Friday, 2 December 2016

ऑनलाइन मीडिया, न्यूज पोर्टल के गवर्नमेंट रजिस्ट्रेशन के संबंध में व्याप्त भ्रांतियां! Online Media, News Portal Registration Process, Government Registration method for News Website, Validity of Online Portals, Hindi Article, new



मेरा नाम मिथिलेश है और पिछले 8 सालों से मेरा मुख्य काम न्यूज़ वेबसाइट, न्यूज पोर्टल बनाना (How to make News Portals) है, साथ ही साथ कैसे उस पर ट्रैफिक लाया जाए और किस प्रकार उस वेबसाइट का बैकअप और सुरक्षा संबंधी उपाय किया जाए, इस पर कार्य करता हूँ. इसके अतिरिक्त पत्रकारिता और लेखन से जुड़ा हुआ हूँ, तो तमाम अख़बार एवं पत्रिकाएं मेरे लेखों को नियमित छापती रहती है. जाहिर तौर पर न्यूज वेबसाइट और पत्रकारिता संबंधी तमाम इंक्वायरी आती है. हालाँकि, वेबसाइट बनाने और उसे मेंटेन करने से अलग यह लेख न्यूज वेबसाइट के इंडियन गवर्नमेंट के साथ रजिस्ट्रेशन (How to register your News website with Government of India) को लेकर है. जैसाकि हम सबको पता ही है कि तमाम मीडिया संस्थान अपने अखबार, मैगजीन या चैनलों के लिए गवर्नमेंट के साथ रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से कराते हैं. और इस हेतु आरएनआई एवं सूचना प्रसारण मंत्रालय जैसे संस्थान सक्रिय रहते हैं. Online Media, News Portal Registration Process, Government Registration method for News Website, Validity of Online Portals, Hindi Article, new
कई लोगों का मुझसे यह सीधा प्रश्न होता है कि वेबसाइट / न्यूज पोर्टल बनवाने के बाद क्या इसे गवर्नमेंट से भी रजिस्टर्ड कराना पड़ता है? 
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इसके बारे में मैं अगली पंक्तियों में बताऊंगा, उससे पहले आपको एक वाकया सुनाता हूं. मेरे एक पत्रकार मित्र के लिए मैंने एक न्यूज पोर्टल बनाया और कैसे उसे अपडेट किया जाए, कैसे उस पर ज्यादा ट्रैफिक लाया जाए, कैसे उससे आमदनी बढे, इस संबंध में उन्हें जानकारी दी. उन्होंने 'यूनिक कंटेंट' (Unique content is important for all kinds of News website) डालना शुरू कर दिया. कुछ दिन बाद उनसे मिलना हुआ तो संयोगवश उन्होंने मुझे एक अन्य वेबसाइट दिखाई, जिस पर लिखा था कि अपने न्यूज पोर्टल को अमुक संस्था से रजिस्टर्ड कीजिए और फिर आप 'प्रेस कार्ड' जारी कर सकते हैं. उन्होंने आगे बताया था कि इसका मतलब है कि आप का न्यूज पोर्टल गवर्नमेंट से रजिस्टर्ड हो गया. इसके लिए उस वेबसाइट ने 8 - 10 हजार का कोई सदस्यता शुल्क भी रखा था. जब उस वेबसाइट की ऑथेंटिकेशन मैंने चेक की, तो मैं दंग रह गया कि उसका गवर्नमेंट संस्थान से कोई लेना देना नहीं था. वह बस एक एनजीओ की तरह कोई संस्था थी (या शायद एनजीओ भी नहीं), जो न्यूज पोर्टल बनाने वालों को झांसे में रख कर पैसा बनाने का कार्यक्रम चला रही थी. मेरे पत्रकार मित्र इसके लिए पैसे देने हेतु तैयार भी हो गए थे, जिन्हें मैंने तत्काल मना किया (Never give a single rupee to anyone for website registration with Indian Government, but follow the procedures). मैं न्यूज वेबसाइट/ न्यूज पोर्टल बनवाने वाले सभी पत्रकार/ इंटरप्रेन्योर मित्रों से कहना चाहता हूं कि आप सब को ऐसे किसी भी झांसे में नहीं आना चाहिए और इस तरह किसी को भी पैसे देकर आप कोई वैधता हासिल नहीं कर सकते. हाँ, आप के पैसे अवश्य ही पानी में चले जायेंगे, मतलब आर्थिक नुक्सान! Online Media, News Portal Registration Process, Government Registration method for News Website, Validity of Online Portals, Hindi Article, new
तो प्रश्न उठता है कि ऐसे में क्या किया जाए (How to register my News Portal in India)? 

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चूंकि, परंपरागत मीडिया, जैसे प्रिंट अखबार, पत्रिका में पाठक-दृष्टि से लगातार गिरावट आती जा रही है. लोग-बाग इसको पढ़ना कम कर रहे हैं, इसके पाठक घट रहे हैं तो दूसरी ओर इंटरनेट जैसा माध्यम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसीलिए अब लोग अखबार या पत्रिका शुरू करने की बजाय 'न्यूज वेबसाइट' शुरू करने को प्राथमिकता देने लगे हैं. निश्चित रुप से सूचना क्रांति के बाद हर हाथ में मोबाइल है तो रिलायंस जिओ जैसी सर्विस (Reliance jio is better option to update your News Portal, anywhere in India) के लांच के बाद तो हर मोबाइल में फास्ट इंटरनेट उपलब्ध होने की संभावना तेजी से बढ़ गई है. जाहिर है न्यूज पोर्टल या वेबसाइट की पहुँच हर एक हाथों में उपलब्ध होने की ओर तेजी से बढ़ रही है और सवा सौ करोड़ भारतीयों के हाथ में इन्टरनेट की पहुँच संभवतः अगले 5 साल से पहले ही हो जाएगी. ऐसे में इंटरप्रेन्योर बिरादरी के साथ-साथ, मीडिया जगत के लोग भी न्यूज पोर्टल बनवा कर उस पर खबर के माध्यम से, विचारों के माध्यम से अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं. इसके दो बड़े लाभ हैं. एक तो वेबसाइट या न्यूज पोर्टल बनाने में अखबार छापने या पत्रिका छापने जैसा बड़ा और नियमित खर्च नहीं लगता वहीं दूसरी ओर वेबसाइट की पहुंच असीमित होती है. अखबार या पत्रिका आप जिन क्षेत्रों में वितरित करेंगे/ कराएंगे, सिर्फ उन्हीं क्षेत्रों में पहुंचेगी, उन्हीं हाथों में पहुंचेगी, किंतु अगर आप का कंटेंट वेबसाइट पर उपलब्ध है, न्यूज़ या विचार, लेख वेबसाइट पर उपलब्ध है, तो वह पूरे विश्व में कहीं से भी देखा जा सकता है, पढ़ा जा सकता है और उस पर पाठक त्वरित प्रतिक्रिया दर्ज करा सकते हैं. मतलब कम खर्च में ज्यादा काम और इफेक्टिव परिणाम (News Websites are much better options than traditional Media, because of Minimum expense, Wider Approach, best results)! ऐसे में तमाम पत्रकार एवं मीडिया जगत के अन्य लोग इसको प्रिफरेंस दे रहे हैं. ऐसे में एक बात स्वाभाविक रूप से सामने आ जाती है कि न्यूज वेबसाइट का गवर्नमेंट से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है कि नहीं? Online Media, News Portal Registration Process, Government Registration method for News Website, Validity of Online Portals, Hindi Article, new

अगर इसे एक वाक्य में कहा जाए तो "शुरुआत में आपको न्यूज वेबसाइट चलाने के लिए गवर्नमेंट से अप्रूवल लेने की जरूरत नहीं है!" (No need to register your website, initially with Government of India. Read this full article about News Portal and its registration Processes.) 
हां, अगर आप चाहते हैं कि गवर्नमेंट से आपका एक्रेडिशन हो ही, तो उसके लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा कई सारी गाइडलाइंस जारी की गई हैं. यह कमोबेश 'प्रिंट और विजुअल मीडिया' के लिए दिए गए जनरल नियम न्यूज वेबसाइट, न्यूज पोर्टल के लिए भी लागू होते हैं, तो कुछ तकनीकी पॉइंट्स मैं नीचे की लाइनों में दूंगा. हालांकि सामान्यतः यह एक्रेडिशन, आपको सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों में एक्सेस दिलाने और न्यूज़ इत्यादि को कवरेज करने की ही परमिशन देगा और वैसे भी तमाम सरकारी कार्यक्रमों में इसकी कोई आवश्यकता नहीं होती है. रही बात प्रेस कार्ड इशू करने की, तो इसके लिए अवश्य यह मुफीद रहता रहेगा. हालाँकि, तकनीकी दृष्टि से इसे शुरू में कराने की बजाय, आपको अपनी वेबसाइट की बेहतरी, उसकी व्यापक पहुँच और गूगल एडसेंस, अफिलिएट मार्कटिंग (Unique Content, Getting Traffic, Adsense Earning, Affiliate Earning for Your News Website is much important) जैसे अन्य माध्यमों से कमाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. वैसे, इसके वगैर भी आप अपना न्यूज पोर्टल, न्यूज वेबसाइट बनाकर जो कंटेंट देना चाहे वह डिलीवर कर सकते हैं और अगर वाकई में आपके कंटेंट में वह दम है तो जल्द ही आप वह स्थान बना लेंगे, जिसे दस साल पुराने अखबार या पत्रिका को बनाने के लिए तरसना पड़ता है. Online Media, News Portal Registration Process, Government Registration method for News Website, Validity of Online Portals, Hindi Article, new

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अब मिथिलेश२०२०.कॉम को ही ले लीजिये, इस पर आज की डेट में प्रतिदिन 8 हज़ार से ज्यादा पेज व्यूज हैं और दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स जैसे दर्जन भर नामों को छोड़ दिया जाए तो 8 हज़ार किस अखबार की कॉपियां छपती हैं, यह इस इंडस्ट्री से जुड़े लोग बखूबी जानते हैं. आप डीएवीपी या आरएनआई में अखबारों की प्रतियां (Reality of Print Media, Read Hindi Article Here) छपाने के दिए गए रिकॉर्ड पर न जायेगा, क्योंकि हकीकत यही है कि अगर कोई अख़बार या पत्रिका 1 लाख कॉपियां छापने का हलफनामा जमा करता है, तो शायद उसकी 500 कॉपियां ही छपती हैं. वह भी कुछ अखबारों की ही, जबकि कई तो फाइल कॉपी पर ही ... !! उन विचारों की भी कई मजबूरियाँ हैं, क्योंकि 12 पेज की 500 कॉपीयों का अखबार छापने में 3 से 4 हज़ार का खर्च आ जाता है. जाहिर है, डीएवीपी और गवर्नमेंट का विज्ञापन (DAVP advertisement reality, Hindi Article) लेने के लिए उन्हें धांधली करनी ही पड़ती है और इस चक्कर में पत्रकारिता और संपादक की अंतरात्मा गिरवी रखनी पड़ती है. ऊपर से अधिकारियों की चापलूसी अलग से ... 
अब इस धांधली से तो अच्छा है कि आप न्यूज वेबसाइट, न्यूज पोर्टल शुरू करें और बेहतर कंटेंट और प्लानिंग के साथ आगे बढ़ें (News website, portal is much better option than traditional media. Why? Read reasons). 

जैसाकि बताया जा चुका है कि शुरूआती तौर पर सरकारी तामझाम के वगैर ही आप कार्य शुरू कर सकते हैं और अगर आपको प्रेस-कार्ड इस करना ही है तो इसके लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting norms for News Portals, Information in Hindi) के निम्नलिखित नियमों की ओर दृष्टि डाल लीजिये:
  1. The general terms and conditions prescribed for the representatives of print and visual media will also be applicable in case of online editors,correspondents, camerapersons. (ऑनलाइन संपादकों, संवाददाताओं और कैमरा पर्सन्स के लिए प्रिंट और विजुअल मीडिया के नियम ऑनलाइन मीडिया पर भी लागू हैं.)
  2. A news site / portal means a website which has at least 1/3rd of its visible content related to news & current affairs originally reported by its own correspondents. (वेबसाइट का कम से कम एक तिहाई कंटेंट संसथान के अपने संवाददातों द्वारा रिपोर्ट किया गया होना चाहिए.)
  3. The publications on behalf of which accreditation has already been given will accommodate their online journalists within their existing quota. (प्रकाशन समूह अपने ऑनलाइन पत्रकारों को अपने लिए निर्धारित कोटा के अन्तर्गत स्थान देना)
  4. The site should have paid subscribers. However, it should not be insisted on the subscribers right now but some preference will be given to the news sites having subscribers. (पेड सब्सक्राइबर्स वाली वेबसाइट को वरीयता दी जाएगी, हालाँकि इस हेतु ज़ोर नहीं दिया जायेगा)
  5. Online news agencies will be governed as per the existing rules prescribed for news agencies. (न्यूज एजेंसियों वाले नियम ऑनलाइन न्यूज़ एजेंसियों पर यथावत लागू होंगे)
  6. The site should have a minimum annual revenue of either Rs.20 lakhs from its news portions only OR Rs.2.5 crores from the entire website including its news portion.(न्यूज वेबसाइट का एनुअल रेवेन्यू कम से कम 20 लाख रूपये होना चाहिए और अगर किसी वेबसाइट का पार्ट न्यूज-सेक्शन है तो कुल वेबसाइट का रेवेन्यू सालाना ढाई करोड़ होना चाहिए.) 
  7. The site should be updated regularly and at least 6 times daily. (वेबसाइट नियमित तौर पर प्रत्येक दिन कम से कम 6 बार अपडेट होनी चाहिए.) 
  8. The news portal should be observing the laws of the land in terms of content, service, promotions, finances and any other aspect of functioning. (कंटेंट, सेवा, प्रमोशन, फाइनेंस या किसी अन्य मामले में न्यूज वेबसाइट भारतीय कानूनों से बंधी होगी)
  9. The news site should have been functioning for at least one year. (कम से कम 1 साल से वेबसाइट फंक्शन में रहना अनिवार्य है.)
  10. The domain name of the site should be registered for at least the next 5 years from the date of application. (डोमेन नेम कम से कम भविष्य के 5 साल के लिए रजिस्टर होना चाहिए.)
  11. The site should have at least 10,000 page views per day of its news-portion. (न्यूज वेबसाइट पर प्रतिदिन कम से कम दस हज़ार पेज व्यू होनी चाहिए, यानी महीने में 3 लाख बार आपकी वेबसाइट को देखा जाना चाहिए.) 
  12. The issue of determining the authenticity of the site may be decided in consultation with VSNL in case of any doubt. (विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) की सहायता से आपकी वेबसाइट की ऑथेंटिसिटी चेक की जा सकती है.)
  13. In the event of a website/portal found involved in any activity perceived as cyber crime now or in future, all accreditations given to representatives of that website/portal will be withdrawn at the discretion of the DG (M&C).  (किसी भी साइबर क्राइम में इन्वोल्व होने पर प्रमाणन रद्द कर दिया जायेगा.)

नोट: *मेरी अंग्रेजी कपिल शर्मा वाली है, इसलिए ऊपर के 13 पॉइंट्स में  अनुवाद की गलती के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे. वैसे मैंने ऑनलाइन डिक्शनरी से मिला-मिला कर अनुवाद किया है :) 😄😄
* यह पूरा लेख सिर्फ फ्रॉड से बचाने के लिए लिखा गया है, ताकि न्यूज पोर्टल वाले धोखा देने वाले तथाकथित 'दलाल' लोगों से सावधान रहें. इसकी कानूनी वैधता आप स्वयं चेक करें, वैसे कहीं से न्यूज उठाने और अपने पोर्टल पर लगाने के सन्दर्भ में आपके पास किसी न्यूज एजेंसी का अधिकार रहे तो और भी अच्छा!

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तो इस बीच रास्ता निकालकर आप आगे बढ़ें और अपने न्यूज पोर्टल की नींव डालकर खुद का एक संस्थान निर्मित करें तो स्वच्छ पत्रकारिता के माध्यम से समाज की यथासंभव सेवा (How to serve your society, being a journalist, but in real manner) भी करें, बिना दलाली, बिना ज्यादा खर्च और बिना अधिकारियों को तेल लगाए!

न्यूज पोर्टल से सम्बंधित किसी भी अन्य जानकारी के लिए, या उसे बनाने, प्रमोट करने के लिए कॉल या मेल करें मिथिलेश को...
फोन: +91- 9990089080
मेल: mithilesh2020@gmail.com

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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Disclaimer: इस पोर्टल / ब्लॉग में मिथिलेश के अपने निजी विचार हैं, जिन्हें पूरे होश-ओ-हवास में तथ्यात्मक ढंग से व्यक्त किया गया है. इसके लिए विभिन्न स्थानों पर होने वाली चर्चा, समाज से प्राप्त अनुभव, प्रिंट मीडिया, इन्टरनेट पर उपलब्ध कंटेंट, तस्वीरों की सहायता ली गयी है. यदि कहीं त्रुटि रह गयी हो, कुछ आपत्तिजनक हो, कॉपीराइट का उल्लंघन हो तो हमें लिखित रूप में सूचित करें, ताकि तथ्यों पर संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. मिथिलेश के प्रत्येक लेख के नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनाएगी, ऐसा हमें विश्वास है.

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