भारत के नक्शे पर पाकिस्तान की गैर-जरूरी बेचैनी! India, Pakistan relations, Kashmir and map issue, Hindi article

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भारत पाकिस्तान का मामला दक्षिण एशिया के सर्वाधिक उलझाऊ मामलों में है. खासकर, पाकिस्तान अपने आतंरिक हालातों से निपटने में अक्षम रहा है और इसकी कमी वह अपने 'भारत विरोध' के सहारे पूरा करता रहा है. उसके कई विशेषज्ञ इस बात को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी चुके हैं कि अगर पाकिस्तान ने भारत विरोध करना छोड़ दिया तो वह कई टुकड़ों में बंट जायेगा! ताजा मामला भारत के उन रूल-रेगुलेशन के बारे में है, जिसे उसने नक़्शे जारी करने को लेकर जारी किया है. भारत द्वारा यह गाइडलाइन जारी करना उसकी मजबूरी बन गया था, क्योंकि दुनिया भर में कई आर्गनाइजेशन भारत का गलत नक्शा दिखाते रहे हैं. पिछले साल जब भारत के प्रधानमंत्री चीन की यात्रा पर गए थे, वहां भारत के नक़्शे से जम्मू और कश्मीर का हिस्सा ही गायब था और सबसे अजीब बात ये है कि इसी नक़्शे को प्रधानमंत्री के सामने भी दिखाया गया. चीन ही नहीं यूनाइटेड नेशन और वर्ल्ड बैंक भी कई बार भारत के गलत नक़्शे को शो करने का दुस्साहस कर डालते हैं और ऐसी स्थिति में भारत की ओर से सख्त रूख अपनाया जाना कहीं से गलत नहीं है. सर्च इंजिन गूगल की बात करें तो उसने भी कई बार ओछी हरकत की है, यहाँ तक कि देश की सीमा को दर्शाने में भी, जो बेहद निंदनीय है.  इस तरह की हरकतों का परिणाम ही है 'जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल 2016’. इसके अनुसार भारत के नक्शे की गलत प्रस्तुति करने पर सात साल कैद के साथ-साथ उल्लंघनकर्ता पर 100 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है. इसी बिल के पास होने से पाकिस्तान बेचैन है. पाकिस्तान को भारत के नक़्शे में कश्मीर के आने पर इतनी चिंता सताने लगी कि पाकिस्तानी सरकार ने यूनाइटेड नेशन को खत लिख डाला. 
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साफ़ तौर पर सोचने वाली बात है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ जिससे पाकिस्तान ने फिर से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जुर्रत की है? साफ़ है कि पाकिस्तान के आगे आने में कहीं न कहीं चीन से दोस्ती का असर नज़र आता है. खैर जो भी हो, पाकिस्तान ने इस बार नक़्शे के उस हिस्से की बात की है जिसे विवादित बताया गया है और जिस पर उसने चीन के साथ आर्थिक गलियारे का समझौता किया है. जाहिर तौर पर उसे विरोध तो करना ही था, लेकिन उसका विरोध नक्कारखाने में तूती से ज्यादा कुछ अहमियत नहीं रखता है, क्योंकि उसने खुद कश्मीर के हिस्सों पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है और नैतिक स्तर पर उसे कोई हक़ नहीं बनता है कि वह भारत के द्वारा जारी की गयी नक़्शे की गाइडलाइन पर प्रश्नचिन्ह उठाये. किन्तु, कुत्ते की दुम कभी सीधी हुई है, जो आज सीधी हो जाएगी? हालाँकि, पाकिस्तान की प्रतिक्रिया पर भारतीय  विदेश कार्यालय ने स्पष्ट रूप में कह दिया है कि पाकिस्तान ने भारत सरकार द्वारा भारतीय संसद में विवादित ‘जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल’ लाने के प्रयास के बारे में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के समक्ष गंभीर चिंताएं जताई हैं, जिसकी कोई वाजिब वजह नहीं हैं, क्योंकि यह भारत का आतंरिक मामला है. 
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ऐसे में पाकिस्तान के पास कुछ ख़ास विकल्प नहीं बचता हैं, पर चूंकि पाकिस्तान कश्मीर के हर एक मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय पर उठाना चाहता है, इसलिए उसने इस मामले को भी उठाया है, जिससे उसको कोई परिणाम नहीं मिलने वाला है. पाकिस्तान जिस चीन की बदौलत उछल रहा है लेकिन उसको ये पता होना चाहिए कि अमेरिका की तरह चीन भी उसको अपने मकसद के लिए इस्तेमाल कर रहा है, और जैसे अमेरिका ने उसको लात मार कर दूर करना शुरू कर दिया है, वैसे ही चीन भी समय आने पर करेगा, इस बात में दो राय नहीं! हालाँकि, पाकिस्तानी चिंतक भी इन बातों को समझते हैं, लेकिन इसके लिए वह अपनी पुरानी थ्योरी का रोना ही रोते हैं कि अगर पाकिस्तान ने भारत-विरोध करना छोड़ दिया तो फिर उसके अस्तित्व पर ही संकट आन खड़ा होगा और भारत के नक़्शे वाले बिल पर भी पाकिस्तानी हुक्मरानों की बेचैनी यही जाहिर करती है.




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