अमेरिकी चुनाव में रूसी हैकिंग की डरावनी चर्चा एवं भारतीय चुनाव! Russia Hacking, US Election, Hindi Article, New, Elections in India, Cyber Security



2016 में विश्व भर की सर्वाधिक चर्चित घटनाओं में अमेरिकी चुनाव प्रमुखता से शामिल रहा. लगभग पूरे साल इससे जुड़ी अपडेट पर आम ओ ख़ास की नज़र बनी रही और लोगों की उत्सुकता तब समाप्त हुई, जब डोनॉल्ड ट्रम्प के चुनाव जीतने की घोषणा कर दी गयी. भौंचक विश्लेषकों, लेखकों ने ट्रम्प की जीत को दुनिया भर में दक्षिणपंथी राजनीति के उभार की बातें कही तो इसका एक बड़ा कारण इस्लामिक आतंकवाद को भी माना गया. समझना मुश्किल नहीं है कि अमेरिका में चुनाव पूर्व डेमोक्रेटिक प्रेजिडेंट बराक ओबामा की लोकप्रियता, जो सर्वेक्षणों में प्रमाणित हो चुकी थी, उस के बावजूद, अपनी पार्टी के ही कई रिपब्लिकन्स नेताओं में अलोकप्रिय डोनाल्ड ट्रंप का जीतना कई लोग पचा नहीं पाए. इस सन्दर्भ में तरह तरह के बयान आते रहे, हालांकि ट्रंप की चुनावी प्रतिद्वंदी हिलेरी क्लिंटन ने एक अपील में जरूर कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए और उन्हें काम करने का मौका जरूर देना चाहिए. खैर, अमेरिका में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू भी हो गई, किंतु इस बीच जो आरोप उछला वह न केवल गंभीर है, बल्कि तमाम देशों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में खतरनाक हस्तक्षेप की ओर इशारा भी करता है. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं रूस की, जिस पर अमेरिकी चुनाव में साइबर हमले द्वारा प्रभाव डालने की बात कही गयी है. वैसे अभी तक यह कोरी बात ही है, और डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव में जीत दिलाने के लिए जिस साइबर हैकिंग की बात कही जा रही है, उसका कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है. पर चूंकि, यह बात विश्व का सबसे ताकतवर संस्थान यानी व्हाइटहाउस आधिकारिक रुप से कह रहा है, इसलिए इसे सीधे-सीधे खारिज भी नहीं किया जा सकता. Russia Hacking, US Election, Hindi Article, New, Elections in India, Cyber Security
पहले यह बातें आरोप प्रत्यारोप की तरह सामने आया, जिसे चुनावी बयानबाजी भर माना गया, किंतु अब व्हाइट हाउस ने सीधे-सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हैकिंग ऑपरेशन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधे निशाने पर लिया है. बराक ओबामा के ऑफिशियल सलाहकार बेन रोड्स के हवाले से कहा गया है कि पुतिन का शिकंजा रुसी सरकार पर मजबूत है और यह बात बिल्कुल साफ तौर पर दिख रही है कि हैकिंग की खबर पुतिन को भी थी. जाहिर तौर पर रूस में कामकाज का अपना एक 'खास' तरीका है और इस तरीके में सरकार के टॉप लेवल पर पुतिन ही हैं, शायद इसीलिए उनको सीधे-सीधे निशाने पर लिया गया है. पर बेहतर होता कि व्हाइट हाउस इस मामले में सुबूत भी जारी करता! आखिर रूस और अमेरिका के बीच प्रतिद्वंदिता से शेष विश्व भी प्रभावित होता रहा है और आगे भी इन ताकतवर मुल्कों से लोग प्रभावित होंगे ही होंगे, इसलिए इस मामले में 'सुबूत' जिम्मेदारी से पेश किए जाने चाहिए, अन्यथा पूरा मामला हवा-हवाई ही प्रतीत होगा जैसा कि कई विश्लेषणों में कहा जा रहा है और रूस की ओर से भी इन आरोपों को हंसी में उड़ाने की ही कोशिश हुई है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने अमेरिकी चुनाव में रूस के हैकिंग की खबरों को 'बकवास कॉमेडी' बता डाला है, तो कई हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अपनी हार के कारणों को पचा नहीं पा रही है, इसलिए जानबूझकर फर्जी खबरों को फैलाया जा रहा है! Russia Hacking, US Election, Hindi Article, New, Elections in India, Cyber Security, हिंदी लेख
खैर, इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप से परे हटकर एनालिसिस की दृष्टि से देखते हैं, तो ठीक अमेरिकी चुनाव के पहले हिलेरी क्लिंटन को 'ईमेल लीकेज प्रकरण' के कारण दिक्कतों का सामना जरूर करना पड़ा था और संभवतः इसी आधार पर ट्रंप को मदद मिलने की बात भी कही जा रही है. इसके अतिरिक्त, अमेरिका के प्रेजिडेंट इलेक्ट डोनॉल्ड ट्रम्प पर रूस के प्रति परंपरागत अमेरिकी पालिसी के विपरीत नजरिया रखने का आरोप भी लगता रहा है. पर क्या वाकई इतने भर से किसी देश पर संगीन आरोप लगाया जा सकता है, यह भी बड़ा सवाल है? मामला किस कदर गंभीर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तक ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान साइबर हमले शुरू करने वाले रूस की खिलाफ अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है. साथ ही अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति ने रूसी हैकिंग हमलों की जांच के आदेश भी दे दिए हैं और इस मामले में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. रिपोर्ट चाहे जो आये, पर इस पूरे मामले में लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने जाने वाली सरकारों को जिताने हराने में विदेशी हस्तक्षेप की पोल जरूर खुली है, कुछ हद तक ही सही! समझना मुश्किल नहीं है कि जब अमेरिका जैसा संपन्न और शक्तिशाली राष्ट्र इस तरह की बातों से प्रभावित हो सकता है, तो बाकी छोटे बड़े देशों की चुनाव प्रक्रियाओं में हैकिंग/ हस्तक्षेप की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है. संभवतः इसीलिए अमेरिका में लग रहे ऐसे आरोपों को लेकर तमाम यूरोपीय देश ऑफिशियल रूप से चिंतित हो गए हैं. Russia Hacking, US Election, Hindi Article, New, Elections in India, Cyber Security, Hindi Essays, Current Affairs Articles

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फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में 2017 में चुनाव होने हैं, तो इसी संबंध में जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी है कि चुनाव के दौरान रूसी हैकर साइबर हमला कर सकते हैं. जर्मनी की खुफिया सर्विस ने भी इस मामले में आगाह किया है, तो ब्रिटेन में भी पिछले हफ्ते एमआई6 खुफिया चीफ द्वारा इलेक्शन के दौरान साइबर अटैक की चेतावनी दी थी और इसे पश्चिमी देशों के लोकतंत्र के लिए खतरा भी बताया था. निश्चित रूप से इस मामले में भारत भी अछूता नहीं है और यहां भी जब तब चुनाव में धांधली की बातें कही जाती रहती हैं, क्योंकि अब वोटिंग इलेक्ट्रॉनिक मशीन द्वारा हो रही है, तो उसमें गड़बड़ियों के बारे में पूर्व में उठी छिटपुट बातों पर पुनः संज्ञान लिया जाना आवश्यक हो गया है. 2017 में हमारे देश के पांच राज्यों में चुनाव होने हैं तो बहुत लाजमी है कि चुनाव आयोग इस पूरे 'रूस-अमेरिका हैकिंग प्रकरण' को निगाह में रखेगा और विदेशी हस्तक्षेप से अपने चुनाव को मुक्त रखने का ठोस उपाय करेगा. चूंकि, वैश्वीकरण के दौर में आज अनेक देशों का दूसरे देशों में डायरेक्ट/ इनडाइरेक्ट हित छुपा हुआ है. Russia Hacking, US Election, Hindi Article, New, Elections in India, Cyber Security, Editorial Articles from India, World Politics
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भारत में भी कई ताकतवर एवं तकनीक संपन्न देशों के सीधे या अप्रत्यक्ष हित छुपे हुए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना अनिवार्य हो गया है. कई देशों की कंपनियां किसी खास राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवार से कंफर्ट महसूस करती है, तो दूसरे से उनका तालमेल ठीक नहीं रहता है. ऐसे में अगर कोई 'खास देश' या 'खास हैकिंग ग्रुप' किसी खास पार्टी के उम्मीदवार को लेकर साइबर हमले जैसे फार्मूले अपनाता है, तो मामला बेहद संगीन हो सकता है. जैसा कि ट्रम्प-हिलेरी मुकाबले से हम सीख ले सकते हैं कि हमारे यहाँ भी 'हैकर्स' चुनाव प्रचार में किसी उम्मीदवार की मदद कर सकता है, या उससे जुड़े विवादों को हवा दे सकता है. आज चुनाव सोशल मीडिया के द्वारा भी बड़े स्तर पर प्रभावित हो रहे हैं तो ऐसे में मामला और भी गंभीर हो जाता है. इस पूरे मामले में यह समझना आवश्यक है कि लोकतंत्र की रीढ़ चुनावी प्रक्रिया ही है और अगर इन्हें निष्पक्ष रखने में हम सफल नहीं हो पाए तो फिर कई सारी प्रक्रियाएं दूषित हो जाएंगी जो अंततः लोकतंत्र के लिहाज से न केवल अनुचित होगा, वरन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन भी होगा!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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