टीम लीडर, दूरदर्शी और प्रेरक धोनी जैसा कोई नहीं! Mahendra Singh Dhoni, Hindi Article, New, Great Cricket Captain, Hindi Essay on Indian Cricket, World Cup Champions!



महेंद्र सिंह धोनी क्रिकेट में कितने महान खिलाड़ी रहे हैं, इसका आंकलन क्रिकेट विशेषज्ञ अलग-अलग पैमानों पर करते रहेंगे, किंतु भारतवर्ष जैसे देश में उनकी सफलता ने खेलों के प्रति लोगों की सोच बदल दी है, इस बात में दो राय नहीं! इस बदली 'सोच' के कई पहलू हैं पहले जहां क्रिकेट बड़े शहरों के खिलाड़ियों के लिए एक तरह से आरक्षित हो गया था, वहीं छोटे शहर से आए माही ने इस खेल में न केवल नए कीर्तिमान गढ़ा है, बल्कि अनावश्यक विवादों से दूर रहकर इस खेल के "जेंटलमैन गेम" कहे जाने को सार्थक भी किया है. कप्तानी के तौर पर उनका अद्भुत रिकॉर्ड आप ही काफी कुछ कहता है, तो खेल के साथ-साथ अपने ब्रांड को किस तरह से ऊंचाई पर पहुंचाया जाए, इसके बारे में भी उनसे बेहतर प्रेरणा ली जा सकती है. हमारे देश में कई ऐसे खिलाड़ियों की खबरें आती ही रहती हैं, जिसमें दिखाया जाता है कि खिलाड़ी तो अपने खेल में काफी अच्छा था, किंतु उसके पास आर्थिक तंगी बनी रही, या फिर वह उस तरह की तवज्जो सम्बंधित खेल में नहीं हासिल कर सके, जिसके वह अधिकारी थे! ऐसे तमाम खिलाड़ियों को महेंद्र सिंह धोनी की तरफ अवश्य ही देखना चाहिए. वस्तुतः मनुष्य जीवन में आप किसी एक सेक्टर में बहुत सफल हो जाए तो भी समाज आपको तब तक सफल नहीं स्वीकार करता है, जब तक अपने काम के साथ-साथ व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलता भी आप अर्जित नहीं करते हैं. व्यावसायिक सफलता के बाद ही आप की कहानी दुनिया सुनती है और उसे पूरा मानती है! बेशक खेल की दुनिया में हमारा देश आगे कदम बढ़ा रहा है, किंतु विवादों से दूर रहकर, गुटबाजी से दूर रहकर, व्यर्थ की बुराइयों (नशा, मारपीट इत्यादि) से बचकर अपने ब्रांड को कैसे मैनेज किया जाना चाहिए, इस फील्ड में धोनी ने हर क्षेत्र के खिलाड़ियों को राह दिखलाने का कार्य किया है. आप उनके खेल के रिकार्ड्स के साथ उनका ब्रांड प्रबंधन देख लीजिये, उसमें भी वह मास्टर साबित हुए हैं. जून 2015 में फोर्ब्स मैगजीन की सूची के अनुसार, दुनिया के सबसे अमीर 100 खिलाडिय़ों की सूची में शामिल अकेले भारतीय धोनी ही थे! जिस सूची में अमरीकी मुक्केबाज फ्लायड मेवेदर गोल्फर टाइगर वुड्स, टेनिस स्टार रोजर फेडरर और फुटबालर रोनाल्डो जैसे खिलाड़ी शामिल हों, उसमें धोनी का 23वें स्थान पर काबिज़ रहना उनकी सफलता की कहानी समग्रता से बयान करता है. Mahendra Singh Dhoni, Hindi Article, New, Great Cricket Captain, Hindi Essay on Indian Cricket, World Cup Champions

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वह खिलाड़ी जो थोड़ी से शोहरत, दौलत मिलते ही बहक जाते हैं उन जैसों को महेंद्र सिंह धोनी के जीवन से सीख लेनी चाहिए, जो दौलत-शोहरत की बुलंदी पर होने के बावजूद अपने पैर ज़मीन पर टिकाये रहे! पिछले साल ही महेंद्र सिंह धोनी की जिंदगी पर बनी मूवी 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' आई, जिसमें बखूबी दिखलाया गया था कि उनकी जिंदगी शुरुआत से ही इतनी चमक भरी नहीं थी, बल्कि उसके लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया तो किस तरह एक मध्यम वर्ग परिवार का लड़का नौकरी और रोजी-रोजगार के चक्करों में उलझकर अपने सपनों से भटक जाता है, किन्तु अगर उसमें लगन हो तो किस तरह वह वापसी भी कर सकता है, यह धोनी की बायोपिक में साफ़ दर्शाया गया है. इंसान अगर चाह ले तो, किसी भी हालात में विजय पा सकता है और इसका जीवंत उदाहरण महेंद्र सिंह धोनी ही रहे हैं! तमाम खिलाड़ी आएंगे, तमाम जाएंगे पर क्रिकेट के तमाम फोर्मेट्स में धोनी ने इंडियन क्रिकेट टीम को निर्विवाद रुप से शीर्ष पर लंबे समय तक जिस प्रकार बनाए रखा है, वह आने वाले क्रिकेट खिलाड़ियों और कप्तानों को लंबे समय तक चुनौती देती रहेगी! उनकी सफलता की कहानी कुछ ऐसी है कि अब उन के बाद वनडे और टी-20 में कप्तानी लेने वाले विराट कोहली को भी लोग उन्हीं के बनाए पैमानों पर तौलेंगे और आने वाले वर्ल्ड कप में भी इन अपेक्षाओं से कोहली पर ख़ासा दबाव रहेगा, इस बात में दो राय नहीं! हालांकि, विराट कोहली बेहद प्रतिभावान खिलाड़ी हैं और वह लगातार अच्छा परफॉर्म भी कर रहे हैं, पर धोनी के जितनी सफलता हासिल करने में, खासकर एक टीम लीडर के रूप में उन्हें लंबा सफर तय करना पड़ेगा, इसमें संशय नहीं होना चाहिए. अच्छी बात यह है कि कप्तानी छोड़ने के बाद 2019 का विश्व कप कोहली की कैप्टनशिप में खेलने की इच्छा माही ने व्यक्त की है और इसके पीछे शायद उनकी यही सोच रही होगी कि वर्ल्ड कप के लिए नए कप्तान को तैयारी का भरपूर समय मिले तो माही ने अपने विस्तृत अनुभव को भी नए कैप्टन के प्लान के हिसाब से उपलब्ध रखने का विकल्प खुला छोड़ दिया है! ऐसे में, धोनी की तारीफ में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्होंने भारतीय वर्णाश्रम के 'गृहस्थ और वानप्रस्थ' आश्रम को सार्थक रूप में पालन किया है. अगर खेल को उनका गृहस्थ आश्रम मान लिया जाए, तो जैसे-जैसे उनके खेल में ढलान आने लगी वैसे-वैसे उन्होंने वानप्रस्थ की ओर जाना शुरु कर दिया है, किंतु नया नेतृत्व तैयार करके! नए, अनुशासित और ऊर्जावान क्रिकेट खिलाड़ियों की जिस तरह खेप आ रही है, उसमें माही का योगदान अनदेखा करना असंभव है! यह वही भारतीय टीम है, जिसमें माही और गांगुली से पहले रोज कोई न कोई विवाद होता था, तो तब गुटबाजी की खबरें भी कुछ कम न आती थीं! Mahendra Singh Dhoni, Hindi Article, New, Great Cricket Captain, Hindi Essay on Indian Cricket, World Cup Champions


यहाँ तक कि कई खिलाड़ियों पर टीम की जरूरतों के हिसाब से न खेलने का आरोप भी लग जाता था. खैर, सौरव गांगुली ने भारतीय टीम को एक इकाई के रूप में संगठित किया तो माही ने हर मायने में टीम को बेहतरीन बनाया और एक से बढ़कर एक नए खिलाड़ियों पर भरोसा करके उन्हें निखारा भी! टीम पर भरोसा किस कदर माही करते हैं, इसके लिए अगर कुछ वाकयों का ज़िक्र करें तो आप याद करें, जब 2007 वर्ल्ड टी-20 के फ़ाइनल में महेंद्र सिंह धोनी ने हरभजन सिंह की बजाय जोगिंदर शर्मा से आख़िरी ओवर कराया था. इसी तरह, इसी वर्ल्ड टी-20 कप के लीग राउंड में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत का मैच टाई हुआ था और मैच का फ़ैसला बॉल आउट के जरिए होना था. यहाँ, पाकिस्तान ने रेगुलर गेंदबाज़ों को चुना जबकि धोनी ने हरभजन सिंह के अलावा वीरेंद्र सहवाग और रॉबिन उथप्पा जैसे पार्ट टाइम गेंदबाज़़ों पर दांव खेला और मैच जीता. इसी तरह, बाद में युवराज सिंह के पिता ने धोनी पर कई आरोप लगाए, किन्तु युवराज पर धोनी ने महत्वपूर्ण समय में दांव खेला. स्पेशलिस्ट बल्लेबाज होने के बावजूद, धोनी ने 2011 वर्ल्ड कप में युवराज को रेगुलर गेंदबाज़ की तरह इस्तेमाल किया और इस दांव से विरोधियों को घेरने में कामयाब रहे. धोनी के भरोसे से युवराज ने 9 मैचों में 75 ओवर डाले और 15 विकेट लिए, तो उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल, सेमीफाइऩल और फ़ाइनल में दो-दो विकेट हासिल किए. इसी तरह, 2011 वर्ल्ड कप में धोनी ने सुरेश रैना और आर अश्विन को शुरुआती मैचों में 'छुपाए' रखा और नॉकआउट दौर में 'सरप्राइज़ पैकेज' की तरह इस्तेमाल किया, जिनका ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल और पाकिस्तान के खिलाफ सेमी फ़ाइनल में टीम इंडिया को भरपूर फायदा मिला! अपनी टीम पर भरोसा करने की धोनी की कहानी अनंत है और वह 'पारस पत्थर' की तरह, युवा खिलाड़ियों को निखारने में अपनी ऊर्जा लगातार लगाते रहे थे! कम सफल या तात्कालिक रूप से सफल न होने वाले खिलाड़ियों पर भी धोनी ने लगातार भरोसा दिखलाया. उदाहरण दें तो, 2011 वर्ल्ड कप के शुरुआती मैचों में तेज़ गेंदबाज़ आशीष नेहरा प्रभावी साबित नहीं हुए, लेकिन पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में धोनी ने उन्हें मौका दिया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी नेहरा सफल साबित हुए थे. एक-एक रन बचाने के प्रति धोनी कितने सजग थे, यह इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऑस्ट्रेलिया में 2008 में हुई ट्राई सीरीज के लिए धोनी ने चयनकर्ताओं के सामने मांग रखी थी कि वो युवा टीम चुनें. Mahendra Singh Dhoni, Hindi Article, New, Great Cricket Captain, Hindi Essay on Indian Cricket, World Cup Champions

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तर्क था कि ऑस्ट्रेलिया के बड़े मैदानों में उम्रदराज खिलाड़ी रन रोकने में नाकाम रहेंगे. ऐसे में धोनी की आलोचना तो ख़ूब हुई, लेकिन इस फ़ैसले के दम पर वो भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया में पहली बार ट्राई सीरीज़ ट्रॉफ़ी जिता पाए. और भी कई कहानियां हैं, जिसके लिए एक लेख शायद पर्याप्त न हो, बल्कि एक किताब ही धोनी के कारनामों और योगदानों के साथ इन्साफ कर पायेगी. पर इतना तो कहा ही जा सकता है कि धोनी आप हमेशा 'महान' कैप्टन रहोगे! क्रिकेट खिलाड़ी मोहम्मद कैफ़ धोनी की रिटायरमेंट पर ट्वीट करते हैं कि, "आपने 9 साल तक टीम का नेतृत्व किया और बढ़िया नतीजे दिए. भारत आपको कप्तान के रूप में पाकर ख़ुश है." इसी तरह बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने लिखा, "धोनी आप भारतीय क्रिकेट के बेहतरीन कप्तानों में से एक हैं. आपने टीम को नई उंचाईयों तक पहुंचाया और आप देश में कइयों के लिए प्रेरणा बने." महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर तो दो कदम और आगे बढ़ गए और कहा कि ‘‘अगर उन्होंने एक खिलाड़ी के तौर पर भी संन्यास ले लिया होता तो फिर उनकी वापसी के लिये उनके घर के आगे धरने पर बैठने वाला मैं पहला व्यक्ति होता. एक खिलाड़ी के रूप में वह अब भी विस्फोटक है. वह एक ओवर में मैच का पासा पलट देता है. भारत को एक खिलाड़ी के रूप में उनकी सख्त जरूरत है. मुझे खुशी है कि उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में बने रहने का फैसला किया.’’ साफ़ है कि धोनी की महत्ता में आज भी किसी को शक ओ सुबहा नहीं है. धोनी की रिटायरमेंट पर थोड़ा व्यवहारिक नजरिया अपनाएं तो उन्होंने काबिल उत्तराधिकारी यानी विराट कोहली को सही समय पर नेतृत्व सौंपा है. आखिर उत्तराधिकारी चुनने का जिम्मा भी एक सफल लीडर का दायित्व होता है और अगर भारतीय क्रिकेट सफलता की राह में लगातार आगे बढ़ रही है तो इसमें महेंद्र सिंह धोनी का योगदान अप्रतिम है. खुद विराट कोहली ने धोनी की कप्तानी में लंबे समय तक बल्ला चलाया है और उनकी कैप्टनशिप की रणनीतियों से अपनी समझ विकसित की है! हालांकि पिछले दिनों विराट कोहली और धोनी के बीच अनबन की खबरें मीडिया में फैलाई गयीं, किंतु दोनों ही खिलाड़ियों ने समझदारी का परिचय देते हुए भारतीय क्रिकेट को ऊंचाइयों पर पहुंचाने का कार्य ही किया और हालिया समय में भी उम्मीद यही है कि यह कारवां आगे बढ़ता रहेगा, बिना किसी विवाद के, वगैर गुटबाजी के, आवश्यक अनुशासन के साथ!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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