सैटेलाइट चैनल चलाने की शुरूआती जानकारी

मीडिया का बिजनेस बड़ा लुभावना है!

कई लोग इसके माध्यम से अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं. चूंकि इसका प्रभाव हर क्षेत्र में बड़े स्तर पर होता है, तो प्रभाव का फायदा तमाम व्यक्तियों द्वारा उठाने का प्रयत्न भी स्वभाविक ही है.

आज के दौर में मीडिया में कई तरह के ऑप्शंस उपलब्ध हैं, जैसे प्रिंट-मीडिया में अखबार और पत्र-पत्रिकाएं हैं तो डिजिटल मीडिया का ऑप्शन आजकल बहुत पॉपुलर हो रहा है, जिसमें वेबसाइट - न्यूज़ पोर्टल से लेकर यूट्यूब चैनल और दूसरे सोशल मीडिया माध्यमों पर उपस्थिति दर्ज करना है. इसके अलावा डेडीकेटेड स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध है, जिसमें नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम,  ज़ी 5, MX प्लेयर, हॉटस्टार जैसे कई बड़े खिलाड़ी मैदान में हैं.

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Basics of Satellite Channel Registration, Hindi Article (Image: abc)

निश्चित रूप से इन सभी ऑप्शन की लोकप्रियता बड़ी तेजी से आगे बढ़ रही है, किंतु कोर-मीडिया की अगर बात कही जाए, तो निश्चित रूप से टेलीविजन लाइसेंस की बात ही अलग है.
बोले तो सेटेलाइट चैनल का अपना अलग अंदाज़ है. बेशक तमाम मीडिया ऑप्शन मैदान में आ जाएँ, लेकिन अभी भी आज तक, एनडीटीवी, एबीपी न्यूज़, ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी, रिपब्लिक भारत जैसे सेटेलाइट न्यूज़ चैनल ही लोगों में मीडिया के रूप में प्रचलित हैं.

यह सारे तो न्यूज़ चैनल हैं, लेकिन सेटेलाइट टेलीविजन चैनल के एंटरटेनमेंट सेक्शन में स्टार ग्रुप के चैनल्स, सोनी ग्रुप के चैनल्स, ज़ी टीवी ग्रुप के चैनल्स इत्यादि काफी लोकप्रिय हैं. अभी भी यह दर्शकों के बड़े वर्ग को अपनी ओर खींचने में सक्षम हैं.
इसी प्रकार स्पोर्ट्स, धर्म, लोकल चैनल्स का कांसेप्ट पॉपुलर है.

कई धनाढ्य लोग अलग-अलग माध्यमों से मीडिया के क्षेत्र में एक्टिव हैं.

कोई अखबार चलाता है, तो कोई पत्रिका चलाता है, कोई अपना वेब पोर्टल चलाता है, तो कोई यूट्यूब चैनल चला कर ही खुश है. वहीं कोई फेसबुक पेज के माध्यम से मीडिया में एंटर किए हुए हैं, लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं सेटेलाइट पर जाने की भी एक कसक जरूर रहती है.
यह लेख इसी संबंध में है. आइए देखते हैं सेटेलाइट चैनल रजिस्टर करने से लेकर उससे सम्बंधित दूसरे पहलु क्या हैं और इसके लिए आपको किन रास्तों से गुजरना होता है:


बड़ी इन्वेस्टमेंट का गेम

यह लेख शुरू करने से पहले ही अगर मैं यह बात क्लियर कर दूं कि सेटेलाइट न्यूज़ चैनल का लाइसेंस लेना और उसे ऑपरेट करना कोई हंसी खेल नहीं है, तो यह गलत नहीं होगा.
निश्चित रूप से यह बड़ी इन्वेस्टमेंट का बड़ा गेम है!

बड़ी इन्वेस्टमेंट से मतलब अगर आप लाखों में इसका अंदाजा लगा रहे हैं तो आप गलत हैं!
वस्तुतः इसके ऑपरेशंस के लिए कई करोड़ रुपए आपकी जेब में होने चाहिए. जिस कंपनी के नाम से आप लाइसेंस लेते हैं, उसकी एक हेवी टर्नओवर होनी चाहिए (तकरीबन 20 करोड़). इसके बावजूद कि आप कई करोड़ रुपए इन्वेस्ट करें और इसका लाइसेंस लेकर इसे ऑपरेट करें, तो भी इसमें तुरंत कमाई होने की उम्मीद करना अतिशयोक्ति ही है. किसी भी हाल में आपको 12 महीने से 24 महीने तक मार्केट में सरवाइव करना होता है. साथ ही अपनी मार्केटिंग करनी होती है, अपनी ब्रांडिंग करनी होती है, दर्शकों के दिमाग पर छाप छोड़ना होता है या जिस पार्टिकुलर सेगमेंट में आप कार्य करना चाहते हैं उस सेगमेंट में जड़ पकड़नी होती है.
तभी आप इसमें कुछ कर सकते हैं, इसीलिए सैटेलाईट के बारे में सोचते समय अपनी जेब मोटी रखें.


एजेंडा क्लियर रखें

अगर आप सेटेलाइट न्यूज़ चैनल चलाना चाहते हैं और आपके पास करोड़ों रूपया भी है. साथ ही आप करोड़ों इस पर खर्च करना भी चाहते हैं, इसके बावजूद जो सबसे महत्वपूर्ण चीज है, वह यह है कि आपको अपना एजेंडा बड़ा साफ रखना होगा. एजेंडा बोले तो आप सेटेलाइट चैनल क्यों चलाना चाहते हैं, यह आपके दिमाग में बेहद क्लियर रहना चाहिए!

क्या यह शौकिया है?क्या आप दूसरे किसी क्षेत्र में पहले से बिजनेस कर रहे हैं और आपको प्रभाव जमाने के लिए, अपने बिजनेस को सेफ गार्ड करने के लिए मीडिया की आवश्यकता है?क्या आपका कोई राजनीतिक एजेंडा है या फिर आप शुद्ध रूप से मीडिया में बिजनेस करने के लिए मैदान में आना चाहते हैं?

एजेंडा जितना क्लियर रखेंगे आप न्यूज़ चैनल या इंटरटेनमेंट सेटेलाइट पर कार्य करने में आपको उतनी ही सहूलियत रहेगी.
अगर आप का एजेंडा क्लियर नहीं है, तो उस हिसाब से एंप्लाइज या एडिटोरियल, क्रिएटिव स्टाफ की हायरिंग नहीं कर पाएंगे और अंततः मीडिया का मतलब प्रभाव बनाना ही तो होता है और जब प्रबंधन और एडिटोरियल स्टाफ की सोच में कॉन्बिनेशन नहीं होता है तो चाहे-अनचाहे टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है और वह चीजें उभर कर सामने नहीं आती हैं जो आपने कल्पना की हुई है. इसीलिए बेहद आवश्यक है कि आप अपना थॉट प्रोसेस पानी की तरह साफ रखें


धीरे धीरे, मगर मजबूती से!

आप सेटेलाइट पर जाना चाहते हैं, तो आपको अपनी गति पर ख़ास ध्यान देना होगा.
सामान्य तौर पर आप सब कुछ एक ही बार में कवर करना चाहते हैं.

इस लेख के पहले उपशीर्षक में बताया गया है कि आपको बड़ा इन्वेस्टमेंट करना होता है, तो आप यह मान के ना चलें कि यह बड़ा इन्वेस्टमेंट आपको सब कुछ एक बार में ही करने की इजाजत दे देगा!
वस्तुतः सेटेलाइट के लिए 10 करोड़ तक का अमाउंट छोटा अमाउंट ही कहा जाएगा और अगर आप इतनी पूंजी इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो उसका सटीक प्रयोग करने के प्रति आपको सचेत रहना होगा!

आपको सधी हुई चाल से धीरे धीरे चलना होता है!
कहने का तात्पर्य यह है कि आप किस ऑडियंस को चूज करना चाहते हैं, किसे ट्रैक करना चाहते हैं, किसका इंप्रेशन हासिल करना चाहते हैं, यह आपको क्लियर करके चलना होगा.

बिजनेस, पॉलिटिक्स, धर्म, मनोरंजन या फिर कोई दूसरा क्षेत्र जिसमें आप अपनी जड़ जमाना चाहते हैं, इसमें भी उन ऑडियंस की कैटेगरी आपको छांटनी होती है, जिनके ऊपर आपका रेवेन्यू मॉडल है. ऐसे में आप सब कुछ एक बार में ही ना करें, खासकर शुरुआत में!

शुरुआत में आप छोटे-छोटे माइलस्टोन को पूरा करें. पहले एक क्षेत्र में आप अपनी पहचान बनाएं  और उसी के सहारे आगे बढें.

हां! अगर आप बहुत ही बड़े खिलाड़ी हैं (100 करोड़ या उससे अधिक) और एक ही बार बड़े स्तर पर कई क्षेत्रों में सेटेलाइट चैनल लांच करना चाहते हैं तो यह आपकी एक दूसरी बिजनेस स्ट्रेटेजी हो सकती है, लेकिन अगर कुछ करोड़ रुपए ही आपके पॉकेट में हैं तो आपको धीरे-धीरे, मगर मजबूती से चलने की कोशिश करना चाहिए.
सलाह के रूप में आप यह समझ सकते हैं एक ही बार में नेशनल चैनल या कई सारे रीजनल चैनल्स की बजाय, एक रीजनल चैनल पर ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. या फिर आप कोई एक कैटेगरी यानी बिजनेस, पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट में कार्य करें.
हां जब आपकी एक पहचान और पकड़ बन जाए, उसके बाद भिन्न क्षेत्रों में आप आगे अवश्य ही बढ़ सकते हैं.


लाइसेंस / रजिस्ट्रेशन

यह एक जटिल प्रक्रिया है और सामान्य रूप से अगर आप सूचना प्रसारण मंत्रालय से लाइसेंस के लिए आवेदन करते हैं तो आपको किसी हाल में 8 महीने से कम समय नहीं लगेगा.
अगर आप तेजी से प्रक्रियाओं को पूरा करते हैं तो भी इसका औसत समय डेढ़ से 2 साल माना जाता है. इतना समय तो आपको लग ही जाना है.

इसका कारण बड़ा साफ है कि न केवल सूचना प्रसारण मंत्रालय, बल्कि इस फील्ड में कार्य करने वाले एक्सपर्ट्स के अनुसार आपको अलग अलग कई मिनिस्ट्रीज से क्लीयरेंस लेनी पड़ती है, तो कई सरकारी डिपार्टमेंट आपको एनओसी देते हैं. इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है.

लाइसेंस फीस कुछ लाख रुपए की होती है, जिसकी जानकारी सूचना प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट से ली जा सकती है, लेकिन इस कार्य को संपादित कराने वालों की मानें तो इसमें 40 लाख से ऊपर की रकम खर्च हो जाती है. बेशक इसके लिए आपको प्रोफेशनल्स की मदद लेनी चाहिए और सटीक जानकारी जुटाने के बाद, वेरीफाई करने के बाद ही इस पथ पर आगे बढ़ना चाहिए.


वेटिंग पीरियड में क्या?

प्रश्न उठता है कि जब लाइसेंस लेने में महीनों लग जाते हैं, उस दौरान आप क्या करेंगे?
निश्चित रूप से अगर आपने सेटेलाइट चैनल लेने का निश्चय कर लिया है, तो डेढ़ 2 साल के लिए आप बैठेंगे तो नहीं ही!

ऐसी स्थिति में आपको तैयारी करनी चाहिए. वह तैयारी कंटेंट क्रिएशन से लेकर, अपने ब्रांड पोजिशनिंग की स्ट्रेटेजी, ऑनलाइन  मोबाइल एप वेबसाइट डिवेलप कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. इस दौरान आप कंटेंट क्रिएशन की स्पीड तय कर सकते हैं. टीम हायरिंग कर सकते हैं. इस दौरान आप, आपकी कैटेगरी में कार्य करने वाले किसी चैनल के साथ टाइ-अप करके सुविधानुसार कुछ घंटे का स्लॉट ले सकते हैं और अपना कंटेंट बीटा-वर्जन में टेस्ट कर सकते हैं.

यहां तक कि कई लोग सेटेलाइट चैनल का आपको लाइसेंस लीज पर भी देते हैं, जिसमें ब्रांड आपका होता है और उनके लाइसेंस के बदले आप उनको एक निश्चित किराया दे सकते हैं.
इसकी अलग-अलग रकम उनके मालिकों (लाइसेंस होल्डर्स) द्वारा निश्चित की जाती है, जिसमें ₹500000 महीने से लेकर ₹1000000 या उससे आगे की रकम निश्चित हो सकती है.
साधारण भाषा में बोलें तो लाइसेंस को अपने ब्रांड के लिए कुछ दिन के लिए आप किराए पर भी ले सकते हैं.

ध्यान रखें, कंटेंट-क्रिएशन कोई छोटा कार्य नहीं है. इसलिए इस दौरान आप शोध जारी रख सकते हैं और मार्केट में अपनी प्रजेंश भी बनाए रखें, ना केवल कंटेंट क्रिएशन, टीम हायरिंग, बल्कि सेल्स और मार्केटिंग की टीम भी इस दौरान आप तैयार कर सकते हैं. लोकेशन तय कर सकते हैं, जहाँ स्टूडियो सेटअप करके आप अपनी गति बना सकते हैं.

ध्यान रखें, यह बहुत ही कम लोगों द्वारा समझी हुई प्रक्रिया है. ऐसे में अगर आप सावधानी से नहीं चलते हैं तो पैसे खर्च करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं पा सकते हैं. कई लोगों का समूह इस मामले में आपका कार्य कराने की गारंटी ले सकता है, लेकिन किसी भी समूह पर पूर्ण भरोसा करने की बजाय आपको खुद आगे बढ़ना चाहिए और प्रक्रियाओं की जानकारी लेनी चाहिए. एक प्रक्रिया को, दूसरी संस्था या व्यक्ति या समूह से वेरीफाई करना भी आपकी ही जवाबदेही है, क्योंकि ऐसा प्रचलित है कि इस मोटे खेल में कई लोग चैनल शुरू कराने के साथ चैनल बंद कराने तक का कार्य भी संपादित करते हैं.
ऐसे में आपको अपना आंख, नाक, कान और दिमाग खुला रखना होगा.

बस शोध जारी रखें और इस संबंध में अगर कोई स्पेसिफिक प्रश्न है तो आप मुझे कॉल करें, मेल करें. मैं यथोचित उत्तर देने की कोशिश करूंगा और अगर उत्तर मेरे पास न हुआ तो उस उत्तर को ढूँढने का प्रयत्न भी उतनी ही शिद्दत से करूंगा.
धन्यवाद सहित,

नोट: यह जानकारी मेरे व्यक्तिगत शोध और जानकारी के आधार पर दी गयी है, जो पूर्णतः सही होने का कनूनी-दावा नहीं करती है. आप इसमें दी गयी जानकारी को RTI या दूसरे सोर्सेज से अवश्य वेरीफाई करें. साथ ही स्पेसिफिक प्रश्नों के उत्तर को कई सोर्सेज से जांचें. कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य ही अपने विचार शेयर करें या कोई तथ्य गलत लगने पर मुझे फोन करें, उसे तत्काल सही करने का प्रयत्न किया जायेगा.


- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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