विश्व में अग्रणी बनने की ओर है भारत का अंतरिक्ष अभियान! ISRO Scientists, Successful Satellite Launches, Hindi Article, New, Challenge to Pakistan, Positive India



एक ऐसा क्षेत्र जो पूरी लगन से आगे बढ़ता जा रहा है, वगैर किसी परिस्थिति से प्रभावित हुए. जी हाँ, भारत का अंतरिक्ष अभियान एक के बाद दुसरे गौरव का अवसर हमारे देश को लगातार दे रहा है. हर बार ऐसी उपलब्धि जो न केवल देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी छाती 'इसरो' की उपलब्धियों से चौड़ी होती जा रही है. इसका सबसे ताजा उदाहरण हैं, अत्याधुनिक स्क्रैमजेट रॉकेट इंजन का सफल परीक्षण. बताते चलें कि स्क्रैमजेट रॉकेट एक बार उड़न भरने के बाद ईंधन के लिए वायुमंडल की ऑक्सीजन का इस्तेमाल करेगा, जो प्रक्षेपण की लागत कई गुना कम करने में मदद करेगा. यह भी समझना आवश्यक है कि इसकी सफलता के बाद हवा से ऑक्सीजन लेने वाले दूसरे इंजन को डिजाईन करने में इसरो को सहयोग मिलेगा. स्क्रैमजेट रॉकेट इंजन का सफल परीक्षण करने के बाद भारत विश्व का ऐसा चौथा देश (ISRO Scientists, Successful Satellite Launches, Hindi Article, New, Challenge to Pakistan, Positive India) बन गया है, जिन्होंने स्क्रैमजेट रॉकेट इंजन का सफल परीक्षण किया है. जाहिर है यह सरकार के साथ देश के प्रत्येक नागरिक के लिए ख़ुशी का अवसर है. दुर्भाग्य से भारत का पड़ोसी पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का एक्सपोर्ट कर रहा है, जिसका शिकार हमारा देश भी है, तो ऐसे में पाकिस्तानियों को हमारे पीएम नरेंद्र मोदी की उस अपील पर अवश्य ही ध्यान देना चाहिए, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी जनता को अपने शासकों से प्रश्न पूछने को कहा था! पूरी दुनिया में आतंक सप्लाई करने वाले पाकिस्तान की जनता को पूछना ही चाहिए कि एक ओर भारत  स्क्रैमजेट रॉकेट इंजन का सफल परीक्षण कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान आतंकी हमलों और सुसाइड बॉम्बर का परिक्षण क्यों कर रहे हैं? खैर, पाकिस्तान की आतंक-गाथा जारी रहेगी, शायद तब तक जब तक वह खुद बर्बाद नहीं हो जाता है, किन्तु इस बीच भारत में इसरो जैसे संस्थानों ने निश्चित रूप से वैज्ञानिक प्रगति का नया आयाम पेश करने का मजबूत कार्य प्रस्तुत किया है. 



तकनीकी तौर पर बात करें तो, परीक्षण के दिन, यानी 26 सितंबर की सुबह श्रीहरिकोटा से स्क्रैमजेट इंजन को लेकर आधुनिक प्रौद्योगिकी यान (एटीवी) ने उड़ान भरी. ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के साथ उड़न भरने के बाद 300 सैकंड वायुमंडल में रहने के लिए ऑक्सीकारक के रूप में वायु से ऑक्सीजन लिया. 300 सैकंड के बाद बंगाल की खाड़ी में आकर उड़ान ख़त्म हुआ. आम तौर पर रॉकेट के इंजनों में दहन के लिए ईंधन और ऑक्सीकारक दोनों होते हैं. इसके सफल होने के बाद स्क्रैमजेट इंजनों का इस्तेमाल इसरो के रियूजेबल लांच व्हीकल को हाईपरसोनिक रफ्तार में चलने के लिए भी किया जाएगा. जाहिर तौर पर इस तरह की तकनीकी दक्षता से हमारी वैज्ञानिक बिरादरी की प्रतिष्ठा कई गुनी बढ़ गयी (ISRO Scientists, Successful Satellite Launches, Hindi Article, New, Challenge to Pakistan, Positive India) है. देखा जाय तो पिछले तीन साल में इसरो भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ साथ कई मिल के पत्थर को छुआ है. सिर्फ इस बार ही क्यों, बल्कि इसके पहले 22 जून को इसरो ने एक साथ 20 उपग्रहों का प्रक्षेपण कर इतिहास रच दिया था. उन 20 उपग्रहों में 17 व्यवसायिक और 3 स्वदेशी उपग्रह थे. हालाँकि 17 व्यवसायिक उपग्रह अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और इंडोनेशिया के थे जबकि एक चेन्नई के सत्यभामा विश्वविद्यालय और एक पुणे के कॉलेड ऑफ इंजीनियरिंग के साथ ही एक इसरो का खुद का उपग्रह काटरेसैट-2 श्रृंखला था. उस सफलता से भी भारत के समकक्ष देश आश्चर्य से इस देश को निहार रहे थे. निश्चित रूप से पाकिस्तानी आवाम भी भारत की इस सफलता से अपनी तुलना कर ही रही होगी. आखिर दोनों देशों की आज़ादी तो एक ही साथ हुई थी न, किन्तु एक कहाँ अंतरिक्ष में ऊंचाइयां छू रहा है तो दूसरा आतंकवाद फैलाकर मानवता को शर्मसार कर रहा है. 


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इसरो की सफलताओं में थोड़ा और पीछे जाएँ तो, 18 दिसम्बर 2014 को इसरो ने अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-एमके3 का परीक्षण किया था. तीन स्तरों पर तीन तरह के ईंधन ठोस, द्रव और क्रायोजनिक का इस्तेमाल होने वाले इस रॉकेट की ऊंचाई 43.43 मीटर था. इसमें सबसे खास बात यह थी कि इसके साथ ही इसरो ने इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले 3.65 टन वजनी क्रू माड्यूल का परीक्षण भी किया था. इसके बाद तो इनसेट-4 जैसे भारी संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया. जाहिर तौर पर इन सफलताओं के लिए इसरो के वैज्ञानिकों को जितनी भी बधाइयां दी जाएँ, कम ही होंगी! इससे भी पहले भारत का मंगलयान पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा कर इसरो ने विश्व में अपना लोहा मनवा लिया था, क्योंकि इसरो ने मंगलयान को पृथ्वी की कक्षा में अपने पहले ही प्रयास में स्थापित कर दिया था. सरकारें बदलती रहीं, किन्तु हमारे महान वैज्ञानिकों के प्रयास में कभी कमी नहीं आयी और इसीलिए भारत के इतिहास में 5 नवम्बर 2013 स्वर्णिम अक्षरो में अंकित हो गया, क्योकि भारत दुनिया का पहला ऐसा देश (ISRO Scientists, Successful Satellite Launches, Hindi Article, New, Challenge to Pakistan, Positive India) बना था जिसने अपने पहले प्रयास में ही मंगल अभियान को पूरा कर लिया था. दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान की कुल लागत करीब 450 करोड़ रुपए थी, जो बाकी देशों के अभियानों की तुलना में सबसे कम थी. काश कि चीन जैसे विस्तारवादी देशों के हाथों का नया खिलौना बन रहा पाकिस्तान भी इन सफलताओं की ओर अपना ध्यान केंद्रित कर पाता, तो आज वह आतंक की फैक्ट्री नहीं, बल्कि जन कल्याण की दृष्टि से विश्व में अग्रगामी देश होता! निश्चित रूप से इसरो की यह सफलता सीमा पर उरी आतंकी हमले में शहीद सैनिकों के लिए श्रद्धासुमन है तो पाकिस्तान जैसे देश को कड़ा जवाब भी! भारत को हर क्षेत्र में ऐसे ही ऊंचाइयां छूने की जरूरत है, और निश्चित रूप से यही वह रास्ता है जिससे भारत हर चुनौतियों को सकारात्मक ढंग से पर कर सकता है, बजाय 'केंकड़ा जंग' में फंसने के! पाकिस्तान निश्चित रूप से किसी केंकड़े की भांति हमारी टांग खींचता रहेगा, किन्तु हमें 'इसरो' की तरह सफलताएं हासिल कर जल्द ही इस रेंज से बाहर निकल जाना चाहिए . यही असल नीति है, यही सकारात्मकता है ... यही बदला भी होगा सैनिकों की शहादत का!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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