ब्रांड ऐम्बैसडर की कुछ तो जवाबदेही हो! Responsibility of brand ambassadors, hindi article, Amrapali and Dhoni

हमारे देश में भी यह चलन अब आम हो गया है कि किसी भी क्षेत्र में कोई व्यक्ति प्रसिद्द हो गया तो तमाम कंपनियां उसे अपना 'ब्रांड ऐम्बैसडर' बनाने की चाह में लग जाती हैं. इसके लिए उस व्यक्ति को अच्छी खासी पेशकश भी की जाती है तो वह व्यक्ति अपनी प्रसिद्धि का फायदा उठकर अपने 'प्रशंसकों' को इस बात के लिए तैयार करने की कवायद शुरू कर देता है कि 'अमुक' कंपनी से ही 'अमुक' सामान खरीदें. इसके लिए तमाम तरह के ऑनलाइन, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विज्ञापन तो तैयार किये ही जाते हैं, साथ ही साथ विभिन इवेंट्स में और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष दुसरे तरीकों से 'ब्रांड' का गुणगान किया जाता है. ऐसे में उस वस्तु विशेष की क्वालिटी का मैटर कहीं पीछे छूट जाता है तो जो खरीददार अपने पसंदीदा स्टार को देखकर वह 'सामान' खरीदता है, वह ठगा महसूस करने लगता है. कई बार तो यह स्वास्थ्य की दृष्टि से, आर्थिक दृष्टि से खतरनाक 'ठगी' जैसा मामला बन जाता है. पिछले दिनों 'ब्रांड ऐम्बैसडरों' पर तब सवाल उठा था, जब '2 मिनट की मैगी' पर स्वास्थ्य की दृष्टि से गम्भीर सवाल उठे और उसे अनेक जगहों पर प्रतिबंधित किया गया. तब इसके ब्रांड ऐम्बैसडर अमिताभ बच्चन और माधुरी दीक्षित जैसे नामी सितारे विवादों में घिर गए थे और लोगों ने पूछना शुरू कर दिया था कि टेलीविजन पर नाच-गाकर और विभिन्न तरीकों से बिक्री को बढ़ाने की कवायद करने वालों की 'जवाबदेही' क्यों नहीं तय होनी चाहिए? जाहिर है कि छोटे-छोटे बच्चे, जो अमिताभ बच्चन और माधुरी दीक्षित जैसे अनेक सितारों के फैन हैं और उनकी फिल्मों के दीवाने हैं, वह तो उनके मोटिवेट करने पर 'मैगी' या दुसरे प्रोडक्ट खरीद लेते हैं, उसका सेवन करते हैं, किन्तु उस प्रोडक्ट की क्वालिटी ख़राब होने से तो उनका जीवन ही खतरे में पड़ जाता है. 

ऐसा ही मामला 'रियल स्टेट कंपनी' आम्रपाली और क्रिकेट के बड़े सितारे महेंद्र सिंह धोनी की ब्रांड ऐम्बैसडरशिप को लेकर सामने आया है. रियल स्टेट के कारोबार में कितनी धांधली हो रही है, यह बात किसी से छुपी नहीं है. इसकी तमाम योजनाओं में लोगों को घर या फ्लैट बना बनाया मिल जाता है, बस आपको पेमेंट करनी होती है! इनके प्रोजेक्ट्स का हर तरह की मीडिया में जम कर प्रचार किया जाता है तो धोनी जैसे सितारे इसमें प्रमुख भूमिका निभाते हैं. इस क्षेत्र पर अगर आप गौर करें तो रियल स्टेट के तमाम प्रोजेक्ट्स में कभी-कभी ही आपको ऐसे फ्लैट या घर मिलता है, जिसमे आप रह सकते हैं, अन्यथा बाकी सारा भविष्य की गर्त में छुपा होता है. 99 % रियल स्टेट प्रोजेक्ट्स में पहले आप पैसे इन्वेस्ट करो फिर 'हम' घर बनाने के बाद आपको दे देंगे, ऐसा वादा डेवलपर्स करते हैं! कई बार, इन्सटॉलमेंट में पेमेंट करना होता है, जैसे पहला इन्सटॉलमेंट में बेस बना है, दूसरे इंस्टॉलमेंट में स्ट्रक्चर, तीसरे इन्सटॉलमेंट में छत और उसके बाद फिनिशिंग के टाइम लास्ट इन्सटॉलमेंट दे कर आप अपना घर या फ्लैट ले सकते हैं. किन्तु, इसकी रियल हालत यह होती है, अधिकांश ग्राहकों को समय से फ्लैट नहीं दिया जाता है, जबकि कई बार तो उनके साथ बताया कुछ जाता है और मिलता कुछ और है. हाल ही में ऐसा मामला दिग्गज रियल स्टेट कंपनी आम्रपाली के साथ आया है. टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इसके ब्रांड ऐम्बैसडर रहे हैं, हालाँकि कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोप लगने के बाद धोनी ने इससे नाता तोड़ लिया हैं, किन्तु सवाल यह है कि यह मामला इतना सीधा और सरल भी नहीं है. इसके एक प्रोजेक्ट में, महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी धोनी 25% की हिस्सेदार रही हैं. बताया जा रहा है कि नॉएडा में आम्रपाली के सफायर प्रोजेक्ट के बिल्डर ने फ्लैट तो तैयार किये हैं, लेकिन उन्होंने जिस तर्ज पर लोगों से इन्वेस्ट कराए वैसा नहीं कर पाए और इसी बात से लोग नाराज नज़र आ रहे हैं. 

आखिर, काम के अनुसार आपकी जबाबदेही भी बनती है और कंपनी इस मामले में फेल नज़र आ रही हैं, जिसको लेकर सोशल मीडिया पर खूब हंगामा मचा हुआ हैं. आम्रपाली चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा के अनुसार 800 फ्लैट में लोगों ने रहना शुरू कर दिया है. किन्तु लोगों का आरोप हैं कि यहाँ प्रॉपर ढंग से उनकी बेसिक जरूरत बिजली और पानी अभी भी नहीं मिला हैं. हालाँकि, बताया जा रहा है कि आम्रपाली के बिल्डर उन्हें देना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक बदहाली की वजह से बिल्डरों के लिए यह काफी मुश्किल हो गया है. पर सवाल यही है कि कंपनी 'ब्रांड ऐम्बैसडरों' पर करोड़ों फूंकने की बजाय, लोगों की सुविधाओं पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है? कंपनी के कुप्रबंधन की कीमत, आखिर लोग क्यों चुकाएँ? लोग अपने जीवन भर की कमाई से फ़्लैट या मकान खरीदने की सोच पाते हैं और अगर कोई 'ब्रांड ऐम्बैसडर' का चश्मा पहनाकर उन्हें धोखा देने की रणनीति पर कार्य करता है तो उसे इसकी सजा तो जरूर ही मिलनी चाहिए, साथ ही साथ 'ब्रांड ऐम्बैसडर' को भी कानूनी दायरे में लाया जाना चाहिए. इन सब कारणों की वजह से ही फ्लैट खरीद चुके लोगों ने धोनी को ट्विटर में टैग कर कंपनी पर काम पूरा करने के लिए दबाव बनाने के लिए अथवा इससे अलग होने को कहा. आखिर, सितारों की अपने फैंस के प्रति भी कुछ जवाबदेही तो होनी ही चाहिए! हालाँकि, धोनी ने मामले को पहले संभालने की कोशिश की और जब नहीं सम्हाल सके तो खुद को आम्रपाली से अलग कर लिया. जाहिर है, ब्रांड्स को अपनी इमेज की चिंता सता रही होगी, किन्तु उन लोगों का क्या, जो ब्रांड्स के झांसे में आकर 'फंस' जाते हैं? हालाँकि, लोगों को भी जांच-पड़ताल करके और कंपनी के बारे में सोच-समझकर ही इन्वेस्ट करना चाहिए, किन्तु इससे कंपनी या 'ब्रांड ऐम्बैसडर' की जिम्मेदारी कतई कम नहीं होती है! 

इस मामले में क्रिकेटर हरभजन सिंह भी कूद पड़े हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि 'वेल डन धोनी, तुमने अच्छा किया कि आम्रपाली के ब्रैंड अंबैसडर से हट गए.' यही नहीं, हरभजन ने भी आम्रपाली पर धोखाधड़ी का मजबूत आरोप चस्पा कर दिया और कहा कि आम्रपाली ने एक और वादा 2011 वर्ल्ड-कप के बाद किया था, जिसे आज तक पूरा नहीं कर पाई! हालाँकि, हरभजन सिंह की इस बात का जबाब देते हुए कंपनी के अनिल शर्मा ने कहा है कि धोनी और उनके बीच का करार खत्म हो गया है और 'माही' अब उनकी कंपनी के ब्रांड एम्बेसडर नहीं हैं, इसलिए ऐसा ट्वीट करना ठीक नहीं. जहाँ तक खिलाड़ियों के विला की बात है तो वह तैयार है, खिलाड़ी आएं, प्रोसेस करें और विला ले जाएं. जाहिर है, अब कंपनी बेशक यह बात कह रही है, किन्तु 2011 के बाद 5 साल पूरे हो गए हैं और कंपनी को वर्ल्ड-कप के समय की घोषणाओं को तत्काल पूरा करना चाहिए. कंपनी द्वारा अब 'फॉर्मेलिटीज' का ज़िक्र करना उसकी 'बदनीयती' को साफ़-साफ़ दर्शाता है. हरभजन सिंह का यह 'ट्वीट' निश्चित रूप से आम्रपाली के हज़ारों खरीददारों के ज़ख्म पर मरहम की तरह है, जो कंपनी द्वारा ठगे महसूस कर रहे हैं. हरभजन के इस कदम की तारीफ़ होनी चाहिए तो 'धोनी' द्वारा इन मामलों को अब तक संज्ञान में न लेने की निंदा भी की जानी चाहिए. आखिर, उनकी लम्बी-चौड़ी वकीलों की टीम बैठकर क्या करती है, अगर वह धोनी की इमेज का ख़याल न रह सके? इन मामलों में सरकार और प्रशासन की जवाबदेही भी बनती है, क्योंकि विभिन्न प्रोजेक्ट्स को मंजूरी भी उसी के द्वारा दी जाती है. हालाँकि, इन्हीं सब उलझनों को देखते हुए सरकार द्वारा 'रियल स्टेट बिल' पास किया गया है, ताकि आगे से लोग धोखाधड़ी के शिकार न हों! पर सर्वाधिक सावधानी लोगों द्वारा खुद बरते जाने की आवश्यकता है. कभी फ्लैट या घर खरीदने से पहले इसकी पूरी पड़ताल अवश्य करें कि सरकार द्वारा दिए गए मानक को 'बिल्डर' पूरा कर रहा है या नहीं! हालाँकि, यह बात जितना कहना आसान है, करना उतना ही मुश्किल, क्योंकि फील्ड्स में हालात और होते हैं तो लोगों के पास 'समय की कमी' भी एक बड़ा मुद्दा होती है. उलझनें कई हैं और इसके लिए कई स्तरों पर सख्ती की आवश्यकता है, विशेषकर प्रशासनिक स्तर पर, क्योंकि लोगों का आखिरी भरोसा सरकार ही तो होती है.

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2 comments:

  1. Kabhi bhi kisi sirf chahte stars kI khatir koi bhi bda faisla nhi lena chahiye....iske sath hi ghar kharide se phle iske bare pe puri trh se check kre.....

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  2. Kabhi bhi kisi sirf chahte stars kI khatir koi bhi bda faisla nhi lena chahiye....iske sath hi ghar kharide se phle iske bare pe puri trh se check kre.....

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