नए लेख

6/recent/ticker-posts

असम में चला 'मोदी मैजिक' - Assembly Polls 2016 Assam result analysis, Hindi lekh, Mithilesh

*लेख के लिए नीचे स्क्रॉल करें...


पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के मतगणना की शुरुआती रुझान में कांग्रेस को सबसे ज्यादा झटका लगा है और यह कहा जाने लगा है कि अब 'कांग्रेस मुक्त भारत' का नारा वास्तविकता के काफी करीब नज़र दिखने लगा है! सबसे अधिक निराशा उसे असम में मिली है, जहाँ उसकी सरकार को बाहर का रास्ता देखना पड़ा है. चुनावी रिजल्ट की गणना के ताजा रूझानों के अनुसार, विधानसभा की 126 सीटों में से भाजपा को 89, कांग्रेस को 21, एआईयूडीएफ को 13 और अन्य को 3  सीटें मिल रही हैं. लगभग मतगणना संपन्न होने वाली है और परिणाम भी इसी के आस-पास रहेंगे. बताते चलें कि माजुली सीट से भाजपा के सीएम उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल ने जीत हासिल की है, जो भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार भी हैं. मोदी मैजिक का असर इस बार पूर्वोत्तर में देखने को मिल रहा है, इस बात में दो राय नहीं! ऐसा पहली बार हुआ है कि पूर्वोत्तर के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनेगी. जाहिर है, जश्न का रंग कहीं ज्यादा गहरा है और इसका असर पूर्वोत्तर के समस्त राज्यों पर भी पड़ने की सम्भावना जताई जा रही है. जीत से उत्साहित भाजपा के गडकरी ने बयान दिया है कि कांग्रेस मुक्त भारत गांधी जी का सपना था! जाहिर है, उनकी इस बात के निहितार्थ कहीं ज्यादा गहरे हैं. नरेंद्र मोदी जहाँ कहीं जाते हैं, वहां से वह रिश्ता जोड़ ही लेते हैं. असम के तिनसुकिया में रैली के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने मोदी ने कहा कि जब वे चाय बेचा करते थे, तो वे लोगों को 'असम टी' पिलाकर ताजगी का एहसास कराते थे. बेशक उनकी यह चुनावी ट्रिक हो, किन्तु कहीं न कहीं इस तरह के प्रचार से आप जनता के नजदीक तो जाते ही हो और नरेंद्र मोदी ने इसे बार-बार साबित भी किया है. असम टी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने तब कहा था कि मुझ पर असम का यह कर्ज है, जिसे मुझे चुकाना है.
इसे भी पढ़ें: केरल में 'वाम' ने फहराया परचम, कांग्रेस यहाँ से भी निराश!

असम की जनता ने प्रधानमंत्री की बात सुनी और उन्हें भारी बहुमत से असम की सत्ता दी है, और अब यह भाजपा की जिम्मेदारी है कि वह इस विश्वास को किस हद तक कायम रखती है, क्योंकि जनता के विश्वास को छलने वाले को जनता ने कभी माफ़ नहीं किया है! 1979-1985 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि असम में बिना किसी मुस्लिम पार्टी के सपोर्ट के सरकार बनने जा रही है, जाहिर है इसे वहां के जनमानस में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं मुख्य्मंत्री तरुण गोगोई पिछले तीन टर्म से असम में सत्ता सम्भाले हुए हैं, किन्तु असम की हालत ये है कि वहां की एक तिहाई जनता गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है. इस प्रदेश की लगभग 86 %आबादी ग्रामीण है और उनका मुख्य रोजगार कृषि है. असम की अर्थ व्यवस्था में कृषि का योगदान 1950 में 55 % था,जो 2015 में घट कर 17% तक आ गया है. जाहिर है, जब कृषि प्रधान प्रदेश में आप कृषि को बचाने की जुगत ही नहीं करेंगे तो समस्या उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है. ऐसे ही, सेहत और स्वच्छता के मामले में भी असम देश के बदतर राज्यों में एक है, जिसका परिणाम कहीं न कहीं कांग्रेस पार्टी को अबकी बार भुगतना पड़ा है. हालाँकि, विश्लेषक असम में भाजपा की जीत पर सर्वानंद सोनोवाल को याद करना नहीं भूल रहे हैं, जिसका सीधा कारण यही है कि नरेंद्र मोदी के संदेशों और छवि का प्रचार इस नेता ने बखूबी किया, जो असम के नागरिकों तक पहुंचा भी! वहीं असम की सबसे मजबूत मुस्लिम पार्टी एआईयूडीएफ जिसकी स्थापना 2005 में  मौलाना बदरूदीन ने किया है, वह 2011 के चुनाव में 18 सीटें ला क़र मुख्य विपक्षी पार्टी बन गयी थी, अबकी बार इसकी सीटों में भी कमी आयी है, जिसका ठीकरा इसके प्रमुख ने कांग्रेस पार्टी पर फोड़ते हुए कहा है कि वह 'कांग्रेस की वजह' से ही हारे हैं! जाहिर है, राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी नाकामी झेलने के साथ कांग्रेस पार्टी तमाम प्रदेशों में बुरा प्रदर्शन करती जा रही है तो इसके स्वाभाविक सहयोगी भी इससे पीछा छुड़ाने की जुगत में दिखाई देने लगे हैं.

इसे भी पढ़ें: तमिलनाडु में जयललिता की वापसी के मायने

हालाँकि, बदरुद्दीन की इस पार्टी के उदय और बढ़त के पीछे मुख्य कारण ये बताया जाता रहा है कि असम के 27 जिलों में से 9 जिले मुस्लिम आबादी वाले हैं और देखा जाये तो 2011 के जनगणना  में कश्मीर के बाद इस प्रदेश का दूसरा नंबर है मुस्लिम आबादी के मामले में! बावजूद इसके भाजपा का इस प्रदेश में बहुमत की स्थिति में खड़ा होना कई कहानी कहता है. पिछले 15 सालों से असम में लगातार कांग्रेस का शासन रहा है, लेकिन विकास के मामले में ये राज्य पिछड़ता चला गया है, इस बात में दो राय नहीं! ऐसे में कांग्रेस को अपने कर्मों का फल तो भुगतना ही था. वह बेशक राहुल गांधी को बचाने के लिए कहते फिरें कि राहुल गांधी, तमाम प्रदेशों में हार के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, किन्तु सच तो यही है कि कांग्रेस की अधिकांश नीतियां दिल्ली से तय होती रही हैं और ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व को जिम्मेदारी लेने से बचाया नहीं जा सकता है. बिजली, पानी, सड़क और खस्ताहाल अस्पतालों जैसी बेसिक सुविधाओं के लिए भी असामी अगर तरस रहे हैं और वहीं उल्फा तथा एटीटीएफ का आतंक फैलता गया है, तो बांग्लादेशी घुसपैठियों के असम में बसने का मुद्दा भी कांग्रेस को काफी नुक्सान पहुंचा गया है! कांग्रेस के शासन में निसंदेह घुसपैठियों को बढ़ावा मिला है और इस बात को बीजेपी ने जबरदस्त तरीके से चुनावी रैलियों में उछाला, जिसका फायदा उसे जबरदस्त ढंग से मिला भी है. भाजपा ने इस चुनाव में असम में बांग्लादेशी नागरिकों के घुसपैठ के मुद्दे को उठाते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा को सील करने का वादा किया है. इसी कड़ी में बीजेपी को  कांग्रेस के 9 विधायकों के साथ हेमंत बिश्व शर्मा के उनकी पार्टी में शामिल होने का कुछ फायदा मिला है तो कांग्रेस को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. ऐसे ही, चुनाव से पहले सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करने की रणनीति भाजपा के लिए फायदेमंद रही है तो 'देश में आनंद होगा और असम में सर्वानंद' का नारा भी अब सफल नारों की श्रेणी में शुमार हो ही चुका है.

Read this article too :: भई! यहाँ तो 'दीदी' ही 'दादा' हैं!


असम में चुनावी सभाओं के दौरान बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल का परिचय कराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह जुमला बार-बार दोहराते थे. नतीजों के बाद उनकी यह बात सही साबित हुई है. बताते चलें कि  54 वर्षीय सर्वानंद की गिनती असम के युवा तेजतर्रार नेताओं  में होती है. वे 1992 से 1999 तक आल असम स्टूडेंट यूनियन (AASU) के अध्‍यक्ष रहे, बाद में असम गण परिषद के सदस्य रहे और 2001 में वे पहली बार इस पार्टी से विधायक बने. एजीपी की सीनियर लीडरशिप के रवैये से नाखुश होकर सर्वानंद  2011 में बीजेपी में शामिल हुए और असम में किसी असरदार चेहरे की तलाश कर रही भाजपा ने उन्हें हाथों हाथ लिया और वे असम बीजेपी के अध्‍यक्ष के बाद अब असम के मुख्य्मंत्री बनने की ओर आगे कदम बढ़ा चुके हैं. जाहिर है भाजपा के इस कदम का उसे बड़ा लाभ मिला है. भाजपा के वादे पर लोगों ने विश्वास कर राज्य की कमान उसके हाथों में सौंप दी है और अब देखना है कि सत्ता आने के बाद भाजपा अपने वादे पर कितना कायम रहती है. असम की जीत ने बीजेपी के लगातार दो राज्यों दिल्ली और बिहार में मिली हार के जख्म पर मरहम का काम किया है तो वहीं 2017 में उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने में मदद भी करेगी! भाजपाई कहते नहीं थक रहे हैं कि इस जीत से ये भी साबित होता है कि दो साल केंद्रीय सत्ता में रहने के बाद भी मोदी लहर कायम है, तो कांग्रेस का सफाया भी द्रुतगति से होता जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी असम में भाजपा की जीत को ‘ऐतिहासिक’ और ‘अभूतपूर्व’ करार देते हुए कहा है कि पार्टी राज्य के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी. जाहिर है आने वाले सीएम से लेकर पीएम मोदी तक आने वाली जिम्मेदारियों को बखूबी समझ रहे हैं और उसे पूरा करने के लिए उन्हें जी जान लगाना ही होगा, इस बात में दो राय नहीं!
- मिथिलेश कुमार सिंह, नई दिल्ली.

यदि आपको मेरा लेख पसंद आया तो...
f - फेसबुक पर 'लाइक' करें !!
t - ट्विटर पर 'फॉलो'' करें !!

assam, assembly election 2016, bjp, election,  भाजपा, असम, विधानसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव 2016, tamil nadu, west bengal, puducherry, assam, kerala, election results, विधानसभा चुनाव 2016, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, चुनाव परिणाम,congress, rahul gandhi, bjp, narendra modi, exit poll, news on  assembly election 2016, hindi article on assam election 2016, सर्वानंद सोनोवाल, पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम उम्‍मीदवार, खेल मंत्री, बीजेपी, असम गण परिषद, Sarbanand Sonowal, PM Narendra Modi, CM candidate, Sports Minister of India, BJP, Assembly Polls 2016, Breaking news hindi articles, Latest News articles in Hindi, News articles on Indian Politics, Free social articles for magazines and Newspapers, Current affair hindi article, Narendra Modi par Hindi Lekh, Foreign Policy recent article, Hire a Hindi Writer, Unique content writer in Hindi, Delhi based Hindi Lekhak Patrakar, How to writer a Hindi Article, top article website, best hindi article blog, Indian blogging, Hindi Blog, Hindi website content, technical hindi content writer, Hindi author, Hindi Blogger, Top Blog in India, Hindi news portal articles, publish hindi article free

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ