भोपाल एनकाउंटर का विरोध करने वालों को 'धिक्कार' है! लेख पर कमेंट और उसका उत्तर ... जरूर देखें! Bhopal Encounter and People Reaction, Comment and Answer



भोपाल एनकाउंटर का पक्षपात करने वालों को 'धिक्कारने वाले' मेरे इस लेख पर किसी ने कमेंट किया, जिसका उसी की भाषा में मैंने समुचित उत्तर देने की कोशिश की. आप ही तय करें कि उस व्यक्ति को सही उत्तर दे सका हूँ कि नहीं?
(पहले उसका कमेंट है, फिर नीचे मेरा उत्तर)

========== एनबीटी पर प्रकाशित लेख पर आया कमेंट =========
Pundit wrote:

मूर्खानन्द जी,
  1. आपने ए कैसे मान लिया कि वो आतंकवादी ही हैं? क्या पुलिस इसको साबित कर पायी? किसी बड़ी घटना के बाद पुलिस अपनी साख बचाने के लिये छुटभैये गुंडो को पकड़कर आरोप लगाकर जेल मे ढूं देती है जो कालान्तर मे कोर्ट द्वारा बरी हो जाते हैं.
  2. ए भी हो सकता है की ए आतंकवादी ना होकर (आरोपी होना और दोषी होने मे ज़मीन आसमान का फर्क है) साधारण अपराधी (चोरी छिनौति या निर्दोष ही) हो और जेल मे रहते - रहते उकटा गये हों और भागने की योजना बनाई हो?
  3. पुलिस ने इनके पास से देशी कट्टे (12 बोर ) और कुछ चम्मच टाइप चाकू बरामद दिखाये हैं. ए इतने घटक हथियार नहीं थे की गोली चलानी पड़े. पुलिस ने और आपने ए कैसे तय कर लिया की वो आतंकवादी ही हैं?
  4. पुलिस द्वारा किये गये हर इनकाउंटर / हत्या की जांच होनी चाहिये. सामाज़िक रूप से इसे स्वीकार करने के गंभीर परिणाम होंगे. पुलिस पैसे लेकर या अन्यथा किसी पर भी आरोप लगाकर गोली मार देगी. आपको भी - देखने सुनने वाला कौन होगा?


इसलिये जिस मसले पर कुछ पता नहीं हो कृपया ज्ञानबाजी ना करें.

========== कमेंट का उत्तर =========
(Pundit को जवाब )- Mithilesh सिंह

आदरणीय अति ज्ञानी महाराज जी,
  1. आपको पता है हमारे देश और दुनिया में आतंकवाद से कितने लोग मरे हैं और मर रहे हैं? अगर पुलिस और सेना का इनसे निपटने का तरीका आपको सामजिक रूप से खतरनाक लगता है तो कृपया इसका तरीका सुझाएं ??
  2. जो आतंकवादी मारे गए हैं, वह सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'सिमी' से सम्बन्ध रखते थे और जो आरोप उन पर लगे थे, वह न तो पहली बार लगे थे और न ही साधारण आरोप थे? कृपया कानून और धाराओं की जानकारी लेने के लिए जरा समय निकालिएगा, बजाय कि बकवास करने के!
  3. एक हवलदार का गला उन आतंकियों ने रेत दिया और आप कह रहे हैं कि पुलिस को गोली नहीं चलानी चाहिए थी? बेवकूफ आदमी, अगर तुम्हारे भाई का कोई गला रेत दे तो तुम क्या करोगे? बावजूद इसके अगर तुम चाहते हो कि पुलिस अपने साथी की हत्या करने वालों को 'बिरयानी' खिलाती तो डूब मरो 'चुल्लू भर पानी में'!
  4. जांच तुम्हारे जैसी मानसिकता वाले व्यक्ति की भी होनी चाहिए, जो रात दिन ड्यूटी करने वालों पर शक करते हैं और विदेशी ताकतों के हाथों खेलने वाले नक्सलियों, आतंकियों के जायज एनकाउंटर को समाज के प्रति खतरा बताते हैं. अगर जरा भी शर्म बची हो तो सीमा पर मर रहे सैनिकों और जेल में गला रेते जाने से मरे हवलदार की तस्वीरें देख लेना! वह पुलिसवाला तुम्हारे जैसे नालायकों की रक्षा करते हुए, संविधान के नियमों का पालन करते हुए मरा ...


इसलिए अगर तुम्हें सब कुछ पता है तो उस जानकारी को कूड़े में डालकर गूगल और विकिपीडिया पर 'देश' और 'ड्यूटी' के साथ 'देश के प्रति वफादारी और गद्दारी' की परिभाषा समझने का प्रयत्न करो !!!  

Bhopal Encounter and People Reaction, Comment and Answer

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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