पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, हिंसा और दंगाइयों को संरक्षण न दें ममता बनर्जी! Corruption, Violence, Riots in West Bengal, Hindi Article, New, Mamta Banerjee, Rose Valley Scam, Malda Violence Analysis, Intellectual, Secular People



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आधुनिक समय में इस बात की कल्पना बेहद कठिन है कि अगर सीबीआई किसी आरोपी को किसी मामले में गिरफ्तार करती है, तो उसके समर्थक / कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो जाएँ! हालाँकि, कुछ दशक पहले तक भारतीय राजनीति में यह सब होता था, किंतु आधुनिक समय में ऐसा सोचना भी लोकतंत्र और कानून के शासन की गरिमा पर प्रश्न चिन्ह लगा देता है. किंतु सच्चाई यही है कि ऐसा हो रहा है और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की नेत्री ममता बनर्जी इस पूरे मामले पर अपने कार्यकर्ताओं का ही बचाव करती नजर आ रही हैं. गौरतलब है कि रोज वैली चिट फंड घोटाला मामले में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को सीबीआई की तरफ से गिरफ्तार क्या किया गया, उसकी प्रतिक्रिया में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने न केवल कोलकाता में हंगामा किया बल्कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर भी हमला बोल दिया. बताते चलें कि इस घटना में भाजपा के 12 कार्यकर्ता घायल हुए तो दो की हालत बेहद क्रिटिकल बनी हुई है. इस सन्दर्भ में पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रभारी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि 'टीएमसी के गुंडों द्वारा योजना बनाकर भाजपा के कार्यालय पर हमला किया गया है.' आखिर इस तरह का कृत्य 'गुंडई' नहीं कही जाएगी तो और क्या नाम दिया जा सकता है? समझा जा सकता है कि ममता बनर्जी की पार्टी बंगाल से कम्युनिस्टों का सफाया करने में सफल हुई हैं, किंतु राजनीतिक रुप से देखा जाए तो राज्य में भाजपा के उभार ने उन्हें काफी चिंतित भी किया है! संभवतः इसी कारण कानून का शासन होने के बावजूद वहां खुलेआम गुंडई की इजाजत दी जा रही है. अगर ऐसा नहीं होता तो हिंसा का रास्ता अपनाने की बजाय कानून के रास्ते चलने पर टीएमसी कार्यकर्ता ज्यादा विश्वास करते! अगर गिरफ्तार आरोपी के समर्थकों को लगता है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है तो देश में हर स्तर पर अदालतें हैं, उन्हें वहां जाने से किसने रोका है भला? गौरतलब है कि सुदीप पर रोज वैली चिटफंड घोटाले में शामिल होने और आर्थिक मदद लेने का संदेह है और इस मामले में सुदीएप 1 सप्ताह के भीतर सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने वाले दुसरे सांसद हैं. यह भी दिलचस्प है कि सम्बंधित आरोप के मामले में पूछताछ के लिए सीबीआई ने सुदीप को तीन बार समन जारी किया था, पर सुदीप कभी संसद-सत्र का तो कभी व्यस्तता का हवाला देकर पेशी की तिथि बढ़वा लेते थे और इस बार भी वह तिथि आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन सीबीआई ने ऐसा करने से मना कर दिया! समझना मुश्किल नहीं है कि कानून का राज हमारे देश में है, बावजूद उसके नेता और प्रभावशाली लोग कानून को ठेंगा दिखाने में जरा भी पीछे नहीं हटते. यहां एक आम आदमी को तो जब चाहे पुलिस थाने में बुलाती है और यदि एक बार में वह आदमी नहीं पहुंचा तो पुलिस उसके साथ क्या सलूक करती है यह हम सभी जानते हैं. किंतु, बात जब एक बड़े घोटाले की और उससे जुड़े आरोपियों की हो रही हो, और सीबीआई जैसी बड़ी संस्था किसी नेता को समन भेजती है तो उस समन को वह अपने ठेंगे पर ही रखता है और एक नहीं, दो भी नहीं, बल्कि तीन-तीन बार बुलाने के बावजूद भी वह उसमें जाना जरूर नहीं समझता है. Corruption, Violence, Riots in West Bengal, Hindi Article, New, Mamta Banerjee, Rose Valley Scam, Malda Violence Analysis, Intellectual, Secular People, CBI Investigation and arresting of Trinmool Congress Leaders

उसके बाद सीबीआई अगर कानून का पालन करती है और आरोपी की गिरफ्तारी करती है तो उसके कार्यकर्ता / समर्थक खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आते हैं और बजाय कि राज्य का पुलिस-प्रशासन गुंडों को सलाखों के पीछे भेजने की जुगत करता, वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर ही समय बर्बाद करता रहता है. देखा जाए तो इन दिनों ममता बनर्जी के भीतर राष्ट्रीय नेतृत्व की चाह कुछ ज्यादा ही तेजी से उभर रही है और वह इस मामले पर शोर-शराब भी कर रही हैं! जिस मुखरता से ममता बनर्जी नोट बंदी पर जनता की परेशानियों का या मोदी सरकार की दूसरी निर्णयों का विरोध करती हैं, उससे उनकी छवि संघर्षशील नेता की तो बनती है, किन्तु उसी सक्रियता से वह अपने कार्यकर्ताओं पर लगाम लगाने की बात जाने भूल क्यों जाती हैं? अभी तो सिर्फ कुछ ही नेता इस घोटाले में फंसे हैं और इस रोजवैली स्कैम में तृणमूल के छह और नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं. इसमें भी दो ऐसे कद्दावर नेता हैं, जिनका कद गिरफ्तार तृणमूल सांसदों  तापस से भी बड़ा है. अगर आरोपियों की गिरफ़्तारी पर ऐसे ही कानून को हाथ में लिया जाता रहा तो समझना मुश्किल नहीं है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में और भी हंगामा और हिंसा होने की सम्भावना भी बढ़ जाएगी. सीबीआई की मानें तो रोज वैली समूह के मालिक गौतम कुंडू के होटल व्यापार को बढ़ाने में सांसद तापस और सुदीप में अहम भूमिका निभाई थी और दोनों नेताओं ने अपनी पद, पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल कर रोज वैली के होटल व्यापार को बढ़ाने में 'मास्टर की' का रोल निभाया था. इतने संगीन आरोपों पर होने वाली गिरफ्तारियों पर अगर ममता बनर्जी कहती हैं कि "बंदोपाध्याय सीनियर नेता हैं, उन्हें इस तरह गिरफ्तार नहीं करना चाहिए,” तो ऐसे में उन्हें यह भी कह देना चाहिए कि भ्रष्टाचार को सरकारी संरक्षण मिलना चाहिए. उनका ट्विटर पर गुस्सा निकालना भी अजीब है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 'ये सब नोटबंदी का विरोध करने की वजह से हो रहा है'. अगर सीबीआई का तर्क सुनें तो उसके अनुसार रोज वैली ने निवेशकों को लगभग 17,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया है. बताते चलें कि सीबीआई ने रोज़ वैली के खिलाफ 2016 की जनवरी में चार्जशीट फाइल की थी, जिसमें कहा गया था कि रोज वैली ने पश्चिम बंगाल के अलावा उड़ीसा, असम, झारखण्ड, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, त्रिपुरा, आन्ध्र प्रदेश में जमकर पैसे लूटे हैं. इस फर्जी कंपनी के 21 रीजनल ऑफिस, 880 ब्रांच और लगभग 20 लाख एजेंट थे. समझा जा सकता है कि सारधा, पर्ल की ही तरह रोज वैली भी एक पोंजी स्कीम वाली चिट फंड कंपनी थी, जिसमें अलग-अलग स्कीम में पैसे लगाने के बदले भारी रकम वापसी का वादा किया जाता था और फिर उस जाल में फंसाकर लोगों को लूटने का कार्य लंबे समय तक चलाया गया. ईडी के अनुसार इससे जुड़े लोगों ने 15,000 करोड़ से ज्यादा पैसे बनाए. बताया तो यहाँ तक जा रहा है कि अनुमानतः सारधा चिट फंड घोटाले से यह घोटाला सात गुना ज्यादा बड़ा है. Corruption, Violence, Riots in West Bengal, Hindi Article, New, Mamta Banerjee, Rose Valley Scam, Malda Violence Analysis, Intellectual, Secular People, CBI Investigation and arresting of Trinmool Congress Leaders
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हमारे देश में किस स्तर तक फर्जीवाड़ा चलता है और अफसर नेताओं के दबाव में किस तरह चुप रहते हैं, इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह घोटाला ही है. सब कुछ सामने आ जाने के बाद अगर आरोपियों की गिरफ्तारी होती है तो इतना हंगामा हो जाता है, ऐसे में समझना मुश्किल नहीं है कि अब तक ये सारे कर्मकांड कैसे बदस्तूर चलते रहे! आखिर, कागज़ पर रोज वैली की 30 कंपनियां थीं, जिनमें रोज़ वैली एयरलाइंस, रोज वैली माइक्रोफाइनेंस, रोज वैली फैशन, रोज वैली कंसल्टेंसी, रोज वैली बेवरेजेज, रोज वैली इंफोटेक, रोज वैली हाउसिंग फाइनेंस, रोज वैली होटल एंड एंटरटेनमेंट इत्यादि प्रमुख थीं. दिलचस्प यह भी है कि इस कंपनी के 2,600 बैंक अकाउंट थे, जिनमें लगभग 800-1000 करोड़ रुपए थे. ऐसी स्थिति में आखिर क्यों न माना जाए कि ममता बनर्जी जान बूझकर भ्रष्टाचार छिपाने के लिए हिंसा की आड़ लेने वाले तृणमूल नेताओं, कार्यकर्ताओं को बचा रही हैं. ऐसा भी नहीं है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस बेजान है, बल्कि पिछले दिनों कुछ पत्रकारों के खिलाफ जिस आनन् फानन में एफआईआर दर्ज कर के प्रेस का मुंह बंद करने की कवायद की गयी, उससे पुलिस की सक्रियता तो जाहिर होती ही है. वैसे भी, ममता बनर्जी के पास आर्मी के रूटीन अभ्यास पर शोर मचाने की फुरसत तो है, किन्तु कुछ गुंडे जो किसी पार्टी के कार्यालय पर हमला करते हैं, उन्हें नियंत्रण में लाने की इच्छाशक्ति लुप्त हो गयी है. इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में पिछले दिनों हुई हिंसक झड़प, जिस पर चुप्पी के लिए बुद्धिजीवी और तथाकथित सेक्युलर मीडिया की खूब आलोचना की गयी, उसके बाद भी ख़ास समुदाय के लोगों ने दूसरों के घरों और दुकानों में आग लगा दी थी और ऐसे में दंगे की स्थिति पश्चिम बंगाल में बन गयी! रोजवैली घोटाले से अलग हटकर देखें तो पिछले साल 12 अक्टूबर को हिंसा की शुरुआत पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना ज़िले से हुई, जहां कथित तौर पर मुहर्रम के जुलूस में बम फेंका गया, जिसके बाद हिंसक भीड़ ने हिंदुओं के घरों को जला दिया और इस हिंसे की आग 5 ज़िलों में फैल गई. दोनों पक्षों के दंगाई आमने-सामने हो गए और पुलिस से भी उलझ गए. ऐसे में प्रश्न तो उठता ही है कि ममता बनर्जी राष्ट्रीय नेता बनने की चाह में कहीं पश्चिम बंगाल के प्रशासन को राम भरोसे तो नहीं छोड़ बैठी हैं? हिंसा, भ्रष्टाचार, दंगे इत्यादि की मानसिकता हमारे देश के लिए हमेशा ही घातक रही है और ममता बनर्जी जैसे नेताओं को यह बात बखूबी समझ आ जानी चाहिए! अगर ऐसा नहीं होता है तो गलत चीजों के संरक्षण को पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के साथ देश का भी दुर्भाग्य माना जाएगा, इस बात में दो राय नहीं!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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