया था, और अब केंद्र सरकार ने जीएसटी की दरों का ऐलान भी कर दिया है. वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इसमें 4 स्लैब की घोषणा की है. अगर इसे उपभोक्ताओं की दृष्टि से देखें, तो आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाले सामानों पर सबसे कम यानी 5 फीसदी टैक्स लगाने की बात कही गई है. इसमें भी आम आदमी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले खाद्यान्न में समेत सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) बास्केट की 50 फीसदी चीजों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, मतलब इन सामानों को टैक्स फ्री कर दिया गया है. इसके बाद दूसरा स्लैब है 12, तीसरा 18 और चौथा जीएसटी स्लैब है 28 फीसदी का. चौथे स्लैब के साथ सेस, यानी उपकर लगाने की बात भी कही गई है. जैसे यह उपकार स्वच्छ उर्जा उपकर हो सकता है, जिससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सकता है. थोड़ा और  इस मामले को खोलें तो कह सकते हैं कि ज्वेलरी, रत्न, कपड़े, प्रोसेस्ड फूड, ब्रांडेड मसलों इत्यादि पर पांच पर्सेंट टैक्स मुमकिन है, तो रोजमर्रा की अन्य चीजें, दूसरे फूड आइटम्स आईटी प्रोडक्ट्स पर 12 परसेंट का टैक्स लग सकता है. 18 पर्सेंट टैक्स में सभी सर्विसेस के साथ टीवी, स्कूटर, कार, एसी आदि शामिल किए जा सकते हैं, तो 28 परसेंट में लग्जरी आइटम्स, महंगी घड़ियां, बड़ी कार, सॉफ्टड्रिंक्स, तंबाकू इत्यादि उत्पाद शामिल होंगे. सपाट ढंग से देखे जाने पर यह संतुलित ही लगता है. अब तक जीएसटी लागू होने को लेकर लोगों के मन में तमाम संशय था, जो अब छंट गया है. जाहिर तौर पर सरकार ने सही तरीके से तमाम सामानों पर टैक्स के मामले में संतुलन साधने की कोशिश की है. GST Bill, Hindi Article, New, Indian Economy, Goods, Services, Impact on common man, inflation, cheap, Finance Minister, Arun Jaitley, Opposition


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अनाज और इसी जैसे जरूरी प्रोडक्ट के सस्ते होने की तारीफ़ होनी चाहिए, वहीं लग्जरी कारें, पान-मसाला, गुटका, सिगरेट, तंबाकू और कोल्ड ड्रिंक्स के महंगे होने से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. इस सम्बन्ध में, अब तक जो विश्लेषण किया जा रहा है, उसके अनुसार जीएसटी लागू होने से कॉमन मैन को ज्यादा फायदा होने की बात सामने आयी है. इससे बड़ा फायदा यह भी होगा कि अगर कोई व्यक्ति, कोई भी सामान पूरे देश में कहीं भी खरीदे, तो कीमतें वही रहेंगी! अब तक ऐसा होता था कि किसी राज्य में कोई सामान सस्ता मिलता था तो वही सामान दूसरे राज्य में महंगा मिलता था. इससे बेवजह असंतुलन होता था, तो कई बार लोग दूसरी जगह से सामान खरीद कर किसी अन्य जगह पर ले जाते थे. जाहिर तौर पर यह बेवजह का ट्रांसपोर्टेशन भी कहीं ना कहीं व्यवस्था के ऊपर बहुत बड़ा था, जिस से जीएसटी लागू होने के बाद मुक्ति मिल सकती है. इसका उदाहरण दें तो, अगर कोई कार आप दिल्ली में खरीदते थे और वही कार उत्तर प्रदेश में खरीदते थे तब दोनों की कीमतें अलग होती थी. ऐसे में, जाहिर तौर पर जहां सस्ता पड़ता था लोग वहीं से कार खरीदते थे, वहीं रजिस्ट्रेशन कराते थे और इस तरह से जिस राज्य का वह व्यक्ति है, वहां के प्रशासन को टैक्स का नुकसान होता था. साफ़ है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त होगी. इन प्रयासों के लिए जीएसटी काउंसिल निश्चित रूप से बधाई की पात्र है कि वह तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए एक ठोस परिणाम पर इस बिल को ले आई. हालांकि कुछ मामलों को लेकर अभी भी आशंकाएं शेष हैं, पर धीरे-धीरे वह भी सही दिशा में बढ़ जाएंगी, ऐसी उम्मीद जगती है. इस संदर्भ में आगे देखते हैं तो केंद्र सरकार को संबंधित विधेयक का मसौदा तैयार करने के बाद अभी उन पर संसद की स्वीकृति लेनी है. चर्चा में, जीएसटी के उपकर के मामले में भी कई सवाल उठेंगे और अगर सरकार दलगत राजनीति के तमाम पहलुओं को सुलझा लेती है, तो निश्चित रुप से यह बिल आने वाले समय में एक बड़े परिवर्तन का आधार बनेगा. कहा तो यह भी जा रहा है कि आर्थिक उदारीकरण के बाद यह सबसे बड़ा आर्थिक सुधार है. GST Bill, Hindi Article, New, Indian Economy, Goods, Services, Impact on common man, inflation, cheap, Finance Minister, Arun Jaitley, Opposition



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बल्कि कई लोग तो इसे आजादी के बाद से सबसे बड़े आर्थिक सुधार के रूप में भी देख रहे हैं. पर यह आने वाला समय ही बता पाएगा कि इस मामले में हम कितना आगे बढ़े हैं और कितना पीछे हटने की गुंजाइश है. उम्मीद की जानी चाहिए कि सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष इस मामले में जिम्मेदारियां निर्वहन करेगा और परिणाम स्वरूप पूरे देश के लिए फायदेमंद जीएसटी तेजी से आर्थिक गति को आगे बढ़ाएगा! जीएसटी से कहीं न कहीं राष्ट्रीय एकता की भावना भी मजबूत रूप में सामने आएगी, इस बात में दो राय नहीं. हालांकि सर्विस टैक्स जो अभी 15 फ़ीसदी था जीएसटी के बाद यह बढ़कर 18 फीसदी तक हो सकता है और यहीं सर्विस इंडस्ट्री को थोड़ा झटका लग सकता है. हालाँकि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पांच पर्सेंट टैक्स लगने की बात ही कही जा रही है और उचित भी यही होगा, क्योंकि अगर इन सेवाओं पर भी 18 फीसदी का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया गया तो कहीं ना कहीं इससे आम आदमी ही प्रभावित होगा. जहां तक उपकार की बात आ रही है, तो पहले साल राज्यों का नुकसान पूरा करने के लिए 50 हज़ार करोड रुपए की आवश्यकता पड़ सकती है और इसके लिए एक अलग फण्ड बनाने की बात कही गयी है, तो अगले 5 साल तक राज्यों के नुकसान की भरपाई उपकर से मिलनेवाली राशि ही करेगी. हालांकि जीएसटी में 4 स्लेब बनने से भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका भी है, क्योंकि तमाम इंडस्ट्री के लोग अपने प्रोडक्ट्स को कम टैक्स के स्लैब में शामिल कराने के लिए लॉबिंग कर सकते हैं. पर सरकार के स्तर पर यह इतना आसान भी नहीं होगा. इसके अतिरिक्त, दुनिया भर में जहां भी जीएसटी लगा है, वहां दो स्लैब ही हैं और इस आधार पर कई लोग 4 स्लैब की आलोचना करने में लगे हैं. जाहिर तौर पर सरकार के सामने कई चुनौतियां शेष हैं और देखना दिलचस्प होगा कि इन चुनौतियों से वर्तमान केंद्र सरकार किस प्रकार निपटती है, जिस की वजह से आम जनमानस का जीवन तो आसान हो ही, साथ ही साथ भविष्य की खातिर देश भी आर्थिक प्रगति की राह पर तेजी और मजबूती से आगे बढ़े.

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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