मल्लिका-ए-विवाद 'शोभा डे' का रियो-ट्वीट! Shobha de olympics tweet, Controversy Queen, Writer, Hindi Article, New, Gopinath Munde, Modi Past tweet



ओलिंपिक में प्रतिभागी सिर्फ खेलने ही नहीं जाते हैं, बल्कि अपने जीवन का सपना सच करने के साथ-साथ अपने देश की इज्जत और मर्यादा का मान बढ़ाने का भी जी-जान से प्रयास करते हैं. इस समय तो रियो ओलंपिक का नशा पूरी दुनिया के तमाम खिलाडियों पर छाया हुआ है. विश्व स्तरीय खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा करते हुए भारत के खिलाड़ी भी जी-जान लगा रहे हैं, किन्तु इसमें एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हैं और संयोगवश भारत ने ओलंपिक शुरू होने के शुरूआती दिनों में पदक हासिल करने में सफलता प्राप्त नहीं की है. जाहिर तौर पर देशवासी इससे थोड़ा निराश होंगे, किन्तु एक मुर्ख से मुर्ख व्यक्ति भी समझ सकता है कि ओलंपिक खेलों में होने वाली प्रतियोगिता कोई गली का क्रिकेट नहीं है और इसलिए पदकों की दौड़ काफी कठिन होती है. लेकिन विवादित बयान देकर नाम कमाने वाले शोभा डे (Shobha de olympics tweet, Controversy Queen, Writer, Hindi Article) जैसे कुछ लोग 'इत्तू' सी बात भी नहीं समझ पाते हैं. अपने देश के खिलाड़ियों के प्रदर्शन से निराश होना एक बात है, किन्तु ओलंपिक खिलाड़ियों के ऊपर जिस घटिया स्तर का ट्वीट उन्होंने किया वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय होने के साथ-साथ खिलाड़ियों का उत्साह घटाने वाला भी है. आखिर इस प्रकार के कितने 'बेतुके' लोगों को पता कि इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, इनको तो बस मुंह खोलना है और कुछ भी बोल देना है. 

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जब आप किसी क्षेत्र की जानकारी नही रखते हैं, तो बेहद जरुरी है कि उसके बारे में आप अपनी राय रखते समय सावधानी बरतें! पर नहीं, विवाद-ए-मल्लिका को कौन समझाए भला! भारतीय खिलाड़ियों को बेवजह निशाना बनाते हुए शोभा डे ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर 'रियो जाने वाले खिलाड़ियों की तुलना 'टाइमपास' से कर दी. शोभा ने ट्वीट किया कि "रियो जाओ, सेल्फ़ी लो, ख़ाली हाथ वापस आओ. किस तरह की गई पैसों और अवसर की बरबादी." आपको तो एकबारगी यकीन ही नहीं होगा कि यह शोभा डे जैसी तथाकथित लेखिका का ट्वीट है, बल्कि आप इसकी भाषा और हल्केपन से यह सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि कहीं यह ट्वीट किसी सड़कछाप (Shobha de olympics tweet, Sports Hindi Article) व्यक्ति का तो नहीं है! हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी उन्हें लताड़ ही मिली. भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा ने उनको जबाब देते हुए कहा कि 'यह उचित नही हैं. आपको अपने एथलीट्स पर गर्व होना चाहिए, जो वैश्विक प्रतियोगिता में मानव-श्रेष्ठ का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं. सिर्फ बिंद्रा ही नहीं, बल्कि हर कोई भारतीय खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाते हुए शोभा डे की आलोचना ही कर रहा था. कई लोगों ने जवाबी ट्वीट कर यहाँ तक कह दिया कि "यदि कोई कुछ जाने और समझे बिना कुछ बोलता हैं तो वह शोभा डे के अलावा कोई नही हो सकता". मामला सिर्फ एक-दो बार का हो तो शायद उसे अनदेखा भी कर दिया जाए, किन्तु लेखिका शोभा डे ने जब भी ट्वीट किया है, उसमें कुछ न कुछ उटपटांग और विवादित जरूर होता है. 


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सड़क दुर्घटना में केन्द्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे के मरने की खबर पर असंवेदनशील ट्वीट करते हुए पिछले दिनों शोभा डे ने कहा था कि 'मुंडे का मरना चौकाने वाली बात हैं, लेकिन उनके परिवार के लिए बुरे दिन की शुरुआत है'. शायद शोभा डे भाजपा सरकार के #अच्छेदिन नारे का मजाक उड़ा रही थीं, किन्तु क्या वाकई यह मजाक उड़ाने वाली जगह थी? यह किसी बच्चे को भी पता होता है कि दुश्मन की भी आखिरी यात्रा की कद्र की जाती है. यदि शोभा डे (Shobha de olympics tweet, Controversy Queen, Writer, Hindi Article) की बीते सालों की कुंडली खंगाली जाय तो इसमें कुछ भी ठीक नही मिलेगा. यदि एक-एक करके विवादों की बात करें तो इनकी लिखी पुस्तकों पर भी काफी विवाद हुआ है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके प्रशंसको द्वारा मोदी को रॉकस्टार कहने पर इनकी किच-किच से लेकर, उत्तर प्रदेश के दादरी कांड पर 'गोमांस खाने तक की बात' कह डालना अपने आप में किसी व्यक्ति की मानसिकता बतलाने के लिए काफी है. शोभा डे के इन कृत्यों पर पुलिस कम्प्लेन भी हो चुकी है, लेकिन शोभा जैसे व्यक्तियों को 'चारित्रिक-शोभा' की फ़िक्र ही कब रहती है. 

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इस जमात में सिर्फ शोभा डे ही अकेली हों, ऐसा भी नहीं है, बल्कि इस तरह की बयानबाजी पब्लिसिटी पाने के लिए काफी लोग करने लगे हैं. हालाँकि, विवादों से घिरे रहने का शौक कई बार इन लोगों को ही भारी पड़ जाता है, पर ऐसे लोगों को भारी पड़ने की परवाह ही कब होती है, अन्यथा वह हलके बयान/ कमेंट/ ट्वीट करते ही क्यों? तभी तो रियो वाले ट्वीट पर किसी ने कहा भी कि बिना मतलब के कोई भी बात कह कर अपमान और आलोचना सुनने की आदी हो चुकी हैं शोभा डे (Shobha de olympics tweet, Sports Hindi Article)! रियो विवाद के बाद भी बेहद कम उम्मीद है कि 'मल्लिका-ए-विवाद' शोभा डे कुछ सीखेंगी, क्योंकि किसी ने कहा भी है कि 'पत्थर पर के मारने चोखो तीर नशाय', मतलब पत्थर पर आप कितना भी धारदार तीर मारें, उस तीर की नोंक ही टूटेगी, पत्थर का भला क्या बिगड़ेगा, इसलिए ऐसे लोगों को जितना इग्नोर किया जाए, उतना ही दुरुस्त परिणाम आएगा, इस बात में दो राय नहीं!

- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.




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