भारत, बांग्लादेश के सम्बन्ध मजबूती की ओर! India Bangladesh relations, Hindi Article, Mithilesh

बांग्लादेश के जन्म के समय से ही भारत का रिश्ता इस देश के साथ ख़ास रहा है. वस्तुतः इंदिरा गांधी ने जिस प्रकार बांग्लादेश को तत्कालीन पश्चिमी पाकिस्तान के अत्याचारों से मुक्त कराया तो एक तरह से यह रिश्ता स्वाभाविक ही था. चूंकि चीन, पाकिस्तान और नेपाल के मिलकर भारत को कमजोर करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है, ऐसे में भारत का बांग्लादेश के साथ रिश्ता मजबूत होना, काफी हद तक भारत के साथ-साथ बांग्लादेश और क्षेत्रीय संतुलन को और मजबूती प्रदान करेगा. वर्तमान में इन दोनों महत्वपूर्ण देशों के बीच रिश्ता एक नए मुकाम तक पहुँचता नज़र आ रहा है. भारत और बांग्लादेश के बीच हुए "परमाणु समझौते" को दक्षिण एशिया की राजनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है तो ऊर्जा के क्षेत्र में भी यह समझौता फायदेमंद है. एक्सपर्ट्स के अनुसार यह समझौता राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है. हालाँकि, इस समझौते की नींव बहुत पहले रखी गई थी, किन्तु यह फलीभूत अब हो रहा है तो जाहिर है इसकी क्रेडिट वर्तमान केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वाधिक जाएगी. भारत के विदेश मंत्रालय और बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीकी विभाग के बीच हुए इस समझौते का फायदा यह होगा कि पहला परमाणु ऊर्जा प्लांट स्थापित करने में बांग्लादेश को काफी सहूलियत मिल जाएगी और साथ ही साथ भारत के सहयोग से 100 मेगावाट के पावर ट्रांसमिशन लाइन की क्षमता 500 मेगावाट तक हो जाएगी. 

पलटाना के इस परमाणु ऊर्जा प्लांट की दूसरी यूनिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना ने  किया था, जिसका महत्त्व आने वाले समय में और भी बढ़ेगा तो भारत बांग्लादेश के सम्बन्ध इतिहास से भी आगे बढ़कर मजबूती की ओर कदम बढ़ाएंगे. बांग्लादेश के पावर प्लांट को खड़ा करने में तकनीकी मदद करने के लिए भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनियों  रिलायंस, शपूरजी पलोनजी और अडानी के साथ सरकारी कंपनी भेल ने भी हिस्सा लिया था. इस समझौते में बांग्लादेश को एलपीजी और एलएनजी देने का मुख्य मकसद भी जुड़ा है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए नए ट्रांसपोर्ट मार्ग का खुलना, जो बांग्लादेश से होकर जायेगा, उसकी योजना भी साधी गयी है. हाल ही में पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी बांग्लादेश की यात्रा की थी और भारत की तरफ से कई घोषणाएं हुई थीं. उन्होंने बांग्लादेश को पश्चिम बंगाल से डीजल भेजने का वादा किया, तो पानी और ट्रांसपोर्ट के सहित और कई मुद्दों पर समझौता किया गया है. जब भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों में बांग्लादेश के रास्ते एलपीजी और एलएनजी का ट्रांसपोर्ट कर सकेगा, तब इन सम्बन्धों में और भी मजबूती नज़र आएगी, इस बात में दो राय नहीं! इससे उत्तर भारत के राज्यों और मेनलेंड इंडिया के बीच दूरी भी कम हो जाएगी. ऐसा नहीं है कि भारत और बांग्लादेश के सम्बन्ध सिर्फ व्यापारिक ही हैं, बल्कि जब कुछ दिनों पहले बांग्लादेश ने 1971 में वार क्राईम के लिए एक मुस्लिम कट्टरपंथ नेता को फांसी पर लटकाया तो पाकिस्तान और जॉर्डन ने अपने राजदूत वापस बुला लिए, लेकिन भारत बांग्लादेश के पीछे मजबूती से खड़ा रहा. 

जाहिर है, दोनों देशों के बीच कूटनीति का रोल कहीं ज्यादा अहम है. इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच ब्रॉडबैंड नेटवर्क सेवा की भी शुरुआत हुई है. पिछले दिनों, भारत के प्रधानमंत्री और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये, वहां के कॉक्स बाजार से अगरतला के बिच 10 GBPS की क्षमता वाले इस ब्रॉडबैंड का उदघाटन किया था. यह समय दोनों देशो के लिए गर्व का पल था तो, कुछ लोगों ने इसे ऐतिहासिक पल भी करार दिया. बिजली के साथ इंटरनेट गेटवे को भी महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने तब कहा कि आज बिजली भारत से बांग्लादेश जा रही है. जाहिर है, इससे पहले पश्चिम और दक्षिण दिशा को इंटरनेट से जोड़ने के बाद, बांग्लादेश में शुरू हुए ब्रॉडबैंड नेटवर्क को पूरब दिशा से जोड़ने की भारत के प्रधानमंत्री की चाहत भी पूरी हो गई, जिसका ज़िक्र वह पहले भी करते रहे थे.  भारत के पूर्वी राज्य जो अष्ट लक्ष्मी के नाम से जाने जाते हैं, उनके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण है. इसी कड़ी में, बिजली के लिए त्रिपुरा को बंगलादेश के कोमिला से जोड़ने के लिए 47 किलोमीटर की संचार लाइन बिछाने की भी घोषणा हुई है, जिसके लिए शेख हसीना ने प्रधानमंत्री के साथ माणिक सरकार की भी तारीफ की है. विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच 'लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट' के सफल होने के बाद समुद्री मामलों के सुलझने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि, ये तो एक छोटी सी झलक है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच कई सारे समझौते हो रहे हैं, जिनका प्रारूप और प्रभाव आने वाले समय में और भी बेहतर ढंग से नज़र आएगा. न केवल आर्थिक, सामाजिक बल्कि कूटनीति के स्तर पर भी दोनों देशों के बीच मजबूती का असर व्यापक होगा, इस बात में दो राय नहीं!

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