बाल कविता: नीली पेंसिल, पीली पेंसिल

हमारा YouTube चैनल सब्सक्राइब करें और करेंट अफेयर्स, हिस्ट्री, कल्चर, मिथॉलजी की नयी वीडियोज देखें.

नीली पेंसिल, पीली पेंसिल
इनसे मिलती सबको मंज़िल
कोरा कागज़ काला करतीं
ना हैं रूकती, न कभी थकतीं।।

ग़लती करने पर ना चिढ़तीं
उसे मिटाकर सही है करतीं।
माँ जैसा दिल बड़ा है इनका
ख़ुद है घिसतीं, कुछ ना कहतीं।।

बड़े जो होंगे हम सब इतने
पेंसिल सा बन जाएंगे।
जिन्हें नहीं आता है सब कुछ
लिखना उन्हें सिखाएंगे।।

लिखना उन्हें सिखाएंगे
कभी नहीं घबराएंगे
घिस जाएंगे गर्दन तक पर
चलते चले हम जाएंगे।।

- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'








मिथिलेश  के अन्य लेखों को यहाँ 'सर्च' करें... Use Any Keyword for More than 1000 Hindi Articles !!)
Web Title: Children Poem on Pencil in Hindi, Quality of Pencil in Hindi

Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.
इस लेख से जुड़े सर्वाधिकार इस वेबसाइट के संचालक मिथिलेश के पास सुरक्षित हैं. इस लेख के किसी भी हिस्से को लिखित पूर्वानुमति के बिना प्रकाशित नहीं किया जा सकता. इस लेख या उसके किसी हिस्से को उद्धृत किए जाने पर लेख का लिंक और वेबसाइट का पूरा सन्दर्भ (www.mithilesh2020.com) अवश्य दिया जाए, अन्यथा कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

No comments

Powered by Blogger.