जो 'जम्मू-कश्मीर' हमारा है, वो सारे का सारा है ... Jammu Kashmir is an integral part of India, Hindi Article, New, Indian Parliament Resolution, Pakistan, Economy, Terrorism



अखंड भारत दिवस का कार्यक्रम यूं तो देश भर में मनाये जाते हैं, पर पिछले दिनों मेरे पास एक इनविटेशन-कार्ड आया, जिस पर यही लिखा था जो इस लेख की हेडिंग है. जम्मू कश्मीर पीपल्स फोरम नामक संगठन ने अपने कार्यक्रम की जो हेडिंग बनाई है, उस पर सहमति जताते हुए आज भारत की संसद ने एक बार फिर उस पर मुहर लगा दी है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए 12 अगस्त को साफ़-साफ़ कहा कि 'पाकिस्तान के कब्ज़े वाला कश्मीर' भी जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा (Jammu Kashmir is an integral part of India, Hindi Article) है, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में यह भी कहा कि ''राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है. हालाँकि, अपने कथन में पीएम ने यह भी जोड़ा कि हमें जम्मू-कश्मीर के लोगों का भरोसा भी जीतना होगा.'' जहाँ तक जम्मू कश्मीर के भरोसा जीतने की बात है उसका प्रयास भारतीय खेमे से हमेशा ही होती रही है, जिसका प्रयास अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी समेत तमाम प्रधानमंत्रियों ने बखूबी किया है. सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कश्मीर की हाल की घटनाओं पर 'हर भारतीय की तरह' उन्हें भी 'गहरा दर्द' है, तो इस बैठक में उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता भी जताई कि कश्मीर मुद्दे पर तमाम राजनीतिक दलों ने एक स्वर में अपनी बात कही है. 


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साफ़ है कि इस बैठक के प्रस्तावों को न केवल पाकिस्तान, बल्कि समूचा विश्व देख रहा होगा. यूं भी जिस तरह पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के हिस्सों पर अवैध कब्ज़ा किया हुआ है, उस हिस्से में उसके भीषण अत्याचारों से वहां के लोग पहले ही परेशान हैं. पाकिस्तान और आतंक के मिले जुले रूप पर समूचे विश्व ने मुहर लगा दी है, लेकिन पाकिस्तान है कि मानता नहीं! इस सन्दर्भ में, भारत प्रशासित कश्मीर में जारी कर्फ्यू, हिंसा और मौत पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए लोकसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जो बिल्कुल समयानुकूल (Jammu Kashmir is an integral part of India, Hindi Article) है. लोकसभा में सर्वसम्मति से ये विचार व्यक्त किया गया कि भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता है. जाहिर है, संसद इस सम्बन्ध में पहले ही सजग और एकमत है और अगर यह सब जानने के बावजूद भी अगर पाकिस्तान अपनी हरकतें जारी रखता है तो निश्चित रूप से खुद उसके कई टुकड़े हो सकते हैं और पाकिस्तानी सेना और आतंक समर्थित सरकार वहां के निवासियों को गहरे खतरे में डाल सकती है. आज ही किसी अख़बार में एक रिपोर्ट छपी थी कि कश्मीर में आग लगाने के चक्कर में खुद पाकिस्तान रसातल में जा रहा है. 


इसके लिए 'पाकिस्तान में आतंकवाद का आर्थिक विकास पर प्रभाव’ नाम से छपे शोध-पत्र में बताया गया है कि किस तरह आतंकवाद पाकिस्तान को घुन की तरह खा रहा है. पर, पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना आम आदमी की खुशहाली की बलि चढ़ाकर आतंकवाद को प्रश्रय देने से बाज नहीं आ रही है. इस रिपोर्ट के आंकड़े आतंकवाद को प्रश्रय देने के साथ-साथ पाकिस्तान की बढ़ती बदहाली (Jammu Kashmir is an integral part of India, Hindi Article, Pakistan is destroyed but..) की कहानी खुले तौर पर बयां करते हैं, जिसमें बताया गया है कि 1990 में एक पाकिस्तानी की खरीदने की क्षमता के आधार पर सालाना औसत आमदनी 3000 डॉलर थी, जबकि उस वक्त भारत की प्रति व्यक्ति सालाना आय केवल 1850 डॉलर ही थी. लेकिन, इसके बाद पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने में इस कदर मशगूल हुआ कि उसकी अर्थव्यवस्था ही चौपट हो गई है और ताजा हालात यह है कि जहां खरीद क्षमता के आधार पर भारत की प्रति व्यक्ति आय 5630 डॉलर सालाना हो गई है, वहीं पाकिस्तान 5090 डॉलर सालाना पर पीछे छूट गया है. 

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इसी तरह गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों का मामला भी है. 1990 में पाकिस्तान की केवल 17 फीसद आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करती थी, जबकि इस समय पाकिस्तान की 45 फीसद से अधिक आबादी गरीबी रेखा के नीचे है. साफ़ जाहिर है कि पाकिस्तान आतंकवाद (Jammu Kashmir is an integral part of India, Hindi Article, Terrorist Country Pakistan) और कश्मीर पर अपने अवैध दावे के चलते खुद को बदहाल देशों की श्रेणी में धकेल चुका है, जिसके आने वाले दिनों में और भी गंभीर परिणाम होंगे ही होंगे! जहाँ तक बात भारतीय पक्ष की है तो यहाँ बच्चों, महिलाओं, युवाओं और समस्त बूढ़ों का एक ही नारा है, जिस पर भारतीय संसद की स्थाई मुहर भी लग चुकी है. वह नारा है-
जो 'जम्मू-कश्मीर' हमारा है, वो सारे का सारा है ...




- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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