नव वर्ष में पूरा करें संकल्प! Hindi Essay on New Year 2017, Resolution, Good and Bad things, How to be successful, Motivational Hindi Article.


Hindi Essay on New Year 2017, Resolution, Good and Bad things, How to be successful, Motivational Hindi Article.
जीवन में नई चीजों का बेहद महत्व है. अक्सर जब हम बाजार से किसी नयी चीज की खरीदारी करते हैं तो उससे संबंधित कई तरह की भावनाएं भी मन में होती ही हैं. जैसे कोई कपड़ा ही नया हो, तो उस कपड़े को हम किन अवसरों पर धारण करेंगे, कैसे उसका रखरखाव करेंगे इत्यादि! वैसे, यह व्यक्ति-व्यक्ति के ऊपर डिपेंड करता है कि वह किसी भी नई चीज को लेकर किस तरह की भावनाएं संजोए होता है, पर यह निश्चित है कि नई चीजों को लेकर मन में उमंग, उत्साह जन्म लेता है और यही बात जब नव वर्ष की हो जाए, तब यह एहसास बेहद खास हो जाता है. आखिर कौन नहीं जानता है कि नए साल के अवसर पर हम कई तरह की रेजोलुशन लेते हैं. कुछ अपनी बुराइयां छोड़ने का संकल्प लेते हैं तो कुछ अच्छाइयां अपनाने का! पर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अधिकांश मामलों में यह खुमारी सप्ताह भर में ही उतर जाती है. मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूं जो बुरी आदतें छोड़ने का प्रयत्न करते हैं, उसका संकल्प भी लेते हैं, किंतु उनकी यह प्रतिज्ञा चंद दिनों की मेहमान ही होती है और फिर हमेशा की तरह दम तोड़ देती है. अगर बुराइयों पर ही बात की जाए तो मनुष्य स्वभाविक रूप से तमाम तरह की बुराइयों से घिरा होता है और यह बुराइयां उसे जीवन में न केवल ठोस उपलब्धि हासिल करने से रोकती हैं, बल्कि अमूल्य जीवन के एक बड़े हिस्से को यूंही नष्ट कर देती हैं. ऐसे में हमारा अनमोल समय नष्ट हो जाता है, बल्कि यह कहना बेहतर होगा कि समय की बजाए हम खुद ही नष्ट होने की कगार पर आ जाते हैं. पिछले दिनों एक गोष्ठी में जाना हुआ तो वहां टाइम पास पर चर्चा चल रही थी कि कैसे मनुष्य 'टाइम पास' करता है और फिर टाइम उसे ही पास कर देता है. वस्तुतः बुराइयों के साथ जुड़ा हुआ विषय टाइम पास भी है. देखा जाए, तो इन दोनों में बड़ा गहरा संबंध है. यदि हमारे पास कोई भी बुराई है तो हमारा समय व्यर्थ ही व्यतीत होता है! जैसे हमें आलस है, क्रोध है या फिर गप्पे मारने की आदत है, तो हमें विषयों के प्रति ज्यादा आशक्ति आएगी ही और ऐसे में हम अपना समय नष्ट कर रहे होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप समय हमें भी नष्ट कर रहा होता है. सवाल है कि इन बुराइयों से हम निकले कैसे? कैसे हम नए वर्ष के अवसर पर बुराइयों से दूर हो सकते हैं और अपने समय का सदुपयोग कर सकते हैं. इन प्रश्नों का सरल जवाब इस साधारण उक्ति में छुपा हुआ है जिसके अनुसार शुरुआत में सिर्फ दिन का उजाला ही धरती पर रहता था, जबकि रात में अंधकार! Hindi Essay on New Year 2017, Resolution, Good and Bad things, How to be successful, Motivational Hindi Article

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किसी व्यक्ति के मन में अंधकार दूर करने की प्रेरणा जगी, किन्तु उसे सूझ नहीं रहा था कि ऐसा कैसे किया जाए. अचानक उसने जुगनुओं को देखा तो उसे 'दीपक' जलाने का ख्याल आया और फिर रात में भी अन्धकार पर काबू पाया जा सका. ठीक उसी प्रकार बुराइयां भी तभी दूर होंगी, जब अच्छाइयों की एक लौ हम जलाने का यत्न करेंगे! मान लीजिये कि हम में सिगरेट पीने की बुरी लत है, या किसी को टाइम पास करने की लत है तो हम उस समय को यदि किसी सार्थक कार्य में लगाते हैं, तो बहुत उम्मीद है कि हमारी बुराइयां धीरे-धीरे दूर हो जाएंगी और उन की जगह अच्छाइयां ले लेंगी! समय की उपयोगिता पर कई परिभाषाएं हो सकती हैं, पर एक तथ्य है जिस पर तो तमाम विद्वान, शास्त्र एकमत रहे हैं कि समय की उपयोगिता सर्वाधिक तभी होती है जब आप परमार्थ का कार्य करते हैं. गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है "परहित सरिस धर्म नहीं भाई"! ऐसे में अगर आप परमारथ का कार्य करते हैं तो इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आप अपने समय का अधिकतम सदुपयोग कर रहे हैं. यूं तो परमार्थ की भी लंबी चौड़ी परिभाषाएं दी जा सकती हैं, किंतु अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए, अपने लिए निश्चित गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों या सामाजिक जीवन की जिम्मेदारी या फिर विद्यार्थी जीवन के अभ्यासों को निभाते हुए अपनी सोच एवं कर्म को सबके प्रति व्यापक रखना ही व्यवहारिक परमार्थ कहा जा सकता हैं, तो इससे मनुष्य की उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है. तो क्यों ना नए साल में खुद को आगे बढ़ाने के लिए हम अच्छाई का एक दीपक जलाएं, कम से कम एक अच्छी आदत तो अनिवार्य रूप से धारण करें. ऐसे में स्वतः ही एक बुराई कम हो जाएगी. जरूरतमंदों की यथासंभव मदद करना, बुजुर्गों की सेवा करना, उनके साथ समय लगाकर उन्हें समझने का यत्न करना, परिवार के सदस्यों को समय देने के साथ-साथ अपने व्यवहार को विनम्र बनाने जैसे अनेक अच्छे कार्य हैं जिनमें से किसी एक को भी विधिवत अपनाने से हम बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं. जरूरत हैं तो बस अपने संकल्प को पूरा करने की और नए साल की शुरुआत से बेहतर अवसर और क्या हो सकता है भला! कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर होता है, इसी तरह से व्यर्थ व्यतीत किया जाने वाला समय भी हमें बुराइयों की ओर ही धकेलता है. ऐसे में क्यों ना अपने समय को अच्छे कार्यों में लगाने का हम प्रयत्न करें और यह प्रयत्न दृढ़ता से करने पर जल्द ही संकल्प में बदल जायेगा, इस बात में दो राय नहीं! तो आइये अपने नए वर्ष 2017 को हम भी सार्थक बनाएं और ऐसा करने में हमारा संकल्प ही सर्वाधिक सहायक होगा, इस बात में दो राय नहीं! 
नए साल की ढेरों शुभकामनाओं सहित,

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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