यूपी पुलिस की ट्विटर-सेवा सराहनीय! - UP Police Twitter Seva, Crime Control and UP Government, Hindi Article



अगर आम जनता से तमाम सरकारी डिपार्टमेंट्स की रेटिंग देने का कहा जाय तो न केवल किसी खास प्रदेश में ही, बल्कि देश भर में जनता पुलिस विभाग को सबसे कम रेटिंग देगी. इसका कारण भी कोई छिपा हुआ नहीं है और वह यह है कि शिकायत दूर करना तो दूर की बात होती है, इस विभाग द्वारा शिकायत सुनी ही नहीं जाती है. पत्रकारिता जगत के साथ आम लोग भी इस बात को बखूबी जानते हैं कि एसएचओ, ऐसे, हेड कांस्टेबल तो छोड़िये एक सामान्य सिपाही भी डरा-धमकाकर शिकायतकर्ता को भगा देता है और पुलिस के सामने अनपढ़ क्या और शिक्षित क्या, सभी एकबारगी बेबश हो जाते हैं. हालाँकि, उच्चाधिकारी यह कभी नहीं चाहते हैं कि लोगों की शिकायतें न सुनी जाएँ या उनकी समस्याएं दूर नहीं की जाए, किन्तु बहुत कम लोग हैं जो पुलिस के उच्च लेवल तक अपनी बात पहुंचाने का साहस कर पाते हैं. बदलते दौर में टेक्नोलॉजी (UP Police Twitter Seva, Technology and Transparency) ने काम बेहद आसान किया है और इस क्रम में 'ट्विटर-प्लेटफॉर्म' का उल्लेख बेहद महत्वपूर्ण है. आज भारत भर के तमाम दिग्गज इस प्लेटफॉर्म का जनता से संवाद बनाने में बखूबी उपयोग कर रहे हैं तो कई राज्यों के मुख्यमंत्री और डिपार्टमेंट भी इस सुविधा का प्रयोग करने लगे हैं. हालाँकि, पुलिस जैसे संवेदनशील महकमे में 'ट्विटर-सेवा' का उपयोग करने का साहस सबसे पहले यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने दिखलाया है, जिसका मतलब यह है कि अब पूरे प्रदेश में किसी को भी शिकायत हो पुलिस उसे 'अनसुनी' नहीं कर सकती, उसे 'अनदेखा' नहीं कर सकती! यूपी गवर्नमेंट द्वारा शुरू की गयी 'ट्विटर सेवा' बेशक सुनने में आसान सी लगे, किन्तु इसका प्रभाव काफी व्यापक है तो उत्तर प्रदेश पुलिस पर इस सन्दर्भ में दबाव भी काफी बढ़ जायेगा. इसका सीधा सा मतलब है कि पुलिस के पास आने वाली शिकायतों की मात्रा तो बढ़ेगी ही, साथ ही साथ उस पर कार्रवाई करने का दबाव भी इसलिए बढ़ जायेगा, क्योंकि प्रत्येक शिकायत पर मीडिया सहित तमाम विपक्षियों की नज़र भी रहेगी ही. 


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अगर राजनीतिक रूप से देखा जाए तो अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए एक तरह से 'रिस्क' ही लिया है, जिसमें जनता का तो निश्चित ही लाभ होगा, किन्तु उनको राजनीतिक रूप से नुक्सान भी उठाना पड़ सकता है. राजनीतिक नुक्सान की परवाह न करते हुए जिस तरह इस युवा सीएम ने यह सराहनीय पहल की है, उसकी जितनी भी तारीफ़ की जाए, कम ही होगी. जिस तरह से यूपी पुलिस सपा शासनकाल में हमेशा निशाने पर रही है उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी की कानून व्यवस्था को खुद सुधारने का जिम्मा लिया है. एक तरफ वह तमाम शहरों के कप्तान व डीएम को तलब कर रहे हैं तो दूसरी तरफ यूपी पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मुहैया कराई है. गौरतलब है कि अब लोग ट्विटर के जरिए भी अपनी शिकायत पुलिस को दर्ज करा सकते हैं. बताते चलें कि इसके लिए ट्विटर इंडिया ने यूपी पुलिस को शिकायतों को ट्रैक करने के लिए विशेष ट्रैकिंग सॉफ्टवेअर ट्विटर सेवा देने की पेशकश की है. जाहिर है तकनीक के माध्यम से न केवल लोगों को सहूलियत होगी, बल्कि पुलिस के छोटे कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों के पास भी टालमटोल का बहाना ख़त्म हो जायेगा. वस्तुतः यह ऐसा कदम है, जो न केवल अखिलेश की छवि को और मजबूत करेगा, बल्कि यूपी की कानून-व्यवस्था पर किच-किच करने वालों को मुंहतोड़ जवाब भी देगा. इस मामले में अखिलेश यादव को व्यवहारिक रूप से अगर जरूरत पड़े तो केंद्र से और मदद की मांग भी करनी चाहिए, क्योंकि भारत में सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश को नियंत्रित करना कोई हंसी-खेल नहीं है. हालाँकि, इस बात में भी दो राय नहीं है कि अगर पुलिस पूरे मनोयोग से अपराध-नियंत्रण पर ध्यान दे दे तो किसी हिट फिल्म का वह डायलॉग सटीक साबित हो जायेगा, जिसमें कहा गया है कि 'अगर पुलिस नहीं चाहे तो कोई मंदिर के बाहर से चप्पल तक नहीं उठा सकता, बड़े अपराध तो दूर की कौड़ी हैं.' 




उम्मीद की जानी चाहिए कि राजनीति के क्षेत्र में देश को दिशा देने वाला उत्तर प्रदेश कानून-व्यवस्था के मामले में एक बेहतरीन नजीर पेश करेगा और फिर 'उत्तम प्रदेश' का नारा तब ज्यादा सूटेबल साबित होगा. इस क्रम में यूपी पुलिस की 'ट्विटर-सेवा' निश्चित रूप से मास्टरस्ट्रोक हैं, क्योंकि अब कोई एक पुलिसकर्मी लापरवाही भी करता है तो शिकायतकर्ता डरेगा नहीं, दबेगा नहीं, क्योंकि वह शिकायत तो कई स्तर तक दर्ज हो चुकी होगी. साथ ही साथ शिकायत की मॉनिटरिंग भी कई लेवल पर हो रही होगी. इस मामले के तकनीकी पहलुओं पर बात करें तो डीजीपी जावीद अहमद के अनुसार इसके लिए बकायदा दो दिन की वर्कशॉप का आयोजन किया गया है, जिसमें सभी 75 जिलों के प्रतिनिधि इसकी कार्यप्रणाली को समझेंगे. इतना ही नहीं, बल्कि अलग से बनाया गया 'ट्विटर सेल' भी मौजूद है, जहाँ सोशल मीडिया पर शिकायत करने वालों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण दिया जाएगा. शिकायत करने वाले की जानकारी के आधार पर मामले की जांच संबंधित पुलिस थाने को भेजी जाएगी. ऐसे में समझा जा सकता है कि ऊपर से शिकायत नीचे आएगी तो थाने में 'दलालों' की भूमिका भी कम होती चली जाएगी, जबकि अपने उच्चाधिकारियों के प्रति 'ट्विटर सेल' के माध्यम से पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ जाएगी. बताते चलें कि यूपी पुलिस देश का पहला राज्य बन गया है जिसने 'ट्विटर सेवा' देने का साहस किया है. डीजीपी जावीद अहमद इस सम्बन्ध में कहते हैं कि 'ट्विटर इंडिया ने हमें यह सुविधा देने का फैसला लिया और यह सुविधा लोगों की निश्चित रूप से मदद करेगी. 


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डीजीपी के अनुसार, यह सेवा हमें इस जानकारी को हासिल करने में मदद करेगी कि कितनी शिकायतों का निपटारा किया गया और कितनों की सुनवाई नहीं हुई. गौरतलब है कि ट्विटर सेवा का सॉफ्टवेअर ऐसा पटल होगा जहां शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को एक कोड दिया जाएगा जो जिले के पास भेजा जाएगा. तदोपरांत जिला स्तर पर इस सेवा के लिए जिस ऑफिस को चिन्हित किया जाएगा उसे इन शिकायतों को तीन वर्ग में अलग करना होगा. पहला जो शिकायत दर्ज की गई, दूसरा जिन शिकायतों का निपटारा किया गया और तीसरा चरण जिसमें मामले की पूरी जानकारी नहीं दी गई. इसके बाद शिकायतकर्ता (UP Police Twitter Seva, Crime Control and UP Government, Hindi Article) को जो कोड दिया गया है उसके आधार पर मामले की जांच की जाएगाी और उसका निस्तारण किया जाएगा. शिकायतकर्ता अपनी शिकायत दर्ज कराये जाने के बाद उस मामले में क्या कार्यवाही की गई और किस चरण पर यह मामला है उसे ऑनलाईन ट्रैक भी कर सकता है. ट्विटर की लोकप्रियता और इससे जुड़े कई अन्य विभाग, मसलन पासपोर्ट-सेवा, इंडियन रेल काफी बेहतर कार्य कर रहे हैं. यूपी के सन्दर्भ में ही कई ऐसे मामले आये हैं, जिसमें खुद अखिलेश यादव ने संज्ञान लेकर जरूरतमंद लोगों की मदद की है. ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि पुलिस-क्षेत्र में यह सेवा निश्चित तौर पर क्रन्तिकारी सिद्ध होगी, जो लोगों के विवादों को तो सुलझाएगी ही, साथ ही साथ जरूरी न्याय के लिए मार्ग भी प्रशस्त करेगी.

- मिथिलेश.




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