Thursday, 16 June 2016

शौकिया ब्लॉगिंग से 'प्रोफेशनल ब्लॉगिंग' की ओर! Professional blogging tips in Hindi, Mithilesh's New Article

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'ब्लॉगिंग' शब्द से आज  कौन परिचित नहीं है भला. पर यह बिडम्बना ही है कि अभी भी हम 'प्रोफेशनल ब्लॉगिंग' (Professional Blogging Tips in Hindi) से काफी पीछे खड़े नज़र आते हैं. हालाँकि, इस सम्बन्ध में जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ी है पर मुझे व्यक्तिगत रूप से कई बार लगता है कि इस सम्बन्ध में भारी कन्फ्यूजन (Confusion in blogging) मौजूद है जो भारतीय ब्लॉगर्स (Indian bloggers) की प्रगति पर नकारात्मक असर छोड़ जाती हैं, खासकर हिंदी और क्षेत्रीय भाषी ब्लॉगर्स (Hindi regional language bloggers) पर. इसका कारण सामान्य तौर पर यही कहा जा सकता है कि इन भाषाओं में ब्लॉग को बेहतर बनाने के लिए कंटेंट की उपलब्धता कम है और जो कुछ है भी वह समग्र में विषय को समझाने की बजाय तकनीकी टिप्स (Technical tips of blogging) तक सीमित रह जाता है. आइये देखते हैं इस फिल्ड में क्या सम्भावनाएं हैं तो इसे किन तरीकों से हम आगे ले जा सकते हैं: 
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ब्लॉग क्यों (why a blog is important): आज के तकनीकी ज़माने में एक तरह से यह आपको एक्सप्लोर करता है. थोड़ा विस्तारित रूप में कहें तो आप क्या सोचते हैं, क्या कहते हैं उसे एक व्यवस्थित रूप में, सूचना-तकनीक की सहायता से दुनिया के सामने पेश करने का इंटरनेट-सुलभ माध्यम है 'ब्लॉगिंग'. आप की पर्सनल यादें, प्रोफेशनल एक्सपीरियंस, सामाजिक सोच टेक्स्ट, तस्वीरें, ऑडियो और वीडियो (Text, images, audio, video content) रूप में यहाँ सहेजी जा सकती हैं, किन्तु असल कहानी इसके बाद शुरू होती है. निश्चित रूप से कुछ साल पहले तक भारत में लोग 'ब्लॉग' को एक उत्सुकता और शौक के रूप में लेते थे, किन्तु अब वह सीधी ब्लॉग से कमाई करने (earning through blogging) के बारे में विचार करने लगे हैं. अगर मैं अपना व्यक्तिगत अनुभव बताऊँ तो कई नए-पुराने हिंदी ब्लॉगर (Hindi bloggers) मुझसे मेल पर, फोन पर पूछते हैं कि 'मैं अपने ब्लॉग से कमाई कैसे करूँ?' या फिर यही प्रश्न कुछ इस तरह होता है कि 'मेरे ब्लॉग से कमाई नहीं होने का क्या कारण है?' (how to improve my blog traffic) उस वक्त तो मैं उन व्यक्तियों का 'उत्साहवर्धन' करता हूँ, लेकिन सच कहूं तो 1% ब्लॉग भी मुझे ऐसे नहीं दिखते हैं जिनकी दिशा समग्र रूप में सही हो और इसका नतीजा 'निराशा' के रूप में आना लगभग तय ही होता है. इसके कारण और निवारण (issues and solutions of blogs) के बारे में हम समझने की कोशिश इस लेख में करेंगे.
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ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एवं उसके स्कोप में कन्फ्यूजन (wordpress and blogger which is better): यूं तो फ्री ब्लॉग बनाने के कई प्लेटफॉर्म्स उपलब्ध हैं, और किसी इंडियन ब्लॉगर को शुरू में बेहतर भी यही रहते हैं, पर इनका समय और इनका स्कोप समझना भी बेहद आवश्यक है. जाहिर तौर पर इन सभी प्लेटफॉर्म्स की अपनी सुविधाएं हैं तो अपनी खामियां भी हैं. अगर मैं उत्तर(answer) की ओर से चलूँ तो 'वर्डप्रेस.ऑर्ग के सेल्फ-होस्टेड' प्लेटफॉर्म (self hosted wordpress blog) से बेहतर कुछ और नहीं! यह प्लेटफॉर्म न केवल ओपेन-सोर्स (open source blog) है, बल्कि विश्व में सर्वाधिक लोकप्रिय और सफल प्लेटफॉर्म भी है. हज़ारों थीम्स और प्लगइन्स इस पर मुफ्त (themes and plugins for wordpress) उपलब्ध हैं, जिन्हें अगर आप कस्टम-डेवलप कराना चाहें तो लाखों रूपये भी कम पड़ेंगे. यूं इस प्लेटफॉर्म में कोई कमी नहीं है, किन्तु शुरूआती ब्लॉगिंग के स्तर पर इसकी दो बड़ी समस्याएं (big issues of wordpress blog) हैं, जिसके कारण आपको ब्लॉग शुरू करने के लिए इसे नहीं चुनना चाहिए. पहली समस्या इसकी होस्टिंग (hosting blog) को लेकर आती है, जो अलग-अलग कंपनियों में सालाना 3 हजार रूपये से लेकर आगे बढ़ती जाती है. कई लोग कहेंगे कि सालाना 3 हजार रूपये कोई बड़ी रकम नहीं है, लेकिन असल प्रॉब्लम आती है जब आपकी वेबसाइट पर व्यूअर्स की संख्या बढ़ती है (increasing blog views). तकनीकी भाषा में उपरोक्त कीमत वाली शेयर्ड-होस्टिंग की 'बैंडविड्थ' आपकी वेबसाइट को धोखा देना शुरू करती है और फिर होस्टिंग-कंपनियां बैंडविड्थ बढ़ाने की खातिर कीमत बढ़ाने की बात करने लगती हैं, जो 3 हजार रूपये सालाना से बढ़कर 5 से 10 हजार महीने के खर्च तक पहुँच सकती है (शेयर्ड होस्टिंग से वीपीएस और फिर डेडिकेटेड होस्टिंग - shared hosting vps or dedicated server). न.. न... उनका कीमत बढ़ाना नाजायज़ नहीं है, लेकिन प्रश्न उठता है कि आप शुरुआत में इतना रिस्क क्यों लेना चाहेंगे? इसके अतिरिक्त, फाइल और डेटाबेस का बैकअप (backup wordpress blog posts) लेने जैसी समस्याएं भी आती हैं, तो ब्लॉग की सिक्योरिटी (security risks of blogs) का जिम्मा भी आप ही के कंधे होता है, जो अगर आप तकनीकी ज्ञान नहीं रखते हैं तो 'कंसल्टेंट' (hire blog content writer/ consultant blog) या फिर 'वाल्टप्रेस' जैसे पेड-प्लगइन पर आपकी निर्भरता को बढ़ाता है. हालाँकि, इसी प्लेटफॉर्म का कमर्शियल वर्जन वर्डप्रेस.कॉम पर आप फ्री ब्लॉग बना सकते हैं, लेकिन इसके फ्री ब्लॉग में आप 'ऐडसेंस' (blog and adsense) जैसे अपने विज्ञापन नहीं चला सकते हैं. 
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जाहिर है, शुरुआत में आपके लिए यह थोड़ा खर्चीला और उलझाऊ है, और ऐसे में आप के लिए गूगल का सर्वाधिक लोकप्रिय ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म 'ब्लॉगर' (best blogging platform free) का प्रयोग उचित रहेगा. गूगल के 'ब्लॉगर.कॉम' की कमी और खूबी यही है कि यह बेहद आसान और यूजर-फ्रेंडली (most user friendly blog platform) है. आप कहेंगे कि यह खूबी तो हुई, लेकिन कमी कैसे हुई तो उसका जवाब यह है कि इसमें 'रिसर्च और शोध' (research blogging) की कमी है. काफी लम्बे समय से गूगल ने इसमें अपडेट नहीं किया है तो वर्डप्रेस की तरह इसकी यूजर कम्युनिटी भी इसकी खूबियों, खामियों पर डिस्कशन के बारे में विचारशून्य ही है. हालाँकि, माई ब्लॉगर ट्रिक्स जैसी कुछेक वेबसाइट जरूर इसके फीचर्स और खूबियों के बारे में (blogger tips tricks) बताने की कोशिश करती है, और वह काफी उपयोगी भी है किन्तु फिर भी इसमें 'वर्डप्रेस' की तुलना में काफी सम्भावनाएं बाकी हैं. इसकी एक और कमी यह है कि इस पर गूगल का एकाधिकार है. पर रूकिए, इसकी यह कमियां उनके लिए कतई नहीं हैं, जो ब्लॉग की शुरुआत करना चाहते हैं. इस प्लेटफॉर्म का प्रयोग करके कई ब्लॉग इस मुकाम तक पहुंचे हैं कि 'वर्डप्रेस' पर बनी वेबसाइट भी उनके सामने पानी भरती नज़र आती हैं. जाहिर है, यह पूरा मामला शोध और लगातार कार्य करने का है जो कंटेंट (Content), सर्च इंजिन ऑप्टिमाइजेशन (SEO), सोशल मीडिया ऑप्टिमाइजेशन (SMO) और कुल मिलाकर आपके पाठक की संतुष्टि (satisfaction of blog viewers) और फिर यूजर इंगेजमेंट (user engagement blog tips) की राह से गुजरता है. 

ब्लॉगर की खूबसूरती यह भी है कि इसमें आपको किसी बात के लिए चवन्नी खर्च नहीं करनी पड़ती तो आप इसमें अपने पाठकों के बल पर आसानी से कमाई भी कर सकते हैं. ब्लॉग की सिक्योरिटी और उसके बैकअप (security and backup of blogger) की भी चिंता आप सामान्य ढंग से करके अपना काम चला सकते हैं, क्योंकि गूगल का मजबूत ब्लॉगिंग ढांचा इसके पीछे कार्य करता है. अपने लेख के इस पार्ट में मैंने मुख्य रूप से दो ब्लॉग प्लेटफॉर्म्स का ज़िक्र किया, जिसमें वर्डप्रेस सेल्फ होस्टेड ब्लॉग और गूगल का ब्लॉगर है. चूंकि, मैंने इन दोनों की खूबियों और खामियों को बताया है, इसलिए कन्फ्यूज होने की बजाय आसान शब्दों में इसे यूं समझिए कि ब्लॉगिंग की शुरुआत के दो-तीन साल आप ब्लॉगर (Blogger) को चुनिये और अगर आपको अपनी ब्लॉगिंग में दम-खम नज़र आता है और अगर ब्लॉगर के फ्री ब्लॉग से आप प्रत्येक दिन दस हजार से अधिक व्यूअर खींच पाने में सफल रहते हैं तो आप वर्डप्रेस की ओर जा सकते हैं. वैसे, अगर आप अपने विषय की ब्लॉगिंग के साथ तकनीकी ज्ञान भी हासिल करते हैं, उससे जुड़े प्रयोग करते हैं तो फिर आगे आपको कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी. वर्डप्रेस और ब्लॉगर के अतिरिक्त जुमला, द्रुपल, मजेन्टो जैसे सेल्फ होस्टेड सीएमएस भी बेहद पॉपुलर हैं तो टंबलर, लाइवजर्नल जैसे फ्री ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म भी बेहद उपयोगी हैं. इन सबकी जानकारी यहाँ एक लेख में दे पाना संभव नहीं है, किन्तु मेरे दुसरे लेखों में इनके बारे में आप जानकारी हासिल कर सकते हैं तो इंटरनेट और यूट्यूब पर भी आपको इनके सम्बन्ध में काफी कुछ जानकारी मिल जाएगी.
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ब्लॉग को सफल बनाना (tips for blog success): अगर आपने अपनी जरूरत के हिसाब से ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म चुन लिया है तो फिर आपके सामने समस्या आती है कि उस ब्लॉग को सफल कैसे किया जाए. किसी भी भाषा में, किसी भी विषय में आप ब्लॉग लिखें, उसे सफल करने में 80% जिस फैक्टर का योगदान होता है, वह है कंटेंट! जी हाँ, ब्लॉगिंग की दुनिया में कंटेंट को 'किंग' (Content is King) कहा जाता है. आज फेसबुक जैसे तमाम सोशल मीडिया भी अपना व्यापक प्रभाव फैलाने में सफल साबित हो रहे हैं और उसी व्यक्ति का पेज, प्रोफाइल या पोस्ट 'वायरल' (most viral blog posts) होता है, सर्वाधिक शेयर होता है, जिसके कंटेंट में दम होता है. यह सिर्फ फेसबुक के लिए नहीं, बल्कि पूरे इंटरनेट व्यवसाय के लिए सत्य है. यदि आप इंटरनेट के किसी भी माध्यम से पैसा कमाना चाहते हैं, तो आपको अपने कंटेंट की प्रस्तुति को वजनदार रखना होगा. ओरिजिनल (original) रहे तो अच्छा, यदि न भी रहे तो उसकी प्रस्तुति(presentation) निश्चित रूप से अलग और प्रभावी रहे. इसके साथ आपके कंटेंट में सम्बंधित तस्वीरें, लिंक्स (Links), सूत्रवाक्य (quotes) इसका वजन बढ़ाने के काम आते हैं. अब एक अच्छा कंटेंट, हेडिंग के साथ तैयार करके आप ब्लॉग (Blogger) पर डालें या सीएमएस वेबसाइट (Wordpress) पर डालकर फेसबुक और अन्य सोशल मीडियम पर उसका लिंक दें. फिर अच्छे कंटेंट की चाह में आपकी वेबसाइट पर विभिन्न सोशल अकाउंट्स और सर्च इंजिन से ट्रैफिक (increase search engine traffic blogger) आता है. अपनी ब्लॉग-पोस्ट का पेड प्रमोशन (paid blog promotion) भी कई मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर आपने सॉलिड कंटेंट (solid content for professional blogging) रेगुलर अपने ब्लॉग पर डालना शुरू कर दिया तो आपका 80% सफल होना निश्चित हो जाता है. इस मामले में कुछ सावधानियां (precautions for blogging) भी बेहद जरूरी हैं, जो आपको ध्यान में रखना चाहिए. जैसे, जल्दबाजी करने वाले बहुत जल्दी निराश होकर मैदान से बाहर हो जाते हैं. 
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आपको इस मार्किट को समझने और कुछ कमाई के लेवल तक पहुँचने के लिए 6 महीने से 1 साल या दो साल आराम से लग जाएंगे. वह भी तब जब आप प्रत्येक दिन 2 घंटे से ज्यादा समय नियमित रूप से देंगे. इसलिए जल्दी है तो यह काम शुरू ही न करें. ऐसे ही दूसरी सावधानी है 'कॉपी पेस्ट' (disable copy paste in blogger) की. किसी और का कंटेंट कॉपी, पेस्ट करके आप अपनी मेहनत ही जाया करेंगे, और अंततः इसका कोई फायदा नहीं होगा. न तो आपका पाठक-वर्ग (audience for your blog) बनेगा, न ही इंटरनेट पर इसे कोई रैंकिंग ही मिलेगी, बल्कि आपकी वेबसाइट या ब्लॉग की साख ख़राब ही होगी. अगर किसी वेबसाइट से आईडिया या कांसेप्ट लेना आपको जाँच जाए तो उसकी प्रेजेंटेशन अनिवार्य तौर पर अलग (different presentation of your blog) रखें. इसी क्रम में, थोड़ा बहुत तकनीकी समझ बढ़ाने की कोशिश आपके लिए फायदेमंद ही रहेगी. किसी ब्लॉग या वेबसाइट को मैनेज कैसे किया जाय, ऑनपेज एसईओ (on page seo blogger) क्या होता है, टैग, लेवल, इमेज ऑल्ट टेक्स्ट ((tag, image, alt text)) इत्यादि समझने पर बेहतर परिणाम निश्चित रूप से सामने आएंगे. आज के समय में ट्रैफिक बढ़ाने के लिए आप फेसबुक की तरह के दुसरे सोशल नेटवर्क (best social networking sites for traffic) का भी सावधानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. जैसे ट्विटर, स्टंबलउपॉन, गूगल प्लस आदि, तो अपने कंटेंट को मोबाइल डिवाइस और उसके यूजर्स के हिसाब से डेवेलप करने (responsive blogging) का प्रयत्न करें, क्योंकि अब ऑनलाइन का मतलब कंप्यूटर नहीं, बल्कि मोबाइल हो गया है. कई शोधों में यह बात सामने आ रही है कि 70% ऑनलाइन कंटेंट रीडर अब मोबाइल पर शिफ्ट होने की ओर तेजी से बढ़ गए हैं. जाहिर है, अगर आप अपने कंटेंट, ब्लॉग को कंप्यूटर यूजर के हिसाब से ही बना कर रह जाते हैं तो आपको निराश होना पड़ सकता है.
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ऑनलाइन कमाई और अफिलिएट प्रोग्राम (Online earning and affiliate programs): यदि आपने कंटेंट के मामले में समझदारी दिखा दी है तो फिर आगे का रास्ता बहुत मुश्किल नहीं. अधिकाँश ब्लॉगर कंटेंट के मामले में ही चूक जाते हैं. अगले स्टेप में आपको अपने ब्लॉग-विषय से सम्बंधित कुछ अफिलिएट प्रोग्राम ढूंढने की जरूरत है. इसमें कुछ की लिस्ट मैं नीचे दूंगा, लेकिन अर्निंग के लिए सबसे पहले और ज्यादा 'गूगल एडसेंस' (google adsense for blog)) इस्तेमाल किया जाता है, जो सबसे विश्वसनीय होने के साथ-साथ स्पैम-फ्री (Spam-free) भी है. यहाँ बताना आवश्यक है कि अधिकाँश अफिलिएट प्रोग्राम अविश्वसनीय होने के साथ स्पैम के अड्डे (Spammers) भी हैं, जो आपके पाठक को भ्रमित एवं परेशान करने में कसर नहीं छोड़ते हैं. फिर भी कमाई के लिए कुछ प्रोग्राम आपको इस्तेमाल करना ही है. अधिकांश अफिलिएट प्रोग्राम में साइनअप करने के बाद अपनी डिटेल भरनी होती है, तो अपने ब्लॉग/ वेबसाइट के बारे में भी डिटेल भरनी होती है. गूगल एडसेंस यहाँ बहुत सख्त है, यदि आपका कंटेंट उसकी पॉलिसी (content policy violation is dangerous for your blog) के हिसाब से नहीं है तो यह आपके प्रयास को निष्फल कर देगा. अफिलिएट अकाउंट अप्रूव होने के बाद आपको अपने बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होती है, फिर एक निश्चित राशि आपके अफिलिएट अकाउंट में जमा होने पर वह राशि आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है. मेरे द्वारा आजमाए हुए  कुछ महत्वपूर्ण अफिलिएट प्रोग्राम निम्न हैं, हालाँकि यह संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है तो बदलाव भी आते ही हैं:
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  1. https://www.google.com/adsense/
  2. https://www.flipkart.com/affiliate/signup
  3. https://affiliate-program.amazon.in/gp/associates/join/landing/main.html
  4. http://www.cj.com/
  5. http://www.affiliatefuture.co.uk/
  6. http://www.paidonresults.com/affiliates-sign-up.html
  7. https://www.apple.com/in/itunes/affiliates/
  8. http://www.omgpm.com/india/

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बताता चलूँ कि कभी इस तरह की ग़लतफ़हमी में न फंसे कि यहाँ क्लिक करने से, वहां क्लिक करने से, मेल करने से आप ऑनलाइन पैसे कमा लेंगे (click and earn money is false policy). साथ में कमाने के लिए शुरुआत में कहीं भी पेड मेम्बरशिप नहीं लें. कई वेबसाइट इस तरह का झांसा देती हैं कि आप यदि इतने डॉलर की मेम्बरशिप लेंगे तो उतना कमा लेंगे. यह बिलकुल फ्रॉड है, झूठा जाल है आपको फंसाने के लिए, जो अंततः आपको शोषित करने में कसर नहीं छोड़ते हैं. वेबसाइट की क्वालिटी मापने के लिए आप अलेक्सा.कॉम (alexa ranking for blogs) पर उसकी रैंक चेक कर सकते हैं. इसके साथ आपकी वेबसाइट की क्वालिटी (website and blog quality) और उसकी पहुँच बढ़ाने के लिए अनवरत अध्ययन के अतिरिक्त दूसरा कोई रास्ता नहीं है. हाँ, अगर आप के पास तकनीकी विषयों पर अध्ययन का समय न हो तो आप किसी सक्सेसफुल प्रोफेशनल ब्लॉगर से कंसल्टंसी (consult professional blogger) भी ले सकते हैं, किन्तु उसके साथ कार्य करने से पहले उसके द्वारा बनाई गई वेबसाइट या ब्लॉग की क्वालिटी और उसकी अलेक्सा रैंक पर बारीकी से नज़र अवश्य डालें. ध्यान रहे, ब्लॉगिंग दुनिया में एक जाना पहचाना और कमाऊ करियर ऑप्शन है तो भारत में भी यह बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है. जैसे-जैसे 'डिजिटल इंडिया' (Digital India and blogging) पर जोर बढ़ेगा और इंटरनेट की स्पीड और उसके प्रसार का दायरा व्यापक होगा, उसी रफ़्तार से ब्लॉगिंग और इंटरनेट गतिविधियों की श्रृंखला भी बढ़ेगी. तो आइये, सही सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सावधानी से 'प्रोफेशनल ब्लॉगिंग' (Grow with professional blogging) की ओर कदम बढ़ायें! यकीन मानिये, धीरे-धीरे मगर मजबूती से आगे बढ़ना ही इस फिल्ड में सफलता का सूत्र है.

- मिथिलेश कुमार सिंहनई दिल्ली.



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