दादी तुम रहती क्यों दूर ... Bal Kavita by Mithilesh, Children Poem, Bal Sahitya in Hindi


दादी - दादी मुझे पढ़ाओ,
ढेरों फिर तुम बात बताओ
खेलो दिन व रात मेरे संग
करूँगा तुमको खूब मैं तंग

मम्मी सुबह जगाती हैं,
फिर मुझको नहलाती हैं,
रोता हूँ मैं जी भर लेकिन
दया उन्हें नहीं आती है

छोटा हूँ मैं घर में सबसे
बड़ी - बड़ी किताबें हैं
करना चाहूँ बात मैं सबसे
ढेरों पास में बातें हैं

मम्मी, काकी करतीं काम,
खाना वही बनाती हैं
कंप्यूटर पर करतीं खिट-पिट
टीवी दिखा, सुलाती हैं

काका, पापा के आने पर
पास में उनके जाता हूँ
कहते हैं वह थके बहुत हैं
मन मसोस रह जाता हूँ

दादी तुम रहती क्यों दूर
समझ नहीं यह पाता हूँ
गर्मी की छुट्टी में ही क्यों
गाँव यहाँ पर आता हूँ

वहां थे आयुष और अनुकल्प
शहर में नहीं कोई विकल्प
साथ रखो या साथ तुम चलो
दादी मानो यह संकल्प

- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'.




Bal Kavita by Mithilesh, Children Poem, Bal Sahitya in Hindi

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