संतुलन सीखिए प्रधानमंत्री मोदी से! Prime minister Modi and Yoga, Hindi Article, Mithilesh

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की चारों ओर धूम मची हुई है और जिस तरीके से समस्त विश्व ने इसे प्राथमिकता देना शुरू किया है, उसका अधिकाधिक श्रेय भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है. ऐसा कहना उचित नहीं होगा कि नरेंद्र मोदी के पहले योग नहीं था या योगाचार्य या योग के ब्रांड-अम्बैसडर नहीं थे, किन्तु इस बात में भी किसी को शक नहीं होना चाहिए कि योग को लेकर भारत के लोगों के साथ-साथ वैश्विक समुदाय में इस स्तर की रुचि और जागरूकता कतई नहीं थी. योग को पहले लोग भारतीय ऋषि परंपरा से जोड़कर पिंड छुड़ा लेते थे, किन्तु जन-जन की भागीदारी वह भी गौरव के साथ सुनिश्चित करने का श्रेय निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना एवं उनकी व्यक्तिगत रुचि (Prime minister Modi and Yoga) को दिया जाना चाहिए. मुझे पिछली बार के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का एक उद्धरण याद आता है, जिसे यहाँ बताया जाना सामयिक रहेगा. संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा के बाद जब विश्व भर में इसे मनाने की तैयारियां चल रही थीं तब किसी पत्रकार ने रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से पूछा कि उनका अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस और भारतीय पीएम के प्रयासों के बारे में क्या कहना है? तब छूटते ही पुतिन ने उल्टा सवाल दागा कि 'क्या पीएम मोदी खुद योग करते हैं'? 
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Prime minister Narendra Modi and Baba Ramdev, International Day of Yoga
जाहिर है जब आप किसी भी चीज या विचार का प्रमोशन करते हैं तो उसके साथ यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से जन्म लेता है कि आप खुद किस स्तर तक उस बारे में समर्पित हैं! इसे दूसरी भाषा में 'कथनी-करनी' की समानता अथवा 'चरित्र' भी कहा जाता है. हालाँकि, रूसी राष्ट्रपति तब सम्भवतः इसलिए खिंचे-खिंचे थे, क्योंकि अमेरिका और भारत के सम्बन्धों के साथ-साथ मोदी और ओबामा की दोस्ती भी परवान चढ़ रही थी. हालाँकि, रूसी राष्ट्रपति का प्रश्न लोगों के मन से अब काफी हद तक निकल गया होगा क्योंकि अब भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर ने प्रधानमंत्री मोदी को योग करते देख लिया है. न केवल योग करते देखा है, बल्कि पीएम मोदी की 'संतुलित दिनचर्या' (Prime minister Modi and Yoga) से करोड़ों लोग प्रेरित भी हो रहे हैं. भागदौड़ भरी लाइफ, बदलता खान-पान और अव्यवस्थित दिनचर्या ने आज हममें से अधिकांश को असमय ही बीमारियों का गढ़ बना दिया है. बढे-बूढ़ों की तो बात ही छोड़िए, बच्चे भी छोटी सी उम्र में तमाम रोगों से ग्रस्त होते जा रहे हैं. ऐसी परिस्थिति में ख़ुशी की बात ये है कि आज तमाम बड़ी हस्तियां और समाज में प्रतिष्ठित लोग योग को ले कर समाज में जागरूकता फ़ैलाने का काम कर रहे हैं, जिसका असर आम लोगों के ऊपर भी पड़ रहा है. इससे भी बड़ी बात यह है कि इस क्षेत्र की अगुवाई करते हमारे पीएम हर जगह दिख जाते हैं. 
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Management Guru Narendra Modi and Yoga in his life
इस बार द्वितीय 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंडीगढ़ में 30 हजार से अधि‍क लोगों के साथ योग किया. चंडीगढ़ में अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि 'योग क्या मिलेगा इसके लिए नहीं है, बल्कि योग में मैं क्या छोड़ पाऊंगा, किन-किन चीजों से मुक्ति पा सकूंगा, इसका मार्ग प्रशस्त होता है. पीएम ने साफ़ तौर पर कहा कि 'योग पाने का नहीं, बल्कि मुक्ति का मार्ग' है. अब अगर किसी एक व्यक्तित्व की इतनी सुलझी सोच हो तो आपको सोचने की जरूरत नहीं पड़ती है उसके उद्देश्यों के बारे में! योग की परतों की इतनी सुन्दर व्याख्या आपको भला और कहाँ सुनने को मिलेगी. पीएम मोदी ने कहा कि 'योग नास्तिक और आस्तिक दोनों के लिए है, तो ये गरीब के लिए भी है और अमीर के लिए भी. ये एक तरह का जीवन बीमा है, जो जीरो बजट पर होता है. स्वास्थ्य और कल्याण की बातें तो वही हैं जो तमाम ऋषि मुनि कहते रहे हैं, किन्तु वर्तमान प्रतीकों से जोड़कर उसे प्रेरक बनाने वाले पीएम के इन शब्दों और वाक्यों को सुनकर वगैर 'वाह' किये आप नहीं रह सकते हैं!.
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Prime minister Modi Yoga, PM in Chandigarh
यूँ तो योग की परम्परा हमारे देश में प्राचीन काल से है, लेकिन बाबा रामदेव ने इसे सुगम और सरल बना कर भारत तथा विदेशों में भी लोगों के अंदर जिज्ञासा पैदा की. ठीक ऐसे ही हमारे प्रधानमंत्री ने योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थान दिला कर वो उपलब्धि हासिल कर ली है कि जब-जब योग का नाम लिया जायेगा, तब-तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी जरूर लिया जायेगा. न केवल कैमरों के सामने ही, बल्कि मोदी ने अपने जीवन में भी योग को महत्वपूर्ण स्थान दिया है. जानकारी के अनुसार, उनकी सुबह की शुरुआत योग और प्राणायाम से ही होती है. जहां एक साधारण मनुष्य को 6 से 7 घंटे की नींद आवश्यक मानी जाती है, वहीं पीएम मोदी मात्र 3 से 4 घंटे की नींद लेते हैं, बावजूद इसके इनके कार्य करने की क्षमता और ऊर्जा की कायल पूरी दुनिया है. मोदी ने कई बार इस बात का जिक्र लोगों के सामने किया है कि "वह सुबह जितना एनर्जी के साथ काम करते हैं, उतनी ही एनर्जी रात तक उनके अंदर रहती है, जिससे थकान का प्रभाव न्यून होता है और ये सब कर पाने का श्रेय पीएम मोदी बेहिचक 'योग' को देते हैं. 
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Narendra Modi on Rajpath, with Yoga volunteers on International Day of Yoga
यह बात हम सबको ज्ञात ही है कि नरेंद्र मोदी की योग के प्रति लगाव और दृढ निश्चय का ही परिणाम है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया और इसके साथ ही 40 इस्लामिक राष्ट्रों समेत 190 से अधिक देशों ने योग के लिए एक विशेष दिन रखने की इस पहल का समर्थन किया. इसी कड़ी में पहली बार 21 जून 2015 को पूरे विश्व ने योग दिवस के रूप में मनाया, तो इस दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक राजपथ पर 36,000 लोगों के साथ योगाभ्यास किया. इस बार भी पीएम मोदी ने कमर कसी और इस दिवस की सार्थकता सुनिश्चित करने में जी-जान झोंक दिया. योग दिवस को सार्थक बनाने और योग को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए उन्होंने अपने मंत्रिमंडल को भी सक्रियता से कार्य पर लगाया तो इस दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 57 केंद्रीय मंत्री देशभर में योग की अलख जगाते नज़र आये. जाहिर है आगे रहकर सफल महापुरुष किसी कार्य की अगुवाई किस प्रकार करते हैं, इसके जीते जागते उदाहरण हमारे प्रधानमंत्री से बेहतर कोई दूसरा नहीं! 
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Different poses of PM Modi on International Day of Yoga
हम और आपको 'योग' करने के लिए शायद 5 मिनट का समय भी न मिलता हो, किन्तु देश का प्रधानमंत्री होने के बावजूद, सबसे व्यस्ततम होने के बावजूद एक व्यक्ति किस प्रकार मर्यादित जीवन जीता है, इस बात का 'संतुलन' हम सबको सीखना चाहिए. और हाँ, इसके लिए किसी किताब की आवश्यकता हमें नहीं पड़ेगी, बस टीवी, रेडियो या अख़बार में हमें अपने तेजस्वी प्रधानमंत्री और उनके कार्यों को सकारात्मक दृष्टि से देखते और अपनाते रहना होगा. न... न... मैं यह नहीं कह रहा कि अगर आप उनके राजनीतिक आलोचक हैं तो उनकी आलोचना न करें, किन्तु जीवन में 'संतुलन' का अध्याय भी उनसे जरूर सीखें! आखिर 'संतुलन' ही तो योग है.

- मिथिलेश कुमार सिंहनई दिल्ली.



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